ताइवान की राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में शामिल हुए भाजपा के दो सांसद, चीन को लगी मिर्ची

ताइवान की राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में शामिल हुए भाजपा के दो सांसद, चीन को लगी मिर्ची

भारत के ऐतराज के बावजूद पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में अलग-अलग गतिविधियां करता रहता है। इतना ही नहीं, जब भारत का कोई राजनेता अरुणाचल प्रदेश का दौरा करता है तो इससे चीन की बौखलाहट बढ़ जाती है। आज वही चीन भारत को उपदेश देने की कोशिश कर रहा है।

भारत और चीन के संबंधों में इन दिनों काफी खटास दिख रही है। लेह-लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई की भी खबरें आई थी। हालांकि भारत चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की कोशिश कर रहा है। कूटनीतिक तौर पर चीन को भारत आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में देश की सत्तासीन पार्टी भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग-वेन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। चीन को जैसे ही इस बात की खबर मिली वह तिलमिला उठा। उसने भारत को अपने आंतरिक मामलों में दखल न देने की सलाह भी दे डाली। ताइवान की राष्ट्रपति का बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह का कार्यक्रम था। नई दिल्ली से भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी और राजस्थान के चूरू से सांसद राहुल कासवान ने इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत की थी। दोनों नेताओं ने भारत की ओर से ताइवान के राष्ट्रपति को बधाई दी।

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आपको बता दें कि ताइवान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में 48 देशों के 92 हस्तियों ने शिरकत की थी। भारत के 2 सांसदों के अलावा अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब चीन ने भारतीय सांसदों के ताइवान के कार्यक्रम में शामिल होने पर लिखित एतराज जताया है। नई दिल्ली में चीनी राजदूत की काउंसलर लिउ बिंग ने लिखित तौर पर आपत्ति जताते हुए भारत से अपने आंतरिक मामलों में दखल देने से बचने को कहा है। चीन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ताइवान की राष्ट्रपति को बधाई देना बिल्कुल गलत है। हालांकि भाजपा सांसद का कासवान ने ताइवान के कार्यक्रम में शामिल होने पर अपना रुख रखा है और कहा है कि उनका यह कदम भारत के नीति के अनुरूप ही था।

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अपना तर्क रखते हुए चीनी राजनयिक ने कहा कि एक चीन सिद्धांत यूएन चार्टर और उसके कई प्रस्तावों में मान्य है। यही अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आमतौर पर एक मानक का काम करता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस पर मोटे तौर पर सर्वसम्मति भी है। ऐसे में भारत को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। हालांकि आधिकारिक तौर पर भारत की सरकार इस समारोह में शामिल नहीं हुई थी लेकिन सिर्फ दो सांसदों की मौजूदगी से चीन को मिर्ची लग गई है और उसने उसी दिन ऐतराज भी जता दिया। अपनी शिकायतों में चीन ने इन दोनों सांसदों का नाम तो नहीं लिया है लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका देश उम्मीद करता है कि हर कोई 'ताइवान की आजादी के लिए चलाई जा रहीं अलगाववादी गतिविधियों' का चीन के लोगों द्वारा विरोध का समर्थन करेगा और राष्ट्रीय एकीकरण को समझेगा। 

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इस बीच चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कभी अरुणाचल तो कभी लद्दाख में वह भारतीय सेना से टकराने की कोशिश करता रहा है। चीन फिलहाल लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में टेंट लगा रहा है। जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से अपने संविधान के तहत अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को बदला तो चीन ने गैर जरूरी टिप्पणियां की थी। लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के फैसले से वह चिढा हुआ है। भारत के ऐतराज के बावजूद पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में अलग-अलग गतिविधियां करता रहता है। इतना ही नहीं, जब भारत का कोई राजनेता अरुणाचल प्रदेश का दौरा करता है तो इससे चीन की बौखलाहट बढ़ जाती है। आज वही चीन भारत को उपदेश देने की कोशिश कर रहा है।





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