कावेरी जल विवाद: किसानों के विरोध के बावजूद कर्नाटक से द्विपक्षीय वार्ता के पक्ष में तमिलनाडु के सीएम विजय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक के साथ द्विपक्षीय बातचीत करने के पक्ष में हैं। हालांकि, राज्य के किसान संगठनों और विपक्षी दल द्रमक ने इस प्रस्तावित वार्ता का कड़ा विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। राज्य के डेल्टा जिलों में भीषण जल संकट के बीच किसान कानूनी विकल्प तलाशने की मांग कर रहे हैं।
चेन्नई, 28 जुलाई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी नदी जल बंटवारा विवाद के हल के लिए पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के पक्ष में हैं, हालांकि किसान संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित वार्ता को रद्द करने की मांग की है। एक आधिकारिक सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। राज्य में, विशेषकर कावेरी डेल्टा के तंजावुर, तिरुवरुर और नागपट्टिनम जिलों में भीषण जल संकट है।
इससे अल्पावधि की कुरुवई धान की फसल प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, जलाशय में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण परंपरागत रूप से 12 जून को मेट्टूर बांध को खोले जाने का कार्यक्रम भी टालना पड़ा। ऐसे में किसानों ने राज्य सरकार से कर्नाटक के साथ बातचीत करने के बजाय कानूनी विकल्प तलाशने की मांग की है।
सोमवार को राज्य के कृषि मंत्री आर. विनोथ के साथ हुई परामर्श बैठक में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित वार्ता रद्द करने की मांग की। तमिलनाडु कावेरी किसान संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रत्यक्ष बातचीत स्थापित कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करेगी और उच्चतम न्यायालय के फैसले के विपरीत होगी। वहीं, विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमक), जिसने द्विपक्षीय वार्ता का कड़ा विरोध किया है, उसने राज्य सरकार से कावेरी जल विवाद के समाधान के लिए एक विशेष अधिकरण गठित कराने और तमिलनाडु को उसके हिस्से का कावेरी जल दिलाने के लिए प्रयास करने की मांग की है।
उच्चतम न्यायालय ने अपने 2018 के ऐतिहासिक फैसले में कावेरी जल बंटवारे के क्रियान्वयन और उसकी निगरानी के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति का गठन किया था। एक जून से 22 जुलाई, 2026 के बीच तमिलनाडु को 31 टीएमसी फुट (31 अरब घन फुट) पानी मिलना चाहिए था, लेकिन उसे केवल 3.5 टीएमसी फुट पानी ही प्राप्त हुआ।
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