43 साल बाद Norway में भारतीय पीएम, वैश्विक उथल-पुथल के बीच Modi की यह यात्रा क्यों है अहम?

PM Modi
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ANI
एकता । May 17 2026 1:09PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 43 वर्षों में नॉर्वे की पहली ऐतिहासिक यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी, जहाँ द्विपक्षीय वार्ता के साथ व्यापार और अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह दौरा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों के लिए रणनीतिक सहयोग की समीक्षा करने और विकास के नए अवसरों को तलाशने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18-19 मई 2026 को नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। खास बात यह है कि पिछले 43 वर्षों में भारत की तरफ से किसी प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है। इस दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड V और रानी सोन्या से मुलाकात करेंगे। साथ ही, वे वहां के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

शिखर सम्मेलन को करेंगे संबोधित

अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर 'भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन' को भी संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है।

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भारतीय राजदूत का बयान और वैश्विक स्थिति

नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गांगटे ने इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "यह यात्रा भारत से किसी प्रधानमंत्री की यात्रा के 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली नॉर्वे यात्रा है और यह ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया में काफी उथल-पुथल मची हुई है। साथ ही, पिछले कुछ समय में भारत और नॉर्वे के संबंधों में भी काफी प्रगति हुई है। इसलिए, यह यात्रा दोनों देशों के पुराने रिश्तों की समीक्षा करने और विकास के नए मौकों को तलाशने का एक बेहतरीन अवसर है।"

100 अरब डॉलर के निवेश और रोजगार के नए अवसर

राजदूत ग्लोरिया गांगटे ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार के ये नए अवसर 'भारत-EFTA-TEPA समझौते' के लागू होने से मिले हैं। यह समझौता EFTA के चार देशों के साथ किया गया है। इस समझौते की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें निवेश से जुड़ा एक बड़ा हिस्सा शामिल है। इसके तहत आने वाले 15 वर्षों में इन देशों की तरफ से भारत में 100 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा, जिससे भारत में 1 मिलियन नए रोजगार पैदा होंगे।

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नॉर्वेजियन कंपनियों की भारत में दिलचस्पी

उन्होंने आगे बताया कि दोनों देशों के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनका पूरा लाभ उठाना अभी बाकी है। वर्तमान में कई नॉर्वेजियन कंपनियां भारत के बाजारों में पहले से ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये सभी कंपनियां 'भारत-EFTA-TEPA समझौते' से मिलने वाले नए और बड़े अवसरों का पूरा फायदा उठाने के लिए बेहद उत्सुक हैं।

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