Women Reservation Bill पर Modi Govt की नई रणनीति, Special Session में Delimitation पास कराने की तैयारी

केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए इस महीने के अंत में संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की दरकार है। इसके लिए सरकार डीएमके समेत अन्य क्षेत्रीय और विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने के लिए संपर्क कर रही है।
केंद्र सरकार को प्रस्तावित परिसीमन और महिला आरक्षण कानून को पारित कराने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाने का भरोसा है। जानकारी के मुताबिक इस महीने के आखिर में संसद का एक विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना है, जिसके मद्देनजर सरकार समर्थन जुटाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों से संपर्क कर रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक लाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रस्तावित कानून के लिए समर्थन का आकलन करने के लिए विपक्षी दलों तथा क्षेत्रीय पार्टियों के संपर्क में है। सूत्रों के अनुसार, एक बार जब सरकार को यह भरोसा हो जाएगा कि विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्या बल मौजूद है, तो इसे संसद में पेश किया जा सकता है।
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अक्टूबर के आखिर में एक विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, हालांकि तारीखों को लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस कार्यक्रम में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को भी शामिल किए जाने की संभावना है, जो 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होने वाला है। यह प्रस्तावित कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब मोदी सरकार को बजट सत्र के दौरान एक झटका लगा था। 17 अप्रैल को, परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़ा एक संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया था।
संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। हालांकि मौजूदा लोकसभा में NDA के पास बहुमत है, लेकिन उसके पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत (लगभग 360 सीटें) नहीं है। लोकसभा में अभी 540 सदस्य हैं। हालाँकि, पिछले सत्र के मुकाबले सरकार की स्थिति मजबूत हुई है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इन विधेयकों के लिए समर्थन हासिल करने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ बातचीत कर रही है।
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यह संपर्क तब हो रहा है, जब तमिलनाडु चुनावों के बाद इस क्षेत्रीय पार्टी ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन से बाहर हो गई। सूत्रों ने बताया कि सरकार कुछ छोटी विपक्षी पार्टियों के संपर्क में भी है, क्योंकि वह संभावित मतदान से पहले अपना संख्या बल बढ़ाना चाहती है।
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