Jagannath Puri से Konark तक अब सीधी ट्रेन, Indian Railways की सौगात से श्रद्धालुओं का सफर आसान

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भारतीय रेलवे द्वारा 32 किलोमीटर लंबी पुरी-कोणार्क रेल लाइन परियोजना को गति दी गई है, जो जगन्नाथ धाम और सूर्य मंदिर के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित करेगी। यह परियोजना तटीय ओडिशा में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी और लाखों श्रद्धालुओं के लिए यात्रा सुगम बनाएगी, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है।

भारतीय रेलवे ने पुरी-कोणार्क रेल लाइन परियोजना पर काम कर रहा है। तटीय ओडिशा में रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए यह परियोजना भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क को जोड़ने वाले प्रस्तावित तटीय रेल त्रिकोण की अहम कड़ी मानी जा रही है। 

आपको बताते चलें कि, रेलवे बोर्ड ने 19 फरवरी 2024 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी, जबकि 7 मार्च 2024 को इसे विशेष परियोजना घोषित किया गया। परियोजना का क्रियान्वयन ईस्ट कोस्ट रेलवे के तहत किया जा रहा है।

32 किमी पुरी-कोणार्क रेल लाइन होगी

ईस्ट कोस्ट रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक राउत ने बताया कि 32 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित पुरी-कोणार्क रेल लाइन राज्य में धार्मिक पर्यटन और तीर्थ कनेक्टिविटी को नया आयाम देंगे।

इससे पुरी के जगन्नाथ धाम और कोणार्क सूर्य मंदिर के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा। अभी दोनों शहरों के बीच दूरी 35 किलोमीटर होने के बावजूद सीधी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है।

रेलवे के अधिकारी ने बताया कि नई रेल लाइन से हर साल जगन्नाथ मंदिर और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कोणार्क सूर्य मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण और जरूरी कानूनी अनुमोदनों का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। परियोजना को गति देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 138.38 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे निर्माण कार्य और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को और तेज किया जा सके।

यह नई रेल परियोजना पुरी और गोप तहसील क्षेत्रों से होकर निकलेगी। इसके तहत कुल 521.48 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 36 गांवों की 438.81 एकड़ निजी भूमि के साथ-साथ 33 गांवों की 82.67 एकड़ सरकारी जमीन भी शामिल रहेगी।

यह रेल लाइन पुरी और गोप तहसीलों से होकर गुजरेगी। इसके लिए तकरीबन 521.48 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। बताया जा रहा है कि 36 गांवों की 438.81 एकड़ निजी भूमि और 33 गांवों की 82.67 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है।

रेल अधिकारियों ने कहा है कि इस परियोजना से किसी भी वन भूमि पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए रेल मार्ग का चयन किया गया है। 

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