E20 Petrol के खिलाफ Tehseen Poonawalla की मुहिम, Gadkari के पुराने वीडियो से US Policy को लेकर सरकार को घेरा

पूनावाला ने गडकरी को तुरंत पद से हटाने की मांग करते हुए ट्वीट किया, इस व्यक्ति ने अमेरिका से इथेनॉल स्टैंडर्ड पॉलिसी को कॉपी-पेस्ट किया।
E20 पेट्रोल को लेकर विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया, जब एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक वीडियो शेयर किया और सरकार पर अमेरिका से इथेनॉल स्टैंडर्ड्स को कॉपी-पेस्ट करने का आरोप लगाया। E20 पेट्रोल के खिलाफ़ अभियान चला रहे पूनावाला ने कहा कि गडकरी का भाषण अदालतों में उनके उस दावे के उलट था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इथेनॉल प्रोग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है। पूनावाला ने गडकरी को तुरंत पद से हटाने की मांग करते हुए ट्वीट किया, इस व्यक्ति ने अमेरिका से इथेनॉल स्टैंडर्ड पॉलिसी को कॉपी-पेस्ट किया। उन्होंने कोर्ट से झूठ बोला कि इथेनॉल से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें जल्द से जल्द पद से हटाया जाना चाहिए।" पुनावाला और उनकी 'टीम भारत' ने E20 पेट्रोल - जिसमें 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल का मिश्रण होता है। उसको वापस लेने की मांग की है, क्योंकि देश में गाड़ियों पर इसके असर को लेकर बहस चल रही है।
वीडियो में नितिन गडकरी क्या कह रहे हैं?
पूनावाला द्वारा शेयर किए गए बिना तारीख वाले वीडियो में गडकरी भारत में विभागों द्वारा स्टैंडर्ड तय करने में लगने वाले लंबे समय पर अफ़सोस जताते हुए दिख रहे हैं। गडकरी कहते हैं, उन्हें कम से कम 3-4 साल लग जाते हैं। मैं इससे परेशान हो गया था। हमें इथेनॉल के लिए स्टैंडर्ड तैयार करने थे। इसके बाद मंत्री उस तुरंत समाधान के बारे में बताते हैं जो उन्होंने अधिकारियों को रिसर्च में पाँच साल बर्बाद करने के बजाय अपनाने का सुझाव दिया था। मंत्री कहते हैं एक दिन मैंने कहा, अपनी रिसर्च अपने पास ही रखो। अगर यह अमेरिकी कानून है, तो ऊपर से हेडर हटाओ, हमारी डिटेल्स डालो, हमारी मुहर लगाओ, ज़रूरी सुधार करो और इसे घोषित कर दो।
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उन्होंने अपने इस आदेश के पीछे की वजह भी बताई और कहा कि काम पूरा करने के लिए उनके पास सिर्फ़ पाँच साल हैं। गडकरी वीडियो में कहते हैं अमेरिका निश्चित रूप से हमसे बेहतर होगा और यूरोप तो हमसे भी बेहतर होगा। वे भी सुरक्षा के बारे में सोचते होंगे, शायद हमसे कहीं ज़्यादा। वे आगे कहते हैं मैं पाँच साल के लिए मंत्री रहूँगा... मुझे इन पाँच सालों में ही काम पूरा करना है। अगर सिर्फ़ स्टैंडर्ड तय करने में ही पाँच साल लग जाएँगे, तो असल में काम कब होगा? हालाँकि, साथ ही गडकरी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार "सुरक्षा से कोई समझौता नहीं" करेगी।
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