प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग, बहुसंख्यक आबादी का भरोसा फिर से जीतने पर बात, कांग्रेस के चिंतन शिविर में आज इन मुद्दों पर हुई चर्चा

प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग, बहुसंख्यक आबादी का भरोसा फिर से जीतने पर बात, कांग्रेस के चिंतन शिविर में आज इन मुद्दों पर हुई चर्चा
ANI

संगठनात्मक फेरबदल और सुधारों पर चर्चा के बीच चिंतन शिविर में प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई गई। उत्तर प्रदेश के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन की तरफ से सबसे पहले कहा गया कि प्रियंका गांधी पार्टी की सबसे लोकप्रिय फेस हैं।

कांग्रेस की तरफ से 13-15 मई तक तीन दिवसीय चिंतन शिविर उदयपुर में आयोजित किया गया है। ये शिविर पार्टी के लिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2014 से चुनाव हार चुकी है और उसके बाद से कुछ राज्यों को छोड़कर लगातार हार का ही सामना करना पड़ा है। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी उन सभी पांच राज्यों में हार गई, जहां चुनाव हुए थे और पंजाब में अपनी सत्ता आम आदमी पार्टी के हाथों गंवा दी। कांग्रेस में लंबे समय से अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खोज समाप्त होती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी की करारी हार के बाद  राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कुर्सी तो संभाल ली। लेकिन लंबे समय से कांग्रेस के पूर्णाकालिक अध्यक्ष की मांग उठती रही है। इसी क्रम में आज राजस्थान के उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के नव संकल्प चिंतन शिविर में प्रियंका गांधी को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाने की मांग उठी है। 

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संगठनात्मक फेरबदल और सुधारों पर चर्चा के बीच चिंतन शिविर में प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई गई। उत्तर प्रदेश के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन की तरफ से सबसे पहले कहा गया कि प्रियंका गांधी पार्टी की सबसे लोकप्रिय फेस हैं। अगर राहुल गांधी पार्टी की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करना चाहते तो प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनना चाहिए। यूपी के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन ने हिंदुत्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लीडरशिप को इस मोर्चे पर पार्टी की विरासत को कायम रखना चाहिए। कांग्रेस सभी धर्मों का सम्मान करती है और असली हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व करती है। 

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बता दें कि कांग्रेस में खींचतान और गुटबाजी का इतिहास पुराना रहा है। लेकिन हर बार मजबूत नेतृत्व ने हर गुटबाजी और खींचतान को सख्ती के साथ काबू में किया है। लेकिन मौजूदा वक्त में नेतृत्व इसमें खुद को कहीं न कहीं नाकाम पा रहा है।  इस शिविर में पार्टी के टिकट पर वंशवाद को सीमित करने की भी बात की गई है। नेतृत्व के सभी स्तरों पर युवाओं की पदोन्नति और पदाधिकारियों के लिए कूलिंग ऑफ पीरियड्स का भी वादा पार्टी ने किया है। 5 साल के कार्यकाल पर भी जोर दिया गया है। 





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