G7 Summit से पहले Mark Carney का बड़ा बयान, बोले- दुनिया में बजा India का डंका

Carney
ANI
अभिनय आकाश । Jun 16 2026 6:11PM

फ्रांस में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले कार्नी ने कहा कि यह इस बात की मान्यता है कि G7, अगर कभी दुनिया को चलाता भी था, तो अब वह दुनिया को नहीं चलाता और न ही ऐसा होने का दिखावा करता है।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी तेज़ी से बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को दर्शाती है, जहाँ अब बड़े फ़ैसले केवल कुछ ही देश नहीं ले सकते। अपनी छह-दिवसीय यूरोपीय यात्रा के दौरान ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में बातचीत करते हुए कार्नी ने कहा कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच चर्चा में भारत जैसे देशों को शामिल करना यह दिखाता है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक वैश्विक सहयोग की ज़रूरत है। फ्रांस में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले कार्नी ने कहा कि यह इस बात की मान्यता है कि G7, अगर कभी दुनिया को चलाता भी था, तो अब वह दुनिया को नहीं चलाता और न ही ऐसा होने का दिखावा करता है। 

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भारत की मौजूदगी बदलती ग्लोबल स्थितियों का संकेत है

कार्नी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्लोबल हालात काफ़ी बदल गए हैं, इसलिए G7 के लिए ज़रूरी है कि वह अपने पारंपरिक सदस्यों के अलावा प्रभावशाली देशों के साथ भी जुड़े। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश ऐसे मुद्दों पर अनोखे नज़रिए और व्यावहारिक समाधान लाते हैं जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समिट में न सिर्फ़ G7 के सदस्य बल्कि कई सहयोगी देश भी शामिल होंगे। यह ग्लोबल चर्चाओं को ज़्यादा समावेशी और असरदार बनाने की एक बड़ी कोशिश है।

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समिट में कई उभरती ताक़तों को बुलाया गया है

मंगलवार को एवियन में शुरू होने वाले 52वें G7 समिट में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ-साथ भारत, ब्राज़ील, मिस्र, केन्या और कई खाड़ी देशों जैसे आमंत्रित देशों के नेता भी शामिल होंगे। कार्नी के मुताबिक, इन देशों की भागीदारी से ग्लोबल प्राथमिकताओं पर चर्चा का दायरा बढ़ेगा और राष्ट्रीय सीमाओं से परे की चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बैठक एक उभरती हुई विश्व व्यवस्था को आकार देने में भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में भी ऐसी ही बात कही थी, जहाँ उन्होंने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मध्यम दर्जे की ताक़तों के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया था।

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