भारत के डिफेंस प्रोडक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए! 110 % का ऐतिहासिक उछाल

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन यानी कि डिफेंस प्रोडक्शन अपने अब तक के सबसे ऊंचे शिखर यानी कि 1.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। यानी कि ₹178,000 करोड़। यह कोई मामूली बढ़त नहीं। अगर पिछले साल यानी 2024-25 की तुलना करें तब यह आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ था। अगर एक साल के अंतर को देखें तो 15 6% की भारी उछाल दर्ज की गई।
आज के 10 साल पहले किसी भी देश ने इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि आगे चलकर भारत अपनी सुरक्षा के लिए हथियार खुद बनाएगा। पहले भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीददार देश कहा जाता था। हम छोटी से छोटी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हुआ करते थे। आज भी हमारे पास जितने भी घातक हथियार हैं ज्यादा से ज्यादा हमने दूसरे देशों से खरीदे हैं। लेकिन अब यानी साल 2026 में भारत ने रक्षा क्षेत्र में वो कर दिखाया जो सच में एक वक्त पर असंभव लगता था और यह कोई हवाहवाई बातें नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन यानी कि डिफेंस प्रोडक्शन अपने अब तक के सबसे ऊंचे शिखर यानी कि 1.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। यानी कि ₹178,000 करोड़। यह कोई मामूली बढ़त नहीं। अगर पिछले साल यानी 2024-25 की तुलना करें तब यह आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ था। अगर एक साल के अंतर को देखें तो 15 6% की भारी उछाल दर्ज की गई।
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यही चीज अगर 2020-21 के आंकड़ों से कंपेयर की जाए तो उस वक्त यह आंकड़ा 84,643 करोड़ का था। भारत के डिफेंस प्रोडक्शन के बारे में बताएंगे और यह भी कि कैसे पिछले 10 सालों में भारत ने पूरा गेम बदल दिया है। देखिए पहले खबर को समझ लेते हैं। अगर आज से 12 साल पीछे जाएं तो साल 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन महज 43746 करोड़ था और आज 2025-26 में यह बढ़कर ₹178000 करोड़ हो गया है। यानी पिछले 10 से 12 साल के भीतर भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ चुका है। और इसी चीज को बदलाव कहते हैं। कहां 43,000 कहां 1 लाख 78,000 करोड़। मतलब ये डिफरेंस बहुत बड़ा है और जाहिर सी बात है इन 12 सालों में अपने डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए भारीभरकम मेहनत भी की गई है। अच्छा ऐसा नहीं है कि इसमें सिर्फ सरकारी कंपनियों का हाथ है। इसमें प्राइवेट कंपनियों की भूमिका भी बहुत बड़ी है। अगर इस आंकड़े की बात करें जो 2025-26 में आया है तो इसमें 76% हिस्सेदारी सरकारी कंपनियां डीपीएसयूस ने संभाली हैं। लेकिन साथ ही साथ देश की प्राइवेट कंपनीज की हिस्सेदारी पिछले साल के 22% से बढ़कर अब 24% हो गई है। और अगर रुपयों में कहें तो प्राइवेट सेक्टर ने अकेले ₹42,000 करोड़ का ऐतिहासिक योगदान दिया जो अब तक का ऑल टाइम हाई है।
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मान लीजिए देश में डिफेंस प्रोडक्शन बढ़ रहा है तो जाहिर सी बात है दुनिया भर के देशों की रुचि भारत के हथियारों में भी है। आज भी हम दूसरे देशों से हथियार लेते हैं। लेकिन साथ ही साथ हम अपने हथियार उन्हें बेचने का भी काम करते हैं। बता दें इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री मोदी का भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट आया है। जहां उन्होंने लिखा कि भारत की रक्षा क्षमताओं में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव आत्मनिर्भरता के विज़न, तकनीकी नवाचार और देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण की वजह से संभव हुआ है। इसके अलावा इस ऐतिहासिक कामयाबी पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप में भारत का रक्षा उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। राजनाथ सिंह ने आगे लिखा यह शानदार कामयाबी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन, पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है।
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