Voter List विवाद पर पूर्व जज SN Dhingra का बयान, ECI की SIR प्रक्रिया को बताया जरूरी

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के विरोध की आलोचना की है। उन्होंने इसे राजनीतिक मकसद से किया गया मीडिया स्टंट करार दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है और विपक्ष बेवजह इस पर सवाल उठा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शिव नारायण ढिंगरा ने बुधवार को विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की आलोचना की। उन्होंने यह आलोचना 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ सड़क पर किए गए विरोध प्रदर्शनों और भारत के चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय तक निकाले गए मार्च को लेकर की। ANI से बात करते हुए, उन्होंने ECI की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया के दौरान "बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाने" के आरोपों का खंडन किया। जस्टिस ढिंगरा ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन वोटरों के अधिकारों को लेकर कोई असली चिंता नहीं, बल्कि राजनीतिक मकसद से किया गया मीडिया स्टंट था। विपक्ष के इन दावों को खारिज करते हुए कि SIR प्रक्रिया का मकसद असली वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है, जस्टिस ढिंगरा ने ज़ोर देकर कहा कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर सुधार करना चुनाव आयोग की एक ज़रूरी कानूनी ज़िम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि यह सारा शोर वोटर नहीं मचा रहे हैं। यह शोर वे राजनीतिक पार्टियां मचा रही हैं जो चुनाव नहीं जीत पाईं। अगर वोटर को कोई शिकायत है, तो उसका समाधान मौजूद है। अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है, तो आप चुनाव आयोग को बता सकते हैं कि 'मेरा नाम गलत तरीके से हटाया गया है।' इसके लिए समाधान मौजूद है। यह विवाद ECI की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) से शुरू हुआ है। विपक्षी INDIA गठबंधन ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया और ECI ऑफिस तक मार्च किया। उन्होंने SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग की, और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाए गए हैं। "लेकिन SIR की ही निंदा करना और यह कहना कि SIR नहीं होना चाहिए, इसका मकसद सिर्फ़ यह पक्का करना है कि चुनाव आयोग को काम न करने दिया जाए। SIR संसद द्वारा चुनाव आयोग को दिया गया एक आदेश है कि वह हर 10 साल में वोटर लिस्ट को अपडेट करे, मरे हुए लोगों के नाम हटाए और यह जांचे कि नए वोटरों के नाम शामिल किए गए हैं या नहीं... ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होना चाहिए जो भारत का नागरिक न हो और जिसे वोट देने का अधिकार हो। तो, ये कानून द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए आदेश हैं। जस्टिस ढींगरा ने कहा चुनाव आयोग इन आदेशों का पालन कर रहा है, और मुझे समझ नहीं आता कि वे SIR को जारी रखने या आयोजित करने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना कैसे कर सकते हैं। मीटिंग के समय को लेकर विपक्षी नेताओं और चुनाव आयोग के बीच हुए टकराव पर बात करते हुए, जस्टिस ढींगरा ने तर्क दिया कि यह आंदोलन किसी ठोस समाधान के बजाय मीडिया में दिखने के लिए किया जा रहा है।
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बाजवा ने कहा कि CBI ने जांच खुद शुरू नहीं की थी, बल्कि वह हाई कोर्ट के निर्देशों के आधार पर काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि एक FIR दर्ज की गई है और CBI ने मामले में दखल दिया है—यह उसने अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट और चीफ जस्टिस के निर्देशों पर किया है।" इस बीच, पंजाब सरकार ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 'स्पेशल लीव पिटिशन' (SLP) दाखिल करके हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट राज्य की इस चुनौती पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। बाजवा ने कहा कि जांच से आखिरकार यह पता चल जाएगा कि आरोपों के समर्थन में सबूत हैं या नहीं।
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