अनुच्छेद 370 और 35A का निरस्त होना महिला सशक्तिकरण की ओर एक बेहतर कदम

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 27, 2019   18:27
अनुच्छेद 370 और 35A का निरस्त होना महिला सशक्तिकरण की ओर एक बेहतर कदम

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जम्मू−कश्मीर हमारे देश का ही हिस्सा है लेकिन अनुच्छेद 370 एवं 35A के कारण अपने ही देश के कुछ कानून वहाँ लागू नहीं होते थे, एक देश में दो नागरिकता का प्रावधान था।

पी.जी.डी.ए.वी कॉलेज (सांध्य) एवं मेधाविनी सिन्धु सृजन के सहयोग से कॉलेज के महिला विकास प्रकोष्ठ ने बुधवार को 'अनुच्छेद 370 एवं 35A के निरस्त किए जाने के विषय में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान किए जाने के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में महिला विकास प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. रूक्मिनी ने विषय की प्रस्तावना देते हुए कहा अनुच्छेद 370 एवं 35। लिड्. भेद पर आधारित थी, इसमें महिलाओं का अत्याधिक शोषण हुआ है।

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कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जम्मू−कश्मीर हमारे देश का ही हिस्सा है लेकिन अनुच्छेद 370 एवं 35A के कारण अपने ही देश के कुछ कानून वहाँ लागू नहीं होते थे, एक देश में दो नागरिकता का प्रावधान था। पुरूषों और महिलाओं के अधिकार समान नहीं थे, अगर महिला जम्मू−कश्मीर राज्य के बाहर अपने ही देश के दूसरे राज्य के व्यक्ति से शादी कर लेती तो उसके अधिकार सीमित हो जाते थे। 

पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य) की अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. रेणुका धर बजाज ने कहा कि एक कश्मीरी होने के नाते अनुच्छेद 370 एवं 35A की पीड़ा की वह स्वयं भुक्तभोगी हैं। उन्होंने कहा कि एक ही देश में कश्मीर का झ.डा अलग था। अनुच्छेद 370 एवं 35A के निरस्त होने से पहले कश्मीर में इस्लामिक झ.डे को महत्व दिया जाता था।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुशील कुमार जी ने कहा कि 5 अगस्त का दिन स्वर्णिम है। इस दिन अनुच्छेद 370 एवं 35। की समाप्ति के बाद कश्मीर की महिलाएँ, लड़कियाँ भारत में किसी भी स्थान पर रह सकती है, पढ़ाई कर सकती हैं, विवाह कर सकती हैं। अब उन्हें अपनी इच्छा से जीने की स्वतन्त्रता है।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री यशराज बुन्देला, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 370 एवं 35।ष्के कारण जम्मू−कश्मीर के नागरिकों की नागरिकता का निर्धारण जम्मू−कश्मीर विधानसभा के द्वारा किया जाता था। पूरे भारत में समान रूप से लागू होने वाले कानून भी कश्मीर में पूर्ण रूप से लागू नहीं होते थे। उस राज्य में रहने वाले सफाई कर्मचारी, महिलाएँ, गोरखाओं और अल्पसंख्यकों के लम्बे समय तक वहाँ रहने के बाद भी वह कश्मीर के नागरिक नहीं हो सकते थे। 

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संगोष्ठी में मेधाविनी सिन्धु सृजन की कोर कमेटी मेम्बर डॉ. रूबी मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, देशबन्धु कॉलेज जी ने मेधाविनी सिन्धु सृजन का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि यह प्रबुद्ध महिलाओं का संगठन है जो महिलाओं और देश के विकास में सतत् अग्रसर है। संगोष्ठी के अंत में महिला विकास प्रकोष्ठ की सदस्या डॉ. प्रिंयका चटर्जी ने आए हुए सभी प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।





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