कालापानी, लिपुलेख को नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखाए जाने के बावजूद सरकारें सोई पड़ी: कांग्रेस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मई 24, 2020   16:57
कालापानी, लिपुलेख को नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखाए जाने के बावजूद सरकारें सोई पड़ी: कांग्रेस

वरिष्ठ कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय ने कालापानी और लिपुलेख को हाल में नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखाए जाने पर केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस मुद्दे पर वे सोई हुई हैं।

देहरादून। वरिष्ठ कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय ने कालापानी और लिपुलेख को हाल में नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखाए जाने पर केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस मुद्दे पर वे सोई हुई हैं। यहां जारी एक बयान में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उपाध्याय ने कहा कि पिथौरागढ़ में स्थित कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय सीमा का मुद्दा जरूर है लेकिन वह भूभाग तो हमारे प्रदेश का है और राज्य सरकार इस संबंध में केंद्र से बात करने की बजाय सोई हुई है।

इसे भी पढ़ें: प्रवासी श्रमिकों से लिया जा रहा है ट्रेन टिकट का पैसा: कमलनाथ

उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनसे घटना का संज्ञान लेने को कहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र में बताया है कि नेपाल ने भारत के अभिन्न हिस्से काला पानी और लिपुलेख को नक़्शे में अपना क्षेत्र दिखाकर यहाँ के निवासियों की भावना को आहत किया है और उनमें इस बात को लेकर रोष है।

इसे भी पढ़ें: किसान कांग्रेस की मांग, पूरे देश में किसान न्याय योजना लागू करे केंद्र

इस संबंध में कांग्रेस नेता ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘‘भारत का कोरोना, चीन के कारोना से ज़्यादा ख़तरनाक है।’’ उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वह नेपाल और तिब्बत से लगती सीमाओं पर बन रही चिंतनीय स्थिति का संज्ञान लेकर भ्रम को समाप्त करने के लिए भारत सरकार को निर्देशित करें।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।