जब US दूतावास को चीरकर घुसा शाहेद, सऊदी का वो डरावना मंजर

अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने खुलासा किया कि रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी ड्रोन हमले में भारी तबाही हुई थी, जिसे पहले छुपाया गया था। उन्होंने कहा कि इस हमले में बड़ा नरसंहार हो सकता था। वहीं, बढ़ते हमलों के मद्देनजर पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब की मदद के लिए सैन्य टुकड़ियां भेजने पर सहमति जताई है।
जिसे दुनिया से अब तक सऊदी अरब और अमेरिका छुपा कर रखने की पूरी कोशिश कर रहे थे। आखिर वो कड़वा सच किसी एयर डिफेंस सिस्टम से रोका नहीं जा सका। खुद एक शीर्ष अमेरिकी सीनेटर ने रियाद की धरती पर खड़े होकर उस सच का ऐसा पर्दाफाश किया जिसने वाशिंगटन से लेकर रियाद तक हड़कंप मचा दिया है। रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी ड्रोन हमले का वो भयानक सच जिसे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रंप के डर का नकाब पहनाकर दबाने की कोशिश की गई। आज पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने शुरुआत में पूरी दुनिया से यह झूठ बोला कि हमले से महज मामूली आग लगी और बहुत थोड़ा नुकसान हुआ। लेकिन सऊदी अरब पहुंचे अमेरिकी सेनेटर क्रिस मर्फी ने जब खुद रियाद में अमेरिकी एंबेसी परिसर के अंदर जाकर उस तबाही का मुआयना किया तो उनके होश उड़ गए। दूतावास के मलबे और खौफनाक मंजर को देखने के बाद सेनेटर मर्फी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि ईरान के दो खतरनाक ड्रोंस ने रियाद में अमेरिकी दूतावास की धज्जियां उड़ा दी हैं।
इसे भी पढ़ें: ECI विरोध पर CM Devendra Fadnavis का हमला, कहा- लोकतंत्र को बदलने की हो रही कोशिश
इस तबाही को भले ही मीडिया से छुपाया गया लेकिन नुकसान बहुत हद तक ज्यादा था। उन्होंने कहा कि यह हमला आधी रात को हुआ, लेकिन अगर यही ड्रोंस दिन के वक्त काम के घंटों में टकराते, तो वहां दर्जनों अमेरिकी राजनयिक और अधिकारी ढेर हो जाते। यानी उन्हें मौत मिलती। यह सीधे-सीधे एक भयानक नरसंहार में बदल जाता। दरअसल, इस हमले और इसमें हुई तबाही को छुपाने की कोशिश, ट्रंप की साख और एमबीएस का डर काम कर रहा था। ट्रंप प्रशासन कभी नहीं चाहता था कि अमेरिकी जनता को यह पता चले कि ईरान के ड्रोंस सऊदी अरब में उनके सबसे सुरक्षित दूतावास की दीवारें तोड़कर अंदर तबाही मचा चुके हैं। सीनेटर मर्फी ने सीधा आरोप लगाया कि वाशिंगटन जानबूझकर हमलों में घायल हुए अमेरिकी कर्मियों की सही संख्या और नुकसान का आंकड़ा दबा रहा है। सेनेटर बर्फी ने रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ करीब 2 घंटे तक मैराथन बैठक की और एमबीएस के सामने ट्रंप प्रशासन की नाकामियों का पूरा चिट्ठारा खोल कर रख दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका के राजनयिक और हजारों सैनिक आज बिना किसी तैयारी के इस जंग में झोंक दिए गए हैं और हर पल मौत के साए में जी रहे हैं जो सच में फाइलों में बंद था। आज वह चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि ईरान के ड्रोंस अमेरिका सऊदी अरब के रक्षा तंत्र के उस झूठे अभियान को एक ही झटके में भस्म कर चुके थे।
इसे भी पढ़ें: BrahMos Launcher और फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस होंगे Indian Navy के जहाज, ₹661.50 करोड़ की डील
सऊदी में मौजूद वहां आसपास के लोग लगातार इसकी वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे और यह फुटेज देखते ही देखते सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो गया। हालांकि इसके बाद सऊदी सरकार ने सोशल मीडिया पर ऐसे किसी भी पोस्ट को पोस्ट करने के बाद या ऐसे किसी भी वीडियो को पोस्ट करने के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ कारवाही का एक सख्त प्रावधान बना दिया। सऊदी अरब पर होती विद्रोहियों के लगातार बढ़ते हमलों के बीच अब पश्चिम एशिया में एक बड़ा सैन्य समीकरण सामने आया है। पहली बार अगस्त में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को जमीन पर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब की मदद के लिए अपनी सैन्य टुकड़ियां भेजने पर सहमति जताई है। यह फैसला सोमवार को रियाद में हुई एक इमरजेंसी बैठक के बाद लिया गया है। इस बैठक में सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। पाकिस्तान की तरफ से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, विदेश मंत्री शाकडार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ मौजूद रहे। बैठक के बाद तीनों देशों ने एक साझा बयान जारी किया और होती विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही साफ कहा गया इस तरह के हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अन्य न्यूज़













