बीमारी या फिर Unknown Gunmen? Pakistan में आतंकी मसूद अजहर के भाई की मौत, वजह पर रहस्यमयी चुप्पी

Masood Azhar
ANI
Neha Mehta । Mar 31 2026 10:25AM

जैश सरगना मसूद अजहर के भाई और आतंकी संगठन के अहम सदस्य ताहिर अनवर की पाकिस्तान में मौत हो गई है, लेकिन संगठन द्वारा मौत की वजह पर रहस्यमयी चुप्पी साधने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्राकृतिक मौत है या किसी अंदरूनी कलह का नतीजा।

पाकिस्तान का  प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से जुड़े मोहम्मद ताहिर अनवर जो संगठन के प्रमुख मसूद अजहर के भाई थे उनका निधन हो गया है।सबसे हैरान करने बात यह है कि उसकी मौत कैसे हुई, इस पर अभी तक कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है। ताहिर अनवर कोई साधारण नाम नहीं था। वह लंबे समय से जैश की गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और संगठन के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाता रहा था।

उसकी मौत की पुष्टि खुद संगठन के आधिकारिक चैनल के जरिए की गई। बताया गया कि उसका अंतिम संस्कार बहावलपुर की जामिया मस्जिद उस्मान वाली में सोमवार देर रात किया गया। लेकिन इस पूरे ऐलान में एक चीज गायब थी जो थी उसकी मौत की वजह। आमतौर पर इस तरह की खबरों के साथ बीमारी, हादसा या किसी हमले का जिक्र जरूर होता है। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं बताया गया। न तो किसी बीमारी की बात, न किसी घटना का जिक्र—बस एक सीधी सूचना: “मोहम्मद ताहिर अनवर की मौत हो गई।” यही चुप्पी अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है। क्या यह प्राकृतिक मौत थी? या इसके पीछे कुछ और कहानी छिपी है? फिलहाल, कोई आधिकारिक जवाब नहीं है।

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जैश-ए-मोहम्मद कोई नया या छोटा संगठन नहीं है। इसका नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ चुका है। इनमें 2001 का संसद हमला, 2016 का पठानकोट एयरबेस अटैक, उरी में सैनिकों पर हमला और 2019 का पुलवामा हमला शामिल हैं—जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। यानी यह सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा रहा है।

पिछले कुछ सालों में भारत ने भी कई बार कड़ा रुख अपनाया है। खासकर बहावलपुर में स्थित जैश के ठिकानों पर किए गए हमले जिनमें एयर स्ट्राइक्स शामिल थी, वह काफी चर्चा में रहे। इन कार्रवाइयों में संगठन के कई ठिकाने तबाह किए गए और मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदार भी मारे गए। बताया जाता है कि एक बड़े हमले में उसकी बहन, बहनोई, भतीजा-भतीजी और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल थे। संगठन के कुछ अहम सहयोगी भी उस कार्रवाई में मारे गए थे।

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दिलचस्प बात यह रही कि लंबे समय तक इन नुकसानों पर चुप्पी साधे रखने के बाद, संगठन ने पिछले साल पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से इन मौतों को स्वीकार किया।ताहिर अनवर की मौत सिर्फ एक व्यक्ति का अंत नहीं है बल्कि यह उस नेटवर्क के भीतर की हलचल का संकेत भी हो सकती है, जो लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहा है।

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