Supreme Court ने Delhi में गश्त बढ़ाने और सार्वजनिक वाहनों के चालकों के सत्यापन का दिया निर्देश

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शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस और राज्य सरकार को कई कड़े कदम उठाने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने शिक्षण संस्थानों के पास निगरानी तेज करने तथा अवैध शराब की दुकानों पर कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा ऐप आधारित कैब और बसों के चालकों के विवरण यात्रियों को स्पष्ट दिखने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है।

नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने अपराध का पता लगाने और उसकी रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय राजधानी की सरकार को निर्देश दिया है कि वे गश्त बढ़ाएं, खासकर शिक्षण संस्थानों के आसपास। साथ ही न्यायालय ने पुलिस को सार्वजनिक परिवहन वाहनों के चालकों एवं सहायकों का सख्ती से सत्यापन करने का निर्देश दिया। ‘दिल्ली-एनसीआर में दुष्कर्म की हालिया घटनाएं’ शीर्षक वाले स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बिना अनुमति के संचालित शराब की दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली परिवहन विभाग को नोटिस जारी किया तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की। पीठ ने पांच अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक जगहों का रखरखाव, पुलिस की गश्त एवं सख्त निगरानी ​​और सामने आई कमियों को दूर करने की तत्परता भी अपराध की रोकथाम के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। उसने कहा, “ये कदम नागरिकों में भरोसा जगाएंगे और संभावित अपराधियों में डर पैदा करेंगे कि शहर भर में सार्वजनिक जगहों पर प्रभावी ढंग से नजर रखी जा रही है।” पीठ ने समर्पित नियंत्रण कक्ष कमान केंद्रों या ‘वॉर रूम’ के जरिये पुलिस गश्त और सीसीटीवी नेटवर्क की प्रभावी ‘रियल टाइम’ निगरानी के महत्व को भी रेखांकित किया।

उसने कहा कि इन नियंत्रण कक्ष कमान केंद्रों के जरिये जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल एक असरदार जमीनी स्तर की प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी संवेदनशील स्थिति, घटना या कमी का पता चलते ही समय पर बल की तैनाती या हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा सके। पीठ ने कहा, “इसलिए दिल्ली के पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वे इस बारे में संयुक्त रिपोर्ट सौंपें कि क्या राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह के समर्पित नियंत्रण कक्ष कमान केंद्र अभी मौजूद हैं। अगर हां, तो उनकी वास्तविक संख्या क्या है और वे किन-किन इलाकों को कवर करते हैं।” न्यायालय ने कहा कि संयुक्त रिपोर्ट में नियंत्रण केंद्रों को सूचना मिलने के बाद आपातकालीन हस्तक्षेप के लिए वास्तविक समय में समन्वय, संचार और बल की तैनाती के लिए वर्तमान में लागू प्रोटोकॉल का भी जिक्र किया जाएगा।

उसने कहा कि नागरिकों को अपनी शिकायतें बताने और आसपास के इलाकों में आपराधिक या असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। शीर्ष अदालत ने कहा, “इसलिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस काम के लिए नियुक्त अधिकारी की देखरेख में नागरिकों के साथ नियमित बैठकें करने पर विचार करना चाहिए, ताकि शिकायतें सीधे हासिल की जा सकें और उन पर की गई कार्रवाई की प्रभावी निगरानी की जा सके।” पीठ ने कहा कि पुलिसकर्मियों के शुरुआती प्रशिक्षण में ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ (अपराध की रोकथाम से जुड़ी पुलिसिंग) का प्रशिक्षण भी शामिल होना चाहिए और बाद में समय-समय पर होने वाले प्रशिक्षण के जरिये इसे और मजबूत किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा, “सार्वजनिक परिवहन वाहनों-जैसे कि सरकारी और निजी बसों, ओला, उबर, रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं से जुड़ी कैब, टैक्सी, रिक्शा आदि तथा निजी रूप से संचालित कैब, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के चालकों तथा सहायकों का सख्ती से सत्यापन किया जाएगा।” उसने कहा कि केवल विधिवत रूप से पंजीकृत और सत्यापित व्यक्तियों को ही ऐसा वाहन चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

पीठ ने कहा, “‘ऐसे सभी वाहनों में यात्रियों को दिखाई देने वाली जगह पर सत्यापित चालक और सहायक के नाम तथा तस्वीरें प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि यात्री अनधिकृत व्यक्ति के वाहन में होने पर तुरंत उसकी पहचान कर इसकी सूचना दे सके।” उसने कहा कि ऐसी शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक अलग व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, खासकर सरकारी बसों, निजी बसों और ऐप आधारित सेवाओं के तहत पंजीकृत नहीं किए गए कैब तथा रिक्शा के लिए। पीठ ने कहा, “किसी चालक या सहायक की ओर से नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आने पर तत्काल नियामकीय कार्रवाई की जानी चाहिए। इसमें चालक या सहायक को सेवा से निलंबित या बर्खास्त करना तथा संबंधित वाहन को तत्काल प्रभाव से जब्त करना शामिल हो सकता है, लेकिन कार्रवाई इन्हीं तक सीमित नहीं होगी।” उसने कहा कि उन भोजनालयों और प्रतिष्ठानों पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां गैर-कानूनी तरीके से शराब परोसी जा रही है।

पीठ ने कहा, “बीट अधिकारी इस संबंध में सतर्क रहें और ऐसे मामलों की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दें। इसके अलावा, बीट अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि शराब की दुकानों के आसपास बेवजह घूम रहे, भीड़ लगा रहे या जमा हुए लोगों को तुरंत वहां से हटाया जाए, ताकि लोगों को परेशानी न हो और पैदल चलने वालों की आवाजाही में कोई रुकावट न पैदा हो।” उसने कहा कि ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को पुलिस की शक्तियों के मनमाने या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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