सोनिया ने MSME क्षेत्र की स्थिति पर जताई चिंता, राहत कदम उठाये जाने का किया आग्रह

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अप्रैल 25, 2020   18:37
सोनिया ने MSME क्षेत्र की स्थिति पर जताई चिंता, राहत कदम उठाये जाने का किया आग्रह

सोनिया ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान एमएसएमई क्षेत्र को रोजाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों का रोजगार जाने का खतरा पैदा हो गया है क्योंकि एमएसएमई इकाइयों को अपने यहां काम करने वालों को वेतन देने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

नयी दिल्ली।  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कोरोना वायरस के संकट में मुश्किल का सामना कर रहे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की स्थिति पर शनिवार को चिंता जाहिर की और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये के वेतन सुरक्षा पैकेज की घोषणा करने, एक लाख करोड़ रुपये का ऋण गारंटी कोष बनाने और कई अन्य कदम उठाये जाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि अगर सरकार समय रहते कदम उठाती है तो उस एमएसएमई क्षेत्र को बड़ी राहत मिल सकती है जो देश में 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है।

सोनिया ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान एमएसएमई क्षेत्र को रोजाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों का रोजगार जाने का खतरा पैदा हो गया है क्योंकि एमएसएमई इकाइयों को अपने यहां काम करने वालों को वेतन देने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया, ‘‘एक लाख करोड़ रुपये के ‘एमएसएमई वेतन सुरक्षा’ पैकेज की घोषणा की जाए। यह नौकरियों को सुरक्षित रखने और हौसला बढ़ाने में मददगार होगा तथा इससे आर्थिक नुकसान की धारणा को भी खत्म किया जा सकेगा।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का ऋण गारंटी कोष स्थापित किया जाए ताकि एमएसएमई क्षेत्र के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो सके। 

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उन्होंने यह भी मांग की कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से उठाए गए कदमों का असर दिखना चाहिए और वाणिज्यिक बैंकों से एमएसएमई को कर्ज मिलना सुनिश्चित हो। इस क्षेत्र की सहूलियत के लिए संबंधित मंत्रालय में एक हेल्पलाइन स्थापित की जाए। सोनिया ने आग्रह किया कि एमएसएमई द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज के भुगतान को तीन महीने के लिए टाला जाए तथा सरकार इस क्षेत्र से जुड़े कर को माफ करने अथवा कम करने पर विचार करे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को जिन वजहों से ऋण मिलने में अवरूद्ध पैदा हो रहा है, उन्हें दूर किया जाए।





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