टुकड़ों में बंटी विरासत, शानदार रहा है इतिहास, PM पद ठुकराने वाले ताऊ देवीलाल के परिवार की राजनीतिक स्थिति क्या है?

Tau Devi Lal
Prabhasakshi
अभिनय आकाश । Sep 26, 2022 4:39PM
चौटाला परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं, हालांकि सभी सदस्य इनेलो और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच विभाजित हैं। ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय, भिवानी के पूर्व सांसद और तीन बार के विधायक (दो बार राजस्थान और एक बार हरियाणा) को जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में भ्रष्टाचार के आरोप में उनके पिता के साथ दोषी ठहराया गया था।

हरियाणा के तीन लाल, बंसी, देवी, भजन लाल, यही वे तीन नाम हैं, जिन्होंने आज के हरियाणा की रूपरेखा रखीं थी। चाहे वह आज के मॉडर्न गुरुग्राम की बात हो या फिर नहरों और सड़कों की जाल की। राज्य के गठन के बाद तीन दशक तक इन्ही तीनों परिवार का दबदबा प्रदेश की राजनीति पर रहा। इन्हीं तीन किरदारों में एक  'तख्त बदल दो, ताज बदल दो, बेईमानों का राज बदल दो'...का दिया नारा एक दौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की आवाज बन बैठा था। 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी तो बनी लेकिन बहुमत से बहुत दूर थी। राजवी गांधी की कांग्रेस को 198 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में बोफोर्स के मुद्दे पर बने स्ट्रैजिकल अलायंस को प्राप्त हुआ। जनता दल को मिली 142 सीटें, बीजेपी को 86 सीटें, वाम मोर्चे को मिली 52 सीटें, बाकी की सीटों का जुगाड़ द्रमुक, तेलगू देशम, असम गण परिषद आदि। सभी को जोड़ने पर ये आंकड़ा बहुमत के जादुई अंक को पार करता हुए 289 पर चला जाता है। राष्ट्रीय मोर्चा का नेता चुनने की बारी आई। पहले दावेदार थे कांग्रेस के नेता रहे, राजीव की सरकार में अलग-अलग मंत्रालय संभालने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह, दूसरे दावेदार थे जनता पार्टी के दिनों से अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर, तीसरे दावेदार ताऊ देवीलाल भी थे। 1 दिसंबर 1989 का दिन विश्वनाथ प्रताप सिंह ने देवीलाल के नाम का प्रस्ताव सभी के सामने रखा। मैं ताऊ ही बना रहना चाहता हूं। इसलिए चाहता हूं कि प्रधानमंत्री का पद वीपी सिंह संभाले।   अक्खड़ मिजाज और दबंग माने जाने वाले देवीलाल की गिनती देश के उन चुनिंदा नेताओं में होती है, जो देश को आजादी मिलने से पहले और बाद में राजनीति में सक्रिय तौर से शामिल रहे। 

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पूर्व उपप्रधान मंत्री और देश के सबसे बड़े किसान नेताओं में से एक चौधरी देवी लाल की 109 वीं जयंती के अवसर पर  25 सितंबर को हरियाणा के फतेहाबाद में विपक्षी नेताओं का जुटान हुआ। देवी लाल उस पार्टी के संस्थापक भी थे जिसे आज इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के नाम से जाना जाता है। नीतीश कुमार, शरद पवार, और लालू प्रसाद सहित कई दिग्गजों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को एकजुट लड़ाई देने की कसम खाई और देवीलाल के साथ अपने जुड़ाव को याद किया। जबकि जयंती समारोह को विपक्षी ताकत दिखाने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया गया। लेकिन वर्तमान समय में देवी लाल की पार्टी का प्रदर्शन कैसा है और यह चुनाव में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है, इसके बारे में आपको बताते हैं।  

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देवी लाल ने बनाया आईएनएलडी

1971 तक कांग्रेस में रहने वाले देवी लाल ने 1977 में जनता पार्टी और फिर 1987 लोक दल) की शुरुआत कर दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वो 1989 में उपप्रधान मंत्री बने। देवी लाल के पास एक बड़ा ग्रामीण वोट बैंक था, विरासत में उनके सबसे बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला हरियाणा के पांच बार सीएम रहे। ओपी चौटाला ने  विरासत में मिली राजनीति और सत्ता को  बरकरार रखने की कोशिश की। देवीलाल ने 1974 में रोरी से हरियाणा विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद भारतीय लोक दल की स्थापना की। इनेलो की स्थापना 1987 में हुई थी, 1982 और 1987 के चुनाव लोक दल (एलकेडी) के नाम से लड़े गए थे। पार्टी को अपना वर्तमान नाम 1998 में मिला। आईएनएलडी 1998 से 2004 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल रही। देवी लाल का 2001 में निधन हो गया।

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आज देवीलाल के परिवार की राजनीतिक स्थिति क्या है?

चौटाला परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं, हालांकि सभी सदस्य इनेलो और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच विभाजित हैं। ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय, भिवानी के पूर्व सांसद और तीन बार के विधायक (दो बार राजस्थान और एक बार हरियाणा) को जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में भ्रष्टाचार के आरोप में उनके पिता के साथ दोषी ठहराया गया था। दोनों अब जेल की सजा काट चुके हैं। अजय की पत्नी नैना बधरा से विधायक हैं। उनके बड़े बेटे दुष्यंत हरियाणा के उपमुख्यमंत्री हैं, जबकि छोटे बेटे दिग्विजय जजपा की युवा शाखा का नेतृत्व कर रहे हैं। चौटाला के दूसरे बेटे अभय वर्तमान में हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में इनेलो के एकमात्र विधायक हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के दौरान उन्होंने समर्थन जताते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके कारण एलेनाबाद में उपचुनाव हुआ, जिसमें उन्हें फिर से निर्वाचित किया गया। अभय की पत्नी कांता ने 2016 में जिला परिषद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अभय के बेटे करण और अर्जुन ने पार्टी के मामलों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है और आगामी 2024 के चुनाव में लड़ने की संभावना है। जगदीश सिंह देवीलाल के इकलौते पुत्र थे जिन्होंने सक्रिय राजनीति में कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालाँकि, उनके बेटों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ हैं। अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले, जगदीश के बेटे आदित्य और अनिरुद्ध विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि उन्हें टिकट नहीं दिया गया। आदित्य ने जनवरी 2016 में सिरसा के जोन 4 में पंचायत चुनाव में अभय की पत्नी कांता को भी हराया था।

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2005 के बाद से इनेलो का प्रदर्शन 

इनेलो ने पिछली बार 2005 में हरियाणा पर शासन किया था, लेकिन इस बरस कांग्रेस ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया। जिसके बाद भूपिंदर सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा के मनोहर लाल खट्टर 2014 के चुनावों में नए सीएम के रूप में हरियाणा की कमान संभाली। आईएनएलडी ने इस चुनाव में 90 में से 19 सीटें जीतकर कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। उस समय ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला जेल में थे। अभय चौटाला पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि अजय के बेटे दुष्यंत युवाओं में काफी लोकप्रियता हासिल कर रहे थे। लेकिन इससे पहले कि पार्टी 2019 का चुनाव लड़ पाती, चौटाला परिवार में विभाजन का दौर देखने को मिला। लोकसभा चुनावों में इनेलो का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में था, जब वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा था। इनेलो और बीजेपी ने गठबंधन में पांच-पांच सीटों पर चुनाव लड़ा था और सभी 10 पर जीत हासिल की थी। 

इनेलो में विभाजन के कारण क्या हुआ

2019 के चुनावों में दुष्यंत चौटाला सीएम चेहरे के लिए एक लोकप्रिय दावेदार के रूप में उभरे थे। हालांकि, ओम प्रकाश चौटाला इस पद के लिए अभय चौटाला को चाहते थे। अक्टूबर 2018 में गोहाना में इनेलो की रैली के दौरान पार्टी समर्थकों ने दुष्यंत के पक्ष में नारे लगाए और अभय चौटाला को सभा को संबोधित नहीं करने दिया। कुछ दिनों बाद ओम प्रकाश चौटाला ने दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से निकाल दिया। उनके पिता अजय और मां नैना ने कुछ अन्य प्रमुख नेताओं के साथ पार्टी छोड़ दी और दिसंबर 2018 में जजपा का जन्म हुआ।  

क्या जेजेपी बनेगी गठबंधन का हिस्सा?

वर्तमान में जेजेपी के पास 10 विधायक हैं और वह भाजपा के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा है। 25 सितंबर की रैली में ओम प्रकाश चौटाला ने दावा किया कि “कुछ जो गुमराह किए गए और पार्टी छोड़ दी गई, वे वापस आना चाहते हैं। हमें उनके प्रति कोई दुर्भावना नहीं है।" इसे एक संकेत के रूप में पढ़ा जा रहा है कि वह बेटे अजय, बहू नैना, पोते दुष्यंत और दिग्विजय और अन्य को इनेलो में वापस लेने के लिए तैयार हैं। हालांकि, अगला कदम जजपा का क्या होगा, ये अभी तक साफ नहीं है। - अभिनय आकाश

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