Mangal Dosh Upay: क्या Mangal Dosh से Marriage में हो रही है देरी, जानें ज्योतिष के सबसे अचूक Upay

Mangal Dosh Upay
Creative Common License

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मांगलिक दोष क्या होता है। क्या मांगलिक दोष से शादी में देरी होती है और क्या निश्चित अवधि के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मांगलिक दोष क्या है।

भारतीय समाज में जब बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी कुंडली बनवाई जाती है। बच्चे की कुंडली कई बार जन्म के समय ही बना दी जाती है। वहीं कुछ लोग 5 साल की उम्र के बाद कुंडली बनवाते हैं। कई लोगों को ऐसा कहते भी सुना होगा कि कुंडली में मंगल भारी है, जिसकी वजह से मांगलिक दोष लग गया है। वहीं शादी में भी देरी हो रही है। बच्चे की कुंडली में अगर मांगलिक दोष होता है, तो ऐसा माना जाता है कि उसके जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे।

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मांगलिक दोष क्या होता है। क्या मांगलिक दोष से शादी में देरी होती है और क्या निश्चित अवधि के बाद मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मांगलिक दोष क्या है और इससे बाहर निकलने के लिए क्या उपाय करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: Holika Dahan 2026 Date: 3 मार्च को चंद्र ग्रहण, जानें क्यों 2 मार्च को ही होलिका दहन करना रहेगा सबसे बेस्ट?

जानिए मांगलिक का अर्थ

मांगलिक शब्द सुनते ही लोग अक्सर इसको विवाह से जुड़ी किसी समस्या से जोड़ने लगते हैं। लेकिन इसका वास्तविक अर्थ इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। मंगल का मतलब ही मंगलकारी है, यानी कि हर काम में शुभ फल देने वाला है। कुंडली में मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और व्यक्ति की विल पावर का प्रतिनिधित्व करता है। जब किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों में स्थित होता है। जैसे पहला, चौथा, सांतवा, आठवां या बारहवां भाव हो तो जातक को मांगलिक कहा जाता है। माना जाता है कि जातक की कुंडली में मांगलिक दोष है।

कब लगता है मांगलिक दोष

ज्योतिष के मुताबिक मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है, जो जातक के जीवन में विशेष रूप से वैवाहिक और पेशेवर जीवन में दुर्भाग्य और चुनौतियां ला सकती हैं। इस दोष की पहचान तब होती है, जब मंगल जन्म कुंडली के विशिष्ट भावों में स्थित होता है। हिंदू धर्म में, मांगलिक दोष का सीधा संबंध विवाह से होता है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में हो, तो जातक को मांगलिक दोष से ग्रस्त माना जाता है।

मांगलिक दोष का जीवन में प्रभाव

ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति माना जाता है। मंगल ग्रह को ऊर्जा, बल और आत्मविश्वास का स्वामी माना जाता है। कई बार मंगल के कुछ अशुभ फल दिखाई देते हैं और नवग्रहों के चक्र में सूर्य के बाद मंगल सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। मंगल को लाल ग्रह भी कहा जाता है। ज्योतिष के मुताबिक अगर आपकी कुंडली में अशुभ या नीच है या अन्य ग्रहों के साथ अशुभ युति में है, तो जीवन में मांगलिक दोष के कुछ अशुभ फल मिल सकते हैं। कुंडली में मंगलदोष होने से जातक का क्रोध बढ़ सकता है और नौकरी व व्यापार में घाटा हो सकता है। यह दोष जीवन में छोटी-छोटी समस्याओं की वजह बन सकता है।

मांगलिक दोष के प्रभाव से जातक की परेशानियां बढ़ सकती हैं। वहीं सेहत पर निगेटिव असर हो सकता है। इससे जातक के चल-अचल संपत्ति में घाटा हो सकता है। वहीं जातक के आत्मविश्वास में कही आ रही है, तो इसका कारण भी मांगलिक दोष हो सकता है।

उपाय

अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है, तो एक व्रत मंगल दोष से होने वाले दुर्भाग्य को दूर कर सकता है। ऐसे में आपको मंगलवार का व्रत करें, तो आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

मांगलिक दोष को दूर करने के लिए रोजाना सुबह और शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगलवार के दिन लाल कपड़े धारण करना चाहिए।

किस उम्र में समाप्त होता है मांगलिक दोष

माना जाता है कि 28 साल की उम्र के बाद मांगलिक दोष खत्म हो जाता है। ज्योतिषियों के हिसाब से 28 साल बाद मंगल का प्रभाव कम माना जाता है। क्योंकि यह उम्र का वह समय है, जब मंगल की ऊर्जा स्थिर हो जाती है। वहीं जातक मानसिक रूप से परिपक्व होता है। अगर किसी जातक की कुंडली में मांगलिक दोष है और उसकी शादी 28 की उम्र के बाद हो रही है, तो मांगलिक दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। वहीं अगर कुंडली में मंगल की महादशा या अंतरदशा चल रही है, तो उस अवधि में भी इसका प्रभाव अधिक हो सकता है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़