SECI fraud case: दिल्ली पुलिस ने भगोड़े आरोपी शिव शंकर दास को बिहार से किया गिरफ्तार

Prabhasakshi Image

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 27 जुलाई को पटना से शिव शंकर दास को गिरफ्तार किया। आरोपी पर भारतीय सौर ऊर्जा निगम की निविदा में 136.40 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का गंभीर आरोप है।

नयी दिल्ली, तीन अगस्त भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) की ओर से जारी एक निविदा में 136.40 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में भगोड़े आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 27 जुलाई को पटना से शिव शंकर दास को गिरफ्तार किया।

वह कई महीनों से गिरफ्तारी से बच रहा था। बाद में उसे पुलिस पारगमन हिरासत पर दिल्ली लेकर आई। एक बयान के मुताबिक, वह अभी न्यायिक हिरासत में है।

यह मामला भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। एसईसीआई, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस पावर लिमिटेड की सहायक कंपनी रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड ने निविदा प्रक्रिया के दौरान 68.20-68.20 करोड़ रुपये की दो कथित फर्जी बैंक गारंटी जमा की थीं।

इसके बाद ईओडब्ल्यू ने जून 2025 में प्राथमिकी दर्ज की। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, ये बैंक गारंटी कथित तौर पर विदेशी बैंकों-एसीई इन्वेस्टमेंट बैंक, मलेशिया और फर्स्ट रैंड बैंक लिमिटेड, मनीला फिलीपीन की ओर से जारी की गई थीं। उनकी प्रामाणिकता साबित करने के लिए कथित रूप से फर्जी ईमेल और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से जारी बताए गए जाली ‘स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम’ (एसएफएमएस) पुष्टिकरण का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, एसबीआई ने बाद में ऐसे किसी भी पुष्टिकरण को जारी करने से इनकार कर दिया। बयान के अनुसार, पुलिस का आरोप है कि दास ने रिलायंस पावर लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक कुमार पाल, पार्थसारथी बिस्वाल और अमरनाथ दत्ता समेत सह-आरोपियों के साथ मिलकर एसईसीआई की निविदा हासिल करने के लिए जाली बैंक गारंटी, एसबीआई के फर्जी समर्थन पत्र, फर्जी एसएफएमएस पुष्टिकरण, नकली मुहरें और लेटरहेड तैयार करने की साजिश रची। जांचकर्ताओं ने बताया कि दास ने एसबीआई की एक फर्ज़ी ईमेल आईडी भी बनाई थी, जिसका कथित तौर पर इस्तेमाल एसईसीआई और कंपनी के अधिकारियों को भेजे गए जाली दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता साबित करने के लिए किया गया था।

बयान के मुताबिक, एक वित्तीय जांच से पता चला कि इस साज़िश में अपनी कथित भूमिका के लिए दास को 1.44 करोड़ रुपये मिले थे। ईओडब्ल्यू ने कहा कि दास फरार था और बाद में दिल्ली की एक अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। पुलिस की एक टीम ने तकनीकी निगरानी के माध्यम से उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी और कोलकाता, मेदिनीपुर, आसनसोल और मुंबई सहित कई शहरों में तलाशी ली, अंत में उसे पटना से गिरफ्तार कर लिया गया।

All the updates here:

अन्य न्यूज़