Congress में लौटें Mamata Banerjee, बंगाल में नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार: Adhir Ranjan Chowdhury

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से अपने बाकी विधायकों और सांसदों के साथ पार्टी में लौटने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ममता के नेतृत्व में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि इस पर विचार केवल तभी होगा जब कांग्रेस आलाकमान से कोई औपचारिक प्रस्ताव आए।

कोलकाता, एक अक्टूबर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी से बृहस्पतिवार को अपील की कि वह अपनी पार्टी के बचे हुए विधायकों एवं सांसदों के साथ कांग्रेस में वापस आ जाएं। चौधरी ने साथ ही कहा कि कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में उनका नेतृत्व स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की और कहा कि बनर्जी को, 6 अक्टूबर के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव की तरह ही सहयोग की भावना दिखाते हुए, रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन देना चाहिए।

चौधरी ने यह अपील ऐसे समय में की है जब तृणमूल कांग्रेस अपने गठन के बाद से सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से जूझ रही है और 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद उसके कई विधायकों तथा सांसदों ने बगावत कर दी है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी ने तृणमूल में बगावत का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘इस समय किसी अलग इकाई की कोई जरूरत नहीं है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के पास ज़्यादा कुछ नहीं बचा है।’’ बनर्जी ने लगभग तीन दशक पहले कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी।

चौधरी ने कहा, ‘‘हम ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि वह बाकी बचे विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाएं। हम बंगाल में उनका नेतृत्व स्वीकार करेंगे और उनके साथ मिलकर काम करेंगे। मैं कांग्रेस आलाकमान से भी यह अपील करूंगा कि उन्हें पार्टी में वापस शामिल होने दिया जाए।’’ उन्होंने कहा कि टीएमसी ने जिस तरह नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन किया है, उसी तरह बनर्जी को रेजीनगर में भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मित्रवत रवैये के तौर पर, जैसे उन्होंने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया है, वैसे ही उन्हें रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए।’’ नंदीग्राम में, ममता गुट के उम्मीदवार ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाक़ात के बाद चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। गुट के पास कोई उम्मीदवार न रहने पर, बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। चौधरी ने कहा, ‘‘चूंकि उन्होंने (बनर्जी ने) कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन का सहारा लिया है, इसलिए उन्हें पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।

बंगाल में हम कांग्रेस में आपके नेतृत्व में काम करेंगे।’’ लोकसभा में कांग्रेस के पूर्व नेता ने बनर्जी से कहा कि उन्हें ‘‘अपना सब कुछ भुलाकर’’ कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। चौधरी की यह बात बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के स्पष्ट संदर्भ में थी। हालांकि, तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी ऐसे प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब वह कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक रूप से आएगा।

रॉय ने कहा, ‘‘उन्होंने (चौधरी) वही कहा जो उन्हें लगा। हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। तृणमूल अब एक अलग पार्टी है।

अगर कांग्रेस कोई आधिकारिक प्रस्ताव लाना चाहती है, तो हम पार्टी में इस मामले पर चर्चा करेंगे। तृणमूल ‘इंडिया’ गठबंधन का अहम हिस्सा है।’’ चौधरी की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी के बारे में कोई फ़ैसला नहीं लिया जा सकता। रॉय ने कहा, ‘‘वह (अभिषेक बनर्जी) हमारे नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं।’’ चौधरी की बातों को खारिज करते हुए भी, उन्होंने बातचीत की संभावना के दरवाजों को पूरी तरह बंद नहीं किया, बशर्ते कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव आए।

तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी संकट ने विधानसभा और संसद में भी एक अलग रूप ले लिया है। बागी विधायकों ने जहां खुद को राज्य की भाजपा सरकार के सामने असली विधायी विपक्ष के तौर पर पेश करने की कोशिश की है, वहीं बागी सांसदों के गुट ने एक अलग राजनीतिक रास्ता चुना है और वे कम जानी-पहचानी पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं तथा उन्होंने केंद्र में भाजपा नीत राजग को समर्थन दिया है। इस बीच, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि तृणमूल के पास अब ‘‘कोई और मकसद नहीं बचा है’’ क्योंकि उसका राजनीतिक सफर खत्म हो चुका है।

सरकार ने कहा, ‘‘तृणमूल का जन्म माकपा (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) से लड़ने के लिए कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। तृणमूल इसी मुद्दे पर सत्ता में आई थी। अब जब तृणमूल खुद सत्ता से बाहर है, तो उसके पास कोई और मकसद नहीं बचा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं, यह उन (तृणमूल) पर निर्भर है।

हम कांग्रेस, तृणमूल और माकपा से लड़ने के लिए तैयार हैं।

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