CEC ज्ञानेश कुमार के Agra आवास पर प्रदर्शन मामले में छह Congress कार्यकर्ताओं को मिली जमानत

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के घर की दीवार पर नारे लिखने के आरोपी छह कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को राहत दी है। पुलिस द्वारा लगाई गई हत्या के प्रयास की धारा के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। सभी आरोपियों को बीस-बीस हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।
आगरा/लखनऊ (उप्र), तीन अक्टूबर आगरा की एक अदालत ने शनिवार को उन छह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी, जिन्हें पिछले सप्ताह एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के आवास के बाहरी गेट और दीवार पर कथित तौर पर नारे लिखने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के एक अधिवक्ता ने यह जानकारी दी। इस बीच कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमानत मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए इसे ‘‘न्याय की जीत’’ बताया।
अधिवक्ता संतोष दीक्षित ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) शारिब अली की अदालत ने आगरा जिला जेल में बंद सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में अन्य धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) भी लगाई थी, लेकिन अदालत के समक्ष पुलिस इस धारा को लगाए जाने के समर्थन में पर्याप्त आधार पेश नहीं कर सकी। दीक्षित के अनुसार, पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस को धारा 109 के संबंध में आवश्यक जांच करने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि यह धारा किन तथ्यों, चोटों, चिकित्सकीय साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान या अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर लगाई गई है।
अदालत ने जांच अधिकारी को तीन अक्टूबर तक जांच पूरी करने और हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनने की स्थिति में संबंधित धारा हटाकर इसका उल्लेख केस डायरी में करने का भी निर्देश दिया था। दीक्षित ने बताया कि पुलिस हत्या के प्रयास का मामला साबित करने के लिए पर्याप्त आधार पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले से निपटने के पुलिस के तरीके पर भी नाराजगी जताई।
दीक्षित ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद छह आरोपियों-कांग्रेस नेता मुकेश धनगर, अनिल यादव, राजेश कुमार, मनोज गौर, राजेश गौतम और पंकज चौधरी- ने 20-20 हजार रुपये के जमानती मुचलके भरे। कांग्रेस के आगरा शहर अध्यक्ष अमित सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी की लड़ाई ‘‘लोकतंत्र और संविधान को बचाने’’ की है। सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस द्वारा लगाई गई गंभीर धारा को अदालत ने हटा दिया है।
यह लोकतंत्र की जीत है।’’ उन्होंने कहा कि कुमार के मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद से इस्तीफा देने तक कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी। यह मामला 28 सितंबर की एक घटना से जुड़ा है, जब कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान विजय नगर इलाके में कुमार के आवास के बाहरी गेट और दीवार पर काले रंग से कथित तौर पर नारे लिखे थे। पुलिस ने एक उप निरीक्षक की शिकायत पर आठ नामजद और 15-20 अज्ञात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ हरीपर्वत थाने में मामला दर्ज किया था।
आरोपियों के खिलाफ शुरुआत में बीएनएस की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), धारा 126 (गलत तरीके से रोकना), धारा 132 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) तथा दंगा, घर में अनधिकृत प्रवेश, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करने से संबंधित धाराएं शामिल थीं। छह आरोपियों को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जेल भेज दिया गया।
यह घटना कुमार के खिलाफ ‘‘वोट चोरी’’ के आरोप को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन के बीच हुई। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जमानत को ‘‘न्याय की जीत’’ बताया और जमानत दिलाने के प्रयासों के लिए पार्टी के विधि विभाग, स्थानीय संगठन तथा पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का आभार जताया। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी के अनुसार, मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा ‘‘वोट चोरी’’ किए जाने की बात उजागर हो चुकी है और राहुल गांधी पहले ही इस मुद्दे को उठा चुके हैं।
उन्होंने भाजपा पर लोगों के वोट ‘‘चोरी’’ कर चुनाव जीतने का आरोप लगाया और दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संवैधानिक पद पर रहते हुए लोगों के साथ धोखा किया है। मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी।
अन्य न्यूज़













