बस पॉलिटिक्स के बीच चर्चा में आए प्रियंका के निजी सचिव, डॉ. मनमोहन सिंह को दिखा चुके हैं काला झंडा

बस पॉलिटिक्स के बीच चर्चा में आए प्रियंका के निजी सचिव, डॉ. मनमोहन सिंह को दिखा चुके हैं काला झंडा

बस चलवाने के लिए संदीप सिंह एक के एक पांच चिट्ठियां योगी सरकार को लिखीं और फिर परमीशन मिल भी गई। मगर योगी सरकार ने प्रियंका गांधी की पेशकश पर ब्रेक लगा दिया।

नयी दिल्ली। कोरोना काल के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए 1,000 बसें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। हालांकि कांग्रेस की यह कोशिश नाकामयाब रही क्योंकि योगी सरकार और कांग्रेस के बीच मुद्दा प्रवासी मजदूरों को घर भेजे जाने से पलट कर बसों पर टिक गया और बस की राजनीति जैसे शब्दों के साथ दोनों धड़ो की राजनीति शुरू हो गई। लेकिन प्रियंका गांधी को यह ख्याल कहां से आया होगा कि यूपी सरकार को प्रवासी मजदूरों के लिए बसें उपलब्ध कराई जाए ? दरअसल, प्रियंका गांधी को यह आइडिया देने वाले उनके निजी सचिव संदीप सिंह हैं।

बस चलवाने के लिए संदीप सिंह एक के एक पांच चिट्ठियां योगी सरकार को लिखीं और फिर परमीशन मिल भी गई। मगर योगी सरकार ने प्रियंका गांधी की पेशकश पर ब्रेक लगा दिया। इतना ही नहीं बसों की जानकारी देने में फर्जीवाड़े के आरोप में संदीप सिंह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई।

कौन हैं संदीप सिंह ?

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में रहने वाले संदीप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था और फिर दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय आ गए थे। यहां पर संदीप ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से जुड़े। साल 2005 के नवंबर माह में पहली बार संदीप सुर्खियों में उस वक्त छाए थे जब उन्होंने विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को काला झंडा दिखाया था। उस वक्त यूपीए सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रहे थे।

यूं तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही संदीप सिंह छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे लेकिन डॉ. सिंह को झंडा दिखाने के बाद उन्होंने काफी लोकप्रियता बटोरी और फिर जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के दौरान उनका एक भाषण भी काफी लोकप्रिय हुआ था। इतना ही साल 2007 में संदीप छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। इस दौरान वह सीपीआई-एमएल के छात्र संगठन आइसा से जुड़े रहे और फिर बाद में वह आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने थे। जेएनयू से निकलने के बाद धीरे-धीरे संदीप ने खुद को लेफ्ट की राजनीति से दूर करना शुरू कर दिया था।

टीम राहुल में मिली थी एंट्री

साल 2017 में जब राहुल गांधी कांग्रेस की कमान संभालने वाले थे उस वक्त वो अलग-अलग लोगों से मुलाकात कर रहे थे और इस दौरान राहुल की मुलाकात संदीप सिंह से हुई। करीबी सूत्र बताते हैं कि इस मुलाकात के बाद संदीप सिंह को टीम राहुल में एंट्री मिली। हिंदी बेल्ट इलाकों की अच्छी पकड़ और छात्र राजनीति से निकले संदीप ने राहुल को काफी प्रभावित किया। बताया जाता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के समय राहुल के भाषण तैयार करने में संदीप का अहम रोल था।

टीम राहुल से टीम प्रियंका में शिफ्ट हुए संदीप

जब प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने का निर्णय किया गया तो संदीप सिंह को उनके साथ जोड़ा गया। पहले ये टीम राहुल का हिस्सा हुआ करते थे लेकिन हिन्दी भाषीय इलाकों में अच्छी पकड़ और यूपी के आसपास के इलाकों की बारीक जानकारी होने की वजह से उन्हें टीम प्रियंका में शामिल किया गया। या यूं कहें कि प्रियंका गांधी का रणनीतिकार बनाया गया। लगभग प्रियंका गांधी के हर यूपी दौरे में उनके साए की तरह रहने वाले संदीप सिंह पार्टी का एक धड़ा लेफ्ट एजेंडा चलाने का आरोप लगाता रहा है इसके बावजूद पार्टी आलाकमान का भरोसा संदीप पर अभी भी बना हुआ है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।