UP के 18 शहरों में दौड़ेंगी 1,725 AC Electric Buses, कैबिनेट ने दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में 18 प्रमुख शहरों के लिए 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। यह परियोजना ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर 12 वर्षों के अनुबंध के तहत संचालित होगी। निजी ऑपरेटर बसों के रखरखाव और संचालन का जिम्मा संभालेंगे, जबकि सरकार किराया निर्धारित करेगी।
लखनऊ, नौ अक्टूबर उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। एक बयान के अनुसार, योजना का उद्देश्य शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में ये बसें चलेंगी। योजना के तहत लखनऊ और कानपुर में 300-300, वाराणसी में 250, गोरखपुर में 150 तथा आगरा, गाजियाबाद, मेरठ और नोएडा में 100-100 बसें चलाई जाएंगी। अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में 50-50, जबकि अलीगढ़, बरेली, फिरोजाबाद, झांसी, मुरादाबाद, शाहजहांपुर और सहारनपुर में 25-25 बसें चलाई जाएंगी।
इन बसों के अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने से 12 वर्ष होगी। जीसीसी मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग उपकरणों की व्यवस्था, चालकों एवं तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। किराया सरकार तय करेगी, जबकि ऑपरेटरों को निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
सरकार ने 12 मीटर लंबी प्रत्येक बस के लिए 40 लाख रुपये और नौ मीटर लंबी बस के लिए 35 लाख रुपये का अनुदान देने का निर्णय लिया है। डिपो निर्माण के लिए संबंधित नगर निगम और नोएडा प्राधिकरण जमीन निःशुल्क उपलब्ध कराएंगे। सरकार के अनुसार, निजी निवेश से सरकारी खर्च का बोझ कम होगा और परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
बसों की खरीद में निर्धारित नीति के तहत उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है, जिससे स्थानीय उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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