108 घोड़े, शंख-डमरू की गूंज... Somnath में PM Modi ने ऐतिहासिक Shaurya Yatra से दिया अटूट आस्था का संदेश

सोमनाथ में 'शौर्य यात्रा' के दौरान पीएम मोदी ने एक सजे हुए वाहन में गुजरात के सीएम के साथ हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व 108 घोड़ों के दस्ते और शंख बजाते संस्कृत छात्रों ने किया। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास और हर विनाश के बाद उसके भव्य पुनर्निर्माण की कहानी को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ में आयोजित 'शौर्य यात्रा' में हिस्सा लिया। यह यात्रा जनवरी 1026 में विदेशी हमलावर महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले हमले को 1,000 साल पूरे हो होने के अवसर में निकाली गई है। यह उत्सव इन 1,000 सालों में सोमनाथ मंदिर के अटूट विश्वास और बार-बार पुनर्निर्माण की शक्ति को समर्पित है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आजादी के बाद मंदिर को फिर से बनवाने का संकल्प लिया था। साथ ही, उन्होंने उन योद्धाओं को भी याद किया जिन्होंने सदियों पहले मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
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यात्रा की भव्यता और मुख्य आकर्षण
प्रधानमंत्री एक फूलों से सजी खुली गाड़ी में सवार होकर निकले। उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे। यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने शंख बजाकर लोगों का उत्साह बढ़ाया।
108 घोड़ों का दस्ता
गुजरात पुलिस की माउंटेड यूनिट के 108 घोड़ों ने इस यात्रा की अगुवाई की। ये स्थानीय काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के घोड़े थे, जिन्हें इस खास दिन के लिए 8 महीने तक ट्रेनिंग दी गई थी।
शंख और डमरू की गूंज
खेड़ा जिले के ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय के करीब 350 छात्रों ने जुलूस का नेतृत्व किया। इन छात्रों ने शंख और डमरू बजाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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ऋषिकुमारों से संवाद
पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद युवा ऋषिकुमारों (संस्कृत के छात्रों) और कलाकारों से बातचीत की।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का संदेश
यह पूरी 'शौर्य यात्रा' दरअसल 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य दुनिया को यह बताना है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के साहस और बलिदान का प्रतीक है, जो हर विनाश के बाद और भी भव्य रूप में निखर कर सामने आया है।
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