Jaishankar ने US को हड़काया तो Donald Trump ने PM Modi को फोन घुमाया!

दूसरी बड़ी चुनौती रूस को लेकर है। ट्रंप ने 18 सितंबर को रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़े नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिल गया है।
अपनी स्पष्टवादिता के लिए मशहूर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क से साफ संदेश दिया कि अगर अमेरिका भारत की सीमा पार आतंकवाद की चिंता को नहीं समझता, तो इसका सीधा असर भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ेगा। इसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी समेत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने तथा निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। मोदी ने बातचीत को “उत्पादक” बताया।
लेकिन इस फोन कॉल के पीछे की कहानी सिर्फ औपचारिक बयानों तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय से अमेरिका की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी ने भारत की चिंता बढ़ाई है। राष्ट्रपति ट्रंप का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ खुलकर गर्मजोशी दिखाना और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के प्रति उनका रवैया भी नई दिल्ली के लिए असहज करने वाला रहा है। इसी माहौल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत दशकों से पड़ोसी देश से सीमा पार आतंकवाद झेल रहा है और अगर अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण साझेदार को भारत की इस चिंता की गंभीरता समझ नहीं आती, तो इसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ना तय है। हालांकि, जयशंकर ने यह भी संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच अब काफी हद तक सहमति बन चुकी है। उनका कहना था कि इस समझौते में लगी लंबी बातचीत ने रिश्तों में कुछ मुश्किलें जरूर पैदा कीं, लेकिन समझौता पूरा होने से दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिल सकती है।
दूसरी बड़ी चुनौती रूस को लेकर है। ट्रंप ने 18 सितंबर को रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़े नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिल गया है। भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार है, इसलिए इस कानून का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। नई दिल्ली पहले ही अमेरिका को साफ कर चुकी है कि रूस से ऊर्जा खरीद का मुद्दा भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है और वह अपने राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं कर सकता। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तेल की खरीद के स्रोत बाजार की परिस्थितियों तथा राष्ट्रीय हित के अनुसार विविध बनाए जाएंगे। साथ ही जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी इस कानून से जुड़ी भारतीय चिंताओं को उठाया।
उधर, व्यापार मोर्चे पर तस्वीर आसान नहीं है। अमेरिका की बदलती शुल्क नीति और नए प्रतिबंध तंत्र के कारण बातचीत लंबी खिंची है। भारत का संदेश साफ है कि व्यापार समझौता आगे बढ़ सकता है, लेकिन ऐसा कोई नया अमेरिकी शुल्क कदम बातचीत को पटरी से उतार सकता है। इसी बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका में अंतरिम व्यापार समझौते पर वार्ता आगे बढ़ा रहे हैं।
बहरहाल, मोदी और ट्रंप की यह बातचीत सिर्फ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पाकिस्तान, सीमा पार आतंकवाद, रूस से तेल खरीद, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और चीन के बीच बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे कई बड़े मुद्दे हैं। भारत अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों पर किसी तरह का दबाव स्वीकार करने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि जयशंकर का संदेश बेहद साफ था कि भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी तभी मजबूत होगी, जब दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और उनका सम्मान करें। उधर, मोदी-ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत से फिलहाल इतना जरूर संकेत मिला है कि दोनों पक्ष मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि दिसंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की आमने-सामने मुलाकात की संभावना है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान, रूसी तेल और अमेरिकी शुल्क नीति पर वाशिंगटन का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि भारत-अमेरिका रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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