GST Council ने छीना अफसरों से गिरफ्तारी का अधिकार, मुकदमा सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की

माल एवं सेवा कर परिषद ने 57वीं बैठक में कर अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकार को समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही अभियोजन शुरू करने की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में केवल एक बार ही किया जाएगा।
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर माल एवं सेवा कर परिषद ने बृहस्पतिवार को जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म करने और अभियोजन शुरू करने की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी। वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘कर दरों का ढांचा तय हो चुका है, इसलिए परिषद का ध्यान अब इस बात पर है कि कर व्यवस्था रोजमर्रा में कैसे काम करती है।’’ मंत्रालय ने यह भी कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव अब साल में एक बार ही किया जाएगा। जीएसटी परिषद ने अपनी 57वीं बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों के संबंध में अधिकारियों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है।
यह समिति इस बात की जांच करेगी कि उचित बिल रखने वाले, माल प्राप्त कर चुके और आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर चुके वास्तविक खरीदार को किस तरह संरक्षण दिया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘अधिकारियों की समिति तीन महीने के भीतर अध्ययन पूरी करेगी और अगली परिषद की बैठक में इस एजेंडा को रखा जाएगा’’। जीएसटी परिषद ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार खत्म कर दिया है।
साथ ही अभियोजन शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटा दिया गया है और प्रत्येक मामले में जुर्माना, कारावास या दोनों में से सजा का निर्धारण न्यायिक विवेक पर छोड़ दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि जहां किसी विशेष उल्लंघन के लिए कोई विशिष्ट जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाला सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
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