तीसरी शादी के लिए सर्वना भवन के मालिक को करनी पड़ी थी हत्या ? पढ़ें पूरी कहानी

By अनुराग गुप्ता | Publish Date: Jul 19 2019 12:17PM
तीसरी शादी के लिए सर्वना भवन के मालिक को करनी पड़ी थी हत्या ? पढ़ें पूरी कहानी
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4 जुलाई के दिन एक तस्वीर सामने आई जिसमें डोसा किंग तमिलनाडु के वाडापलानी स्थित विजय हॉस्पिटल में मॉस्क लगाए हुए दिखाई दे रहे थे। इ

सर्वना भवन के संस्थापक पी. राजगोपाल ने गुरुवार 18 जुलाई के दिन चेन्नई के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। आपको जानकारी दे दें कि पी. राजगोपाल हत्या के मामले में दोषी थे और कुछ दिन पहले ही उन्होंने आत्मसमर्पण किया था। भारत के साथ कई अन्य देशों में भी सर्वना भवन नामक होटल की चेन है। जिसके मालिक पी. राजगोपाल को लोग उनके असल नाम की बजाए डोसा किंग के नाम से ज्यादा जानते हैं। 

4 जुलाई के दिन एक तस्वीर सामने आई जिसमें डोसा किंग तमिलनाडु के वाडापलानी स्थित विजय हॉस्पिटल में मॉस्क लगाए हुए दिखाई दे रहे थे। इस तस्वीर के सामने आने के बाद 8 जुलाई के दिन उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि डोसा किंग के नाम से मशहूर शख्स एंबुलेंस से कोर्ट पहुंचा था। क्योंकि हत्या और साजिश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।





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फ्लैशबैक में ऐसी थी राजगोपाल की जिन्दगानी

उम्रकैद की सजा मिली और आज राजगोपाल इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन इस कहानी की शुरुआत यहां से नहीं होती बल्कि होती है तमिलनाडु के तूतिकोरियन के गांव पुन्नाइयादी से। साल था 1973। डोसा किंग के पिता किसान थे और पिता किसानी करते थे तो उन्हें भी किसानी करना पड़ता लेकिन यह बात उन्हें मंजूर कहा थी। इसलिए डोसा किंग राजगोपाल चेन्नई चले गए और वहां पर उन्होंने किराने की दुकान खोल ली। कामकाज ठीक चल ही रहा था कि राजगोपाल की मुलाकात एक ज्योतिषी से हो गई और वह उस ज्योतिषी की बातों से इतना ज्यादा प्रभावित हो गए कि उसकी बातों पर उन्हें विश्वास होने लगा। 

ज्योतिषी ने उस वक्त राजगोपाल को कहा कि बेटा अगर तुम किराने की दुकान की बजाए रेस्टोरेंट खोल लो तो तुम्हें काफी फायदा होगा। ज्योतिषी ने इतना कहा ही था कि राजगोपाल ने उनकी बात मान ली और किराने की दुकान बंद करके एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोल लिया। उस रेस्टोरेंट का नाम रखा- सर्वना भवन...



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शुरुआती समय में हुई थी राजगोपाल को काफी समस्या

ज्योतिषी के कहने पर राजगोपाल ने रेस्टोरेंट खोल लिया और बेहतरीन डोसा, पूड़ी, वड़ा और इटली बनाने लगे। यह वो दौर था जब लोग घर से बाहर नहीं निकलते थे खाना खाने के लिए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ज्योतिषी पर विश्वास किया। राजगोपाल उस वक्त सबसे बेहतरीन खाना बनाते थे और अच्छे सामान का उपयोग करते थे। इस बात पर आप सभी विश्वास तो करते ही होंगे कि अच्छी चीजें बाजार में महंगी मिलती है। महंगे मसालों का इस्तेमाल करने के बावजूद राजगोपाल एक रुपए में बेचते थे। इसी वजह से पहले महीने उन्हें दस हजार रुपए का घाटा हुआ था। 

8 साल तक किराने की दुकान चलाने वाले राजगोपाल ने हिम्मत नहीं हारी और घाटे के बावजूद रेस्टोरेंट चलाते रहे। देखते ही देखते उनकी किस्मत बदलने लगी। जब भी किसी व्यक्ति को घर से बाहर कुछ खाने का दिल करता तो वह सीधे सर्वना भवन पहुंचते थे। शुरुआती झटकों के बाद राजगोपाल की किस्मत चमकने लगी और उनका साम्राज्य विकसित होने लगा। साम्राज्य बड़ा हुआ तो कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा हुआ और उन्हें अच्छी सुविधाएं देने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ते थे राजगोपाल। इसीलिए कर्मचारी उन्हें अन्नाची कहते थे। अन्नाची का मतलब हिन्दी में बड़ा भाई होता है।

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कामयाबी के शिखर पर राजगोपाल

रेस्टोरेंट चल जाने की वजह से राजगोपाल का ज्योतिषी के प्रति भरोसा बढ़ गया और देखते ही देखते दुनियाभर में सर्वना भवन की शाखाएं खुल गई। इसके साथ ही साथ राजगोपाल का नाम सब भूलने लगे और उन्हें डोसा किंग के नाम से जानने लगे। राजगोपाल कामयाबी के शिखर पर थे और ज्योतिषी पर खुद से अधिक विश्वास करते थे। इसी वजह से उन्होंने रंगीन कपड़े पहनना छोड़ दिया और साधारण सी सफेद शर्ट पहनने लगे।

ज्योतिषी ने डोसा किंग को दिया शादी करने का सुझाव

साधारण मिजाज के हो लिए राजगोपाल की दो शादियां हुईं लेकिन इनमें से कोई भी शादी नहीं चलीं।  जिसके बाद ज्योतिषी ने उन्हें तीसरी शादी का सुझाव दिया। साल था 2000। राजगोपाल की कंपनी में काम करने वाले असिस्टेंट मैनेजर की बेटी उनके पास उधार लेने पहुंची क्योंकि उसे अपने पति (संत कुमार जो पेशे से मैथ्स के प्रोफेसर थे) को ट्रैवल एजेंसी खोलनी थी। लड़की ने राजगोपाल से पैसों से जुड़ी बातचीत की और मामला जम भी गया। लेकिन इसके बावजूद राजगोपाल उसे अक्सर फोन किया करते थे और तो और उसके लिए तोहफे में महंगे गहने भेजा करते थे।

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राजगोपाल का मानना था कि ऐसा करने से क्या पता उस लड़की और उसके पति के बीच में दूरियां पनपने लगें। लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए। एक दिन लड़की उनके तोहफो से परेशान होकर उनकी शिकायत पुलिस से करने की धमकी दी फिर भी वह नहीं माने।

राजगोपाल ने लड़की को सताया था 

 राजगोपाल की कंपनी में काम करने वाले असिस्टेंट मैनेजर की लड़की और उसके पति संत कुमार ने लव मैरिज की थी वो भी घरवालों के खिलाफ जाकर। ऐसे में भला लड़की को कहां महंगे गहने पसंद आने थे। लड़की और उसका पति संत कुमार इतना ज्यादा परेशान हो गए कि उन्होंने चेन्नई छोड़ने की योजना बनाई और वह चेन्नई छोड़ ही रहे थे कि राजगोपाल के पांच लोगों ने संत कुमार को अगवा कर लिया।  

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लड़की ने इस सिलसिले में पुलिस से बातचीत की और अपहरण का जिम्मेदार राजगोपाल को ठहराया लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। यह सब कुछ चल ही रहा था कि 12 अक्टूबर साल 2001 के दिन संत कुमार किसी तरह से अपहरणकर्त्ताओं के चंगुल से छूट गया और सीधे पुलिस कमिश्नर के दफ्तर जा पहुंचा। जहां पर उन्हें मुकदमा लिखना ही पड़ा और मुकदमा लिखे जाने के बाद मानों दोनों पति-पत्नी ने यह मान लिया कि अब मामला सुलझ गया है।

12 अक्टूबर को अपहरणकर्त्ताओं के चंगुल से भागने वाले संत कुमार 18 अक्टूबर के दिन एक बार फिर से अगवा हो जाते हैं और फिर से राजगोपाल उस लड़की को फोन करना शुरू कर देता है और शादी की बात करता रहता है। लड़की ने इतनी ज्यादा प्रताड़ना सही कि कोई सोच भी नहीं सकता और वह राजगोपाल की जबरदस्ती से मानी भी नहीं। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि लड़की के पैरों तले से दुनिया गायब हो गई।

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दरअसल, कुछ वक्त के बाद काडाइकोनाल के टाइगर चोला के जंगलों में संत कुमार की लाश मिली और फिर लड़की ने अदालत जाने का फैसला किया। अदालत ने लड़की की पूरी बात सुनी और फैसला उसके पक्ष में ही सुनाया। अदालत ने पुलिस केस दर्ज करने को कहा। जिसके बाद पुलिस ने हत्या की कोशिश, हत्या और अपहरण के तहत मामला दर्ज किया। जिसके बाद पुलिस राजगोपाल की तलाश करने लगी और साल 2001 में राजगोपाल ने चेन्नई पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और डेढ़ साल तक जेल में रहने के बाद साल 2003 में राजगोपाल को जमानत मिल गई।

जमानत के बाद राजगोपाल  फिर पहुंचे जेल

राजगोपाल के जेल से बाहर आने के तुरंत बाद ही लड़की ने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस बार मामला विशेष अदालत को ट्रांसफर कर दिया गया। जहां 2004 में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राजगोपाल और उनके पांच साथियों पर अपहरण, हत्या की कोशिश और हत्या मामले में 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई। 

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संत कुमार की हत्या से आहत हुई लड़की को नहीं जमा था फैसला

स्पेशल कोर्ट के फैसले से लड़की खुश नहीं थी जिसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पांच साल तक यह मामला कोर्ट में चला। जिसके बाद साल 2009 में हाई कोर्ट ने 10-10 साल की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने राजगोपाल के ऊपर 55 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। जिसमें से राजगोपाल को 50 लाख रुपए पीड़ित लड़की को देने थे।

हाईकोर्ट के फैसले को राजगोपाल ने दी थी चुनौती

डोसा किंग राजगोपाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और फिर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुना। तारीख थी 29 मार्च, 2019 जब सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला था। सभी की गिनाह इस मामले पर ही थी और फैसला भी आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और 7 जुलाई 2019 तक सरेंडर करने को कहा। यह तारीख भी बीत गई। पी राजगोपाल 4 जुलाई के दिन ही अस्पताल में भर्ती हो गए और 8 जुलाई को उनके वकील ने अपील करते हुए कहा कि राजगोपाल की तबियत बहुत ज्यादा खराब है लेकिन दलीलों का असर कोर्ट पर नहीं पड़ा और कोर्ट ने कहा कि उन्हें सरेंडर करना ही पड़ेगा। 

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मिली जानकारी के मुताबिक जब मामले की सुनवाई कोर्ट कर रहा था उस वक्त पी राजगोपाल की तबियत का जिक्र कोर्ट में नहीं हुआ था। इसलिए कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने को कहा।  जिसके बाद 8 जुलाई के दिन डोसा किंग ने मद्रास हाईकोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। उस वक्त वह एबुलेंस से अदालत में पहुंचा था और मुंह पर मास्क लगा हुआ था।

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