CM Yogi का Akhilesh Yadav पर तंज, 12 बजे सोकर उठने वाले नेता नहीं समझ सकते जनता की समस्याएं

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ANI
अंकित सिंह । Oct 15 2026 2:28PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि दोपहर में सोकर उठने और परिवार में उलझे रहने वाले नेता जनता का दर्द नहीं समझ सकते। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लखनऊ तक सीमित न रहकर जनता से सीधे जुड़ने और आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि जो जन-प्रतिनिधि अपने परिवारों में ही उलझे रहते हैं और दोपहर में सोकर उठते हैं, वे आम लोगों की समस्याओं को नहीं समझ सकते। यह बयान समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर एक तरह का निशाना था। वाराणसी में सफाई कर्मचारियों को सम्मानित करने के एक कार्यक्रम में बोलते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि जो नेता अपने परिवार को ही अपनी पूरी दुनिया मानते हैं, वे कोई बदलाव नहीं ला सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को लोगों से जुड़े रहना चाहिए और उनके सुख-दुख में शामिल होना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक तब बनता है जब उसके द्वारा चुने गए जन-प्रतिनिधि खुद जागरूक हों। अगर वह नेता, जिसे नेतृत्व प्रदान करना है, दोपहर 12 बजे सोकर उठता है और अपने परिवार को ही समाज और राज्य मानकर उसी में उलझा रहता है, तो इसके नतीजे भुगतने ही पड़ेंगे। आदित्यनाथ ने अक्सर यादव की कथित दिनचर्या को लेकर उन पर तंज कसे हैं। उनका दावा है कि यादव देर से सोकर उठते हैं, दोपहर में काम शुरू करते हैं और शाम को दोस्तों के साथ मुलाकात करके दिन खत्म कर देते हैं, जबकि इस दौरान वे जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज कर देते हैं।

बिना किसी का नाम लिए, मुख्यमंत्री ने उन चुने हुए प्रतिनिधियों की भी आलोचना की, जो चुनाव जीतने के बाद शायद ही कभी अपने निर्वाचन क्षेत्र में वापस लौटते हैं। उन्होंने कहा कि मैं लखनऊ में जमे रहने वालों से बार-बार कहता हूँ कि एक बार चुने जाने के बाद, वे कभी-कभी अपने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा जाना भी जरूरी नहीं समझते। आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि जन-प्रतिनिधियों को केवल प्रशासन की शिकायतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें लोगों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी कल्याणकारी योजनाएं पात्र लाभार्थियों तक पहुंचें।

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उन्होंने वाराणसी में चलाए जा रहे 76-दिवसीय स्वच्छता अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों को साथ जोड़ना, नागरिक समस्याओं का समाधान करना और कल्याणकारी योजनाओं के लिए शिविर आयोजित करने का यह तरीका अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक मॉडल बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को ऐसे शिविर आयोजित करने चाहिए, जिनसे लोगों को आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड, आवास सहायता, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पेंशन, राशन कार्ड और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के भेदभाव के लाभार्थियों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जन-प्रतिनिधियों को नागरिकों और प्रशासन के बीच एक सेतु (पुल) के रूप में काम करना चाहिए।

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