Prakash Singh केस के उल्लंघन पर Supreme Court सख्त, Jharkhand सरकार को DGP नियम पर 1 हफ्ते की मोहलत

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ANI
अभिनय आकाश । Oct 8 2026 5:11PM

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के उस नियम पर सवाल उठाया है, जिसके तहत रिटायरमेंट में छह महीने से कम समय होने पर भी डीजीपी नियुक्त हो सकते हैं। अदालत ने इसे प्रकाश सिंह फैसले के खिलाफ मानते हुए डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी किया। साथ ही राज्य को इस प्रावधान पर पुनर्विचार हेतु एक हफ्ते का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को झारखंड के उस नियम की वैधता पर सवाल उठाया, जिसके तहत रिटायरमेंट में छह महीने से कम समय बचे होने पर भी किसी अधिकारी को DGP पद पर नियुक्ति के लिए विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान पहली नज़र में प्रकाश सिंह मामले में दिए गए उसके निर्देशों के खिलाफ है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि अगर यह प्रावधान पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति और कार्यकाल पर कोर्ट के आदेश को कमज़ोर करता है, तो इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। शीर्ष अदालत ने झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी किया, क्योंकि इस नियम को रद्द करने का कोई भी फ़ैसला उनकी नियुक्ति पर असर डाल सकता है। कोर्ट ने राज्य को एक हफ़्ते का समय दिया कि वह या तो इस प्रावधान पर पुनर्विचार करे या अपना जवाब दाखिल करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा एक अधिकारी को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के योग्य माना गया है, भले ही रिटायरमेंट से पहले उनकी बची हुई सेवा छह महीने से कम हो। 

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पहली नज़र में ऐसा प्रावधान प्रकाश सिंह मामले में इस कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के सीधे खिलाफ लगता है। बेंच ने आगे कहा उनके पक्ष में पहले ही एक अधिकार बन चुका है। अगर हम इस नियम को रद्द करते हैं, तो इससे उनकी नियुक्ति पर असर पड़ सकता है। या फिर, हम नियम को भविष्य के लिए रद्द कर सकते हैं और कह सकते हैं कि अधिकारी पद पर बने रहेंगे।" सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहा था जिसमें झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति से जुड़े नियमों (2025) और इसके तहत की गई सभी DGP नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। झारखंड की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य को नियमों पर दोबारा विचार करने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही प्रावधान मौजूद हैं, तो केंद्र ने झारखंड को ही क्यों निशाना बनाया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र किसी भी ऐसे राज्य कानून का विरोध करेगा जो 'प्रकाश सिंह' मामले में दिए गए निर्देशों के खिलाफ हो, चाहे सत्ता में कोई भी राजनीतिक पार्टी हो। 

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बेंच ने कहा कि उसका काम यह सुनिश्चित करना है कि राज्य 'प्रकाश सिंह' मामले में तय सुरक्षा उपायों को कमजोर न करें। कोर्ट ने 'एमिकस क्यूरी' (न्याय मित्र) से राय मांगी कि क्या भारत के सभी राज्यों में DGP की नियुक्ति से जुड़े कानून 'प्रकाश सिंह' मामले में तय सिद्धांतों के अनुरूप हैं या नहीं। केंद्र ने झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए एक अर्जी दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि यह नियुक्ति राज्य पुलिस प्रमुख के चयन के लिए केंद्र द्वारा तय प्रक्रिया का उल्लंघन करके की गई थी। केंद्र सरकार ने झारखंड से मांग की है कि वह DGP की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करे और यह घोषित करे कि राज्य के 2025 के नियम के तहत की गई नियुक्तियां गैर-कानूनी हैं। यह चुनौती "झारखंड में पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति संबंधी नियम, 2025" के खिलाफ है, जिसे 8 जनवरी, 2025 को अधिसूचित किया गया था।

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