NEET Protest: राघव चड्ढा बोले- सरकार ने छात्रों की बात सुनी, दिया बड़ा Solution

NEET पेपर लीक पर मचे बवाल और देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद, बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की बात सुनी, कार्रवाई की और पहला एंटी-पेपर लीक फ़्रेमवर्क लाकर स्थायी समाधान के प्रयास किए हैं। चड्ढा ने छात्रों के गुस्से और दर्द को जायज़ ठहराते हुए शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को मंज़ूरी मिलने से कुछ घंटे पहले, बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने NEET विरोध प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ी, जिसने राजधानी को हिलाकर रख दिया था। बिल पर चर्चा के दौरान चड्ढा ने कहा कि मुझे अपना अगला वाक्य पूरे भरोसे और ईमानदारी से कहने का हक मिला है: कि जब हमारे छात्रों और भारत के युवाओं की बात आई, तो सरकार ने बात सुनी, सरकार ने कार्रवाई की और सरकार ने नतीजे दिए।
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यह बयान सांसद ने तब दिया, जब NEET पेपर लीक के विरोध में पूरे भारत में सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की; बढ़ते दबाव के बीच आख़िरकार उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। संसद में अपने भाषण में चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 22 लाख बच्चे 3 घंटे की परीक्षा के लिए हर दिन 18 घंटे कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन एक कैमरा फ़ोन, WhatsApp पर एक मैसेज, रात 2 बजे Telegram पर एक PDF और पेपर लीक हो जाता है—सब कुछ खत्म हो जाता है। छात्रों की सारी मेहनत बेकार चली जाती है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का स्थायी इलाज होना चाहिए। जैसे कैंसर का इलाज क्रोसिन खिलाकर नहीं किया जा सकता, वैसे ही पेपर लीक की समस्या मीडिया में बयान देने से नहीं, बल्कि संस्थागत समाधानों से हल होगी। हमारी सरकार आज इस बिल के ज़रिए भारत का पहला एंटी-पेपर लीक फ़्रेमवर्क लाकर यही करने जा रही है। चड्ढा ने ज़ोर देते हुए कहा कि सबसे पहले, मैं NEET के छात्रों से कुछ कहना चाहता हूँ। आपका गुस्सा जायज़ है। आपका दर्द असली है और परीक्षा प्रणाली को लेकर आपकी शिकायत भी सही है।
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उन्होंने आगे कहा कि जब आपने अपनी चिंता ज़ाहिर की, अपना दर्द बताया और अपनी मांग रखी, तो प्रधानमंत्री ने उस मांग को सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक अभिभावक और परिवार के मुखिया की तरह सुना। छात्रों ने मांग की, सरकार ने कार्रवाई की, ऐतिहासिक फ़ैसले लिए गए और सिस्टम बदले गए। विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बात करते हुए चड्ढ ने कहा कि जब हमारे छात्रों और भारत के युवाओं की बात आई, तो सरकार ने बात सुनी, कार्रवाई की और नतीजे भी दिए।
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