Supreme Court ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार Milan Pradhan की अंतरिम जमानत में दखल से किया इनकार

Supreme Court ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार Milan Pradhan की अंतरिम जमानत में दखल से किया इनकार
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शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को कलकत्ता उच्च न्यायालय से मिली अंतरिम राहत को बरकरार रखा है। न्यायालय ने राज्य सरकार को यह छूट दी है कि यदि आरोपी नेता जमानत बढ़ाने का अनुरोध करते हैं तो वह उच्च न्यायालय में अपनी बात रख सकती है। उच्च न्यायालय ने प्रचार और मतगणना में शामिल होने के लिए 20 अक्टूबर तक यह अंतरिम जमानत दी थी।

(फाइल फोटो के साथ जारी) नयी दिल्ली, सात अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से बुधवार को इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार को यह छूट दी कि यदि प्रधान अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हैं, तो वह उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें रख सकती है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

उच्चतम न्यायालय ने 30 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने गौर किया कि उच्च न्यायालय ने प्रधान को चुनाव प्रचार करने और मतगणना में हिस्सा लेने की अनुमति देने के सीमित उद्देश्य से 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव छह अक्टूबर को हुआ था और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

प्रधान 18 सितंबर को नंदीग्राम थाने में दर्ज चार मामलों और खेजुरी थाने में दर्ज दो अन्य मामलों के सिलसिले में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में थे। उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2007 में नंदीग्राम में पुलिस गोलीबारी में 14 लोगों की मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। प्रधान के वकील ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा था कि कांग्रेस उम्मीदवार को 15 सितंबर को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

अधीनस्थ अदालत ने इनमें से एक मामले में उन्हें सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और उन्होंने अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था।

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