सारदा घोटाला: सीबीआई की याचिका पर सुनवाई न्यायालय ने दो हफ्ते टाली

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 23, 2021   17:24
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सारदा घोटाला: सीबीआई की याचिका पर सुनवाई न्यायालय ने दो हफ्ते टाली

उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार और तीन अन्य के खिलाफ सीबीआई की अवमानना याचिका पर सुनवाई मंगलवार को दो हफ्तों के लिए टाल दी।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार और तीन अन्य के खिलाफ सीबीआई की अवमानना याचिका पर सुनवाई मंगलवार को दो हफ्तों के लिए टाल दी। सीबीआई ने करोड़ों रुपये के सारदा चिट फंड मामले में उसकी जांच में सहयोग नहीं करने का इन लोगों पर आरोप लगाते हुए यह याचिका दायर की थी। शीर्ष न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में पोंजी योजना के मामलों की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी।

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कुमार, पूर्व मुख्य सचिव मलय कुमार डे और राज्य के पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र कुमार के खिलाफ चार फरवरी 2019 को यह कहते हुए अवमानना याचिका दायर की थी कि जांच में उसे इन लोगों का सहयोग नहीं मिल रहा है। सीबीआई ने कुमार की जमानत रद्द करने के अलावा हिरासत में रख कर उनसे पूछताछ करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया था क्योंकि पूछताछ के दौरान वह टालमटोल कर रहे थे।

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न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने सुनवाई दो हफ्तों के लिए टाल दी क्योंकि वह फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं से जुड़े मामलों की अंतिम सुनवाई कर रही है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने एक नौकरशाह की ओर से पेश होते हुए कहा कि सीबीआई कुछ ऐसी तरकीब का फिर से इस्तेमाल कर रही है जो काफी पुरानी है। वहीं, सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘‘अवमानना हमेशा ही प्रासंगिक रही है। ’’ इस पर सिंघवी ने कहा, ‘‘चुनावों के दौरान यह सक्रिय हो गई है। ’’ गौरतलब है कि सारदा समूह की कंपनियों ने निवेशकों को उनके निवेश के एवज में अधिक दर पर रुपये लौटाने का वादा कर उन्हें कथित तौर पर करीब 2,500 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। इस घोटाले का खुलासा 2013 में हुआ था, जब कुमार विधाननगर पुलिस आयुक्त थे।

कुमार उस विशेष जांच टीम का हिस्सा थे, जिसका गठन पश्चिम बंगाल सरकार ने घोटाले की जांच के लिए किया था। हालांकि, बाद में 2014 में इस मामले की और अन्य चिट फंड मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। नवंबर 2019 में शीर्ष न्यायालय ने सीबीआई की एक अपील पर आईपीएस अधिकारी से जवाब मांगा था। चिट फंड घोटाले में उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए सीबीआई ने यह अपील की थी।

उच्च न्यायालय ने अपने निर्देश में कुमार को जांच अधिकारियों के साथ सहयोग करने और सीबीआई के 48 घंटे के नोटिस पर खुद को पूछताछ के लिए जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने को कहा था। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच उस वक्त एक अभूतपूर्व गतिरोध भी देखने को मिला था, जब सीबीआई की एक टीम उनसे पूछताछ करने कोलकाता स्थित उनके आवास पर पहुंची थी और स्थानीय पुलिस ने उसके अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था।





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लॉकेट चटर्जी ने ममता पर साधा निशाना, कहा- TMC ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सही आंकड़े नहीं दिए

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 8, 2021   20:15
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लॉकेट चटर्जी ने ममता पर साधा निशाना, कहा- TMC ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सही आंकड़े नहीं दिए

भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि यदि रिकॉर्ड देखा जाए तो बलात्कार, छेड़खानी और तेजाब हमले की घटनाओं में ‘‘पिछले 10 वर्षों में थोड़ी भी कमी नहीं आयी है।’’

कोलकाता। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उनकी पार्टी के ‘बंगाल को उसकी अपनी बेटी चाहिए’ अभियान को लेकर सोमवार को निशाना साधा और कहा कि अपराध के आंकड़ों में हेरफेर करने वाली सत्तारूढ़ पार्टी को ‘‘अचानक बेटी के विषय का ध्यान आया है।’’ चटर्जी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि यदि रिकॉर्ड देखा जाए तो बलात्कार, छेड़खानी और तेजाब हमले की घटनाओं में ‘‘पिछले 10 वर्षों में थोड़ी भी कमी नहीं आयी है।’’ चटर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर एनसीआरबी को अपेक्षित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराये। उन्होंने कहा, ‘‘यही कारण है कि एजेंसी बंगाल पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं कर सकी।’’ 

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भाजपा की वरिष्ठ नेता ने दावा किया, ‘‘उत्तर बंगाल में तस्करी के मामलों से लेकर राज्य में कई हत्याओं तक, कुछ ही घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई।’’ ‘‘भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश में महिलाओं की दुर्दशा के तृणमूल कांग्रेस द्वारा बार-बार लगाये जाने वाले आरोप के बारे में पूछे जाने पर लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘माननीय मुख्यमंत्री को पहले यह बताना चाहिए कि कामदुनी में लड़की से गैंगरेप और हत्या के पीछे जो लोग थे, उन्हें अभी तक सजा क्यों नहीं दी गई?’’ साल 2013 में कोलकाता से लगभग 20 किलोमीटर दूर उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी गांव में 20 वर्षीय कॉलेज छात्रा का अपहरण करने के बाद उससे सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी। 

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ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर बनर्जी के विरोध प्रदर्शन पर चटर्जी ने कहा, ‘‘अगर वह इतना चिंतित हैं, तो उन्हें अपनी सरकार द्वारा पेट्रोल के प्रत्येक लीटर पर लगाए जाने वाले 37 रुपये के उपकर को माफ कर देना चाहिए। प्रतीकात्मक रूप से सिर्फ एक रुपया क्यों कम किया गया? केंद्र लोगों के कष्टों से अवगत है और उनकी बेहतर सेवा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहा है।’’ कोविड-19 टीकाकरण प्रमाणपत्र में मोदी की तस्वीर को शामिल किए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री की आलोचना किये जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह दुखद है कि दीदी (ममता बनर्जी) ने टीकाकरण अभियान का राजनीतिकरण करने से परहेज नहीं किया। वह हमेशा लोगों के हितों पर राजनीति को प्राथमिकता देती हैं।





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सर्बानंद सोनोवाल का दावा, भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को लोग असम में लाना चाहते हैं वापस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 8, 2021   19:56
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सर्बानंद सोनोवाल का दावा, भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को लोग असम में लाना चाहते हैं वापस

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में किये गये विकास कार्यों के दम पर असम को देश के सबसे अच्छे राज्यों में से एक बनाने के लिए लोगों से एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को मौका देने की मांग कर रही है।

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को दावा किया प्रदेश के 126 विधानसभा सीटों वाली विधानसभा में 100 से अधिक सीटों के साथ प्रदेश की जनता भाजपा की अगुवाई वाली सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिये ‘‘उत्सुकता से प्रतीक्षा’’ कर रही है। सोनोवाल ने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश में किये गये विकास कार्यों के दम पर असम को देश के सबसे अच्छे राज्यों में से एक बनाने के लिए लोगों से एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को मौका देने की मांग कर रही है। 

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मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘असम की जनता के पास बेहतर काम करने वाली सरकार है...... हमारी सरकार के विकास कार्यों सेवे बेहद प्रसन्न हैं.. उन्हें इस बात की जानकारी है कि केवल भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार ही विकास, शांति और सुरक्षा दे सकती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार के दौरान पिछले पांच सालों में इन प्रतिबद्धताओं को पूरा किया गया है। यही कारण है कि यहां के लोग बेसब्री से मतदान के दिन का इंतजार कर रहे हैं।’’ 

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सोनोवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचारमुक्त, प्रदूषणमुक्त, आतंकवादमुक्त औरऔर विकसित असम का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इन सभी मोर्चों में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के ‘‘ईमानदार प्रयासों’’ के कारण लोगों को वादा पूर्ति का आश्वासन मिला है। प्रदेश के126 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लियेतीन चरणों में चुनाव होना है। पहले चरण में 47 सीटों के लिये 27 मार्च को मतदान होगा। दूसरे और चीसरे चरण का मतदान एक और छह अप्रैल को होगा।





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हरियाणा में प्राइवेट नौकरी में 75 फीसदी वाला आरक्षण, कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए कितना तैयार?

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 8, 2021   19:49
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हरियाणा में प्राइवेट नौकरी में 75 फीसदी वाला आरक्षण, कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए कितना तैयार?

हरियाणा की प्राइवेट नौकरियों में अब 75 फीसदी रोजगार सिर्फ हरियाणा के लोग ही पाएंगे। यानी हर 4 में से 3 निजी नौकरी हरियाणा के लोगों के लिए होगी। हर 4 में आखिरी बची एक प्राइवेट नौकरी ही बाहर राज्य के लोगों को मिल पाएगी।

हरियाणा में प्राइवेट कंपनी की 75 फीसदी नौकरी को शर्तों के साथ अब हरियाणा के ही लोगों को देनी होगी। हरियाणा सरकार के उस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। जो कहता है कि हरियाणा की प्राइवेट नौकरियों में अब 75 फीसदी रोजगार सिर्फ हरियाणा के लोग ही पाएंगे। यानी हर 4 में से 3 निजी नौकरी हरियाणा के लोगों के लिए होगी। हर 4 में आखिरी बची एक प्राइवेट नौकरी ही बाहर राज्य के लोगों को मिल पाएगी। मतलब बाकी के 25 फीसदी में बिहार से रख लीजिए, मणिपुर, बंगाल, महाराष्ट्र से रख लीजिए या इंग्लैंड, अमेरिका और जर्मनी वाला रख लीजिए। तो सवाल है कि निजी क्षेत्र में भी नौकरी का पैमाना योग्यता होगा या किसी तरह का कोई आरक्षण?

तो सवाल हुआ कि क्या गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, जेनपैक्ट जैसी बड़ी कंपनियों को अब हरियाणा के नियम के मुताबिक हरियाणा के ही लोगों को अपनी कंपनी में 75 फीसदी नौकरी देनी होगी। तो जवाब है हां। 

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आरक्षण के नियम

75 फीसदी आरक्षण हरियाणा के लोगों को ही निजी नौकरी में देने का विधेयक नई स्थापित होने वाली और हरियाणा में पहले से चल रहे उन कंपनियों, सोशायटी, ट्रस्ट और फर्म पर लागू होगा जिनमें 10 से ज्यादा कर्मचारी हैं। हरियाणा के लोगों को आरक्षण का ये फॉर्मूला 50 हजार रूपये मासिक वेतन तक वाली नौकरियों में मिलेगा। सभी प्राइवेट कंपनियों हरियाणा सरकार के पोर्टल पर 3 महीने में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सभी निजी कंपनी को तीन महीने में ये बताना होगा कि 50 हजार तक की तनख्वाह वाले कितने पद हैं और हरियाणा से कितने लोग उनकी कंपनी में काम कर रहे हैं। अगर किसी ने हरियाणा के लोगों को ही 75 फीसदी नौकरी देने का नियम नहीं माना तो जुर्माने के साथ कंपनी का लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो सकता है। जो कि कंपनी हरियाणा सरकार की निजी नौकरी में आरक्षण को पूरी तरह ईमानदारी से लागू करेगी उसे सरकार प्रोत्साहन राशि देगी। 

क्या इस तरह का कानून बनाया जा सकता है?

जवाब है हां, संविधान के अनुच्छेद 16 (3) संसद को राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के तहत स्थानीय या किसी अन्य प्राधिकरण के साथ सार्वजनिक रोजगार और नौकरियों में डोमिसाइल के आधार पर आरक्षण प्रदान करने का अधिकार देती है। साल 1957 में इसी का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद सभी कानूनों को निरस्त करने के लिए सार्वजनिक रोजगार अधिनियम रोजगार अधिनियम पारित किया। 

चुनाव में जेजेपी ने किया था वादा

स्थानीय लोगों को निजी क्षेत्र में 75 फीसदी आरक्षण का मामला पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। तब जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला ने चुनाव प्रचार के दौरान इसका वादा किया था। चौटाला राज्य के मुख्यमंत्री के साथ ही उद्योग, श्रम और रोजगार मंत्री भी हैं। 

 सीधे कानून पारित करने की शक्ति राज्य के पास? 

डोमिसाइल आधारित आरक्षण पर सीधे कानून पारित करने की कोई शक्ति राज्य सरकार के पास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में इस चलन को कम किया। ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के पक्ष में मेडिकल कॉलेजों में कुछ प्रतिशत सीटों के उत्तर प्रदेश के आरक्षण को आर्थिक विचारों पर उचित ठहराया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था।  

स्थानीय आरक्षण का वादा सियासी रणनीति बनती जा रही 

हमारे देश में बरसों से जातियों की दीवार तोड़ने की राजनीति हो रही है। धर्मों और भाषाओं की दीवार तोड़ने की राजनीति हो रही है। लेकिन हर चुनाव में एक नई दीवार खड़ी हो जाती है। इससे पहले आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी सीएम बने तो उन्होंने कानून बना दिया कि आंध्र प्रदेश की प्राइवेट कंपनियों में राज्य के लोगों के लिए 75 फीसदी नौकरियां आरक्षित होंगी। राजनीतक दलों की ओर से युवाओं को नौकरी में स्थानीय आरक्षण का वादा करना नई सियासी रणनीति बनती जा रही है। राजनीति दलों द्वारा ये क्षेत्रीय भावना को उभारने की नीति है या देश में बढ़ती बेरोजगारी को अंकित करने का संदेश। लेकिन राजनीति का नया ट्रेंड ऐसे ही जारी रहा तो इसके असर से देश में युवाओं के लिए एक दीवार खड़ी हो जाएगी।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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