Allahabad High Court ने शुरू किया Mediation अभियान, 31 दिसंबर तक सुलझेंगे लंबित केस

Allahabad High Court
ANI
अभिनय आकाश । Oct 8 2026 6:33PM

इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ बेंच और निचली अदालतों में लंबित मामलों को सुलझाने के लिए मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0 अभियान 31 दिसंबर तक जारी रहेगा। इसके तहत पक्षकार विधिक सेवा समितियों से संपर्क कर 15 श्रेणियों के विवाद आपसी सहमति से निपटा सकते हैं। प्रशिक्षित मध्यस्थों के जरिए होने वाले इस समझौते से समय, धन और तनाव की बचत होगी।

रजिस्ट्रार (मध्यस्थता) भागीरथ वर्मा ने गुरुवार को कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट, उसकी लखनऊ बेंच और निचली अदालतों में लंबित मामलों वाले पक्षकार, चल रहे मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0 अभियान के तहत मध्यस्थता के ज़रिए अपने विवाद सुलझा सकते हैं। यह अभियान 1 अक्टूबर को शुरू हुआ और 31 दिसंबर तक चलेगा। इससे पक्षकारों को लंबी कानूनी लड़ाई में पड़े बिना आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का मौका मिलेगा। वर्मा ने कहा कि पक्षकार मध्यस्थता के लिए आगे आ सकते हैं और समझौते की संभावना तलाश सकते हैं। निचली अदालतों में चल रहे मामलों से जुड़े लोग संबंधित जिले के सिविल कोर्ट परिसर में काम करने वाली 'डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी' से संपर्क कर सकते हैं। वर्मा ने बताया कि जिन लोगों के मामले प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट या उसकी लखनऊ बेंच में चल रहे हैं, वे प्रयागराज में 'हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमिटी' या लखनऊ में उसकी सब-कमिटी से संपर्क कर सकते हैं।

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मुकदमे से जुड़े लोग अपने वकीलों से यह भी पता करने के लिए कह सकते हैं कि क्या उनके मामलों को मध्यस्थता (mediation) के लिए भेजा जा सकता है। उपयुक्त मामलों में अदालत विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज सकती है। एक बार मामला भेजे जाने के बाद, एक निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों को बातचीत करने और आपसी सहमति से समाधान तक पहुँचने में मदद करता है। वर्मा ने बताया, मध्यस्थ विवाद का फैसला नहीं करता है और न ही पक्षों पर कोई समाधान थोपता है। वर्मा ने बताया कि मध्यस्थता का काम ट्रेंड और पैनल में शामिल मध्यस्थ करते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मध्यस्थता और सुलह केंद्र में ऐसे अनुभवी वकील मध्यस्थ के तौर पर शामिल हैं, जिन्होंने मध्यस्थता में खास ट्रेनिंग ली है। मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत, संबंधित मध्यस्थता केंद्र तय प्रक्रिया के ज़रिए अपने पैनल से किसी मध्यस्थ को नियुक्त करता है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में 255 और इसकी लखनऊ बेंच में 68 ट्रेंड मध्यस्थ हैं। उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग ज़िलों में लगभग 1,700 ट्रेंड मध्यस्थ काम कर रहे हैं।

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इस कैंपेन में मध्यस्थता (mediation) के लिए उपयुक्त माने जाने वाले विवादों की 15 कैटेगरी शामिल हैं। इनमें शादी और परिवार से जुड़े विवाद, मोटर दुर्घटना के क्लेम केस, चेक-बाउंस के मामले, समझौता-योग्य आपराधिक मामले, कंज्यूमर विवाद, कर्ज वसूली और SARFAESI मामले, फैसले को लागू करने की कार्यवाही, आर्बिट्रेशन विवाद, कमर्शियल विवाद, सर्विस से जुड़े मामले, बंटवारे के केस, बेदखली के मामले, जमीन अधिग्रहण के केस और लेबर विवाद शामिल हैं। साथ ही, इसमें ऐसे अन्य सिविल मामले भी शामिल हैं जिनमें कानूनी तौर पर समझौता किया जा सकता है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में मध्यस्थता समिति के चेयरमैन जस्टिस राजन रॉय ने बताया कि मध्यस्थता से विवादों के नतीजे पर पक्षकारों का ज्यादा कंट्रोल रहता है। पारंपरिक अदालती कार्यवाही के उलट, जिसमें कोर्ट दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद उनके अधिकारों पर फैसला करता है, मध्यस्थता में पक्षकारों को एक निष्पक्ष मध्यस्थ की मदद से समझौते की शर्तों पर बातचीत करने का मौका मिलता है। जस्टिस रॉय ने कहा कि इससे काफी समय, पैसा और तनाव बच सकता है, साथ ही अदालतों पर बोझ भी कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से हुआ समझौता रिश्तों को बनाए रखने और उससे जुड़े अन्य विवादों को सुलझाने में भी मदद कर सकता है।

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