Supreme Court जज की टिप्पणी के बाद CEC ज्ञानेश कुमार पद पर रहने का नैतिक हक खो चुके: Congress

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां के बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मतदान के अधिकार को लेकर आई यह टिप्पणी सीईसी को पूरी तरह बेनकाब करती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे में ज्ञानेश कुमार के पास संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है।

नयी दिल्ली, चार अक्टूबर कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश उज्ज्वल भुइयां द्वारा मतदान के अधिकार को लेकर दिये गये बयान का हवाला देते हुए रविवार को दावा किया कि उनकी टिप्पणियों से यह साबित होता है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन किया है। विपक्षी दल ने कहा कि न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को “पूरी तरह बेनकाब कर दिया है” और अब उनके पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक खबर साझा की, जिसमें न्यायमूर्ति भुइयां के हवाले से कहा गया है कि यदि किसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिक अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक बन जाएं और उनके पास मतदान का अधिकार न रहे, तो ऐसी प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी है।

रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश उज्ज्वल भुइयां पर्यावरण संरक्षण के मुखर समर्थक रहे हैं।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अब इस साहसी न्यायविद् ने जोरदार ढंग से यह मत व्यक्त किया है कि मतदान का अधिकार संविधान की मूल संरचना का अभिन्न हिस्सा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णायक रूप से साबित करता है कि संवैधानिक पद पर बैठे होने के बावजूद सीईसी ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन किया है।’’ रमेश ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति भुइयां ने इससे कहीं अधिक कहा है और उन्होंने सीईसी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। ज्ञानेश कुमार के पास अब पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।’’ कांग्रेस नेता का यह बयान समाचारपत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद आया जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।

All the updates here:

अन्य न्यूज़