Fake Claim पर भड़की Virat Kohli Team, Premanand Maharaj आश्रम विवाद पर दिया जवाब

विराट कोहली की टीम ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के लिए 5 करोड़ रुपये लेने के दावे को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कोहली अपनी गहरी आस्था और सम्मान के कारण महाराज जी से मिलने जाते हैं। यह आरोप फलाहारी महाराज ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में लगाया था।
विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के लिए 5 करोड़ रुपये नहीं मिले; उनके आधिकारिक प्रवक्ता ने इस दावे को पूरी तरह से झूठा, बेबुनियाद और तथ्यों के हिसाब से गलत बताया है। बयान में कहा गया कि विराट कोहली, महाराज जी के प्रति अपनी गहरी आस्था और सम्मान के कारण ही उनसे मिलने जाते हैं। हम इन दावों का पुरज़ोर खंडन करते हैं और मीडिया से आग्रह करते हैं कि वे ऐसी बातों को रिपोर्ट करने या फैलाने से पहले सावधानी बरतें, तथ्यों की जांच करें और समझदारी से रिपोर्टिंग करें।
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यह दावा 'फलाहारी महाराज' के नाम से मशहूर दिनेश शर्मा ने किया, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष हैं। खबरों के मुताबिक, यह आरोप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे एक पत्र में लगाया गया था। इसमें कहा गया था कि राजस्थान की एक प्राइवेट कंपनी ने कथित तौर पर कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक लाने के लिए 5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने जनवरी 2023 में अपनी बेटी वामिका के साथ पहली बार वृंदावन में उनके आश्रम का दौरा किया था। इस कपल ने 2025 में और उसी साल मई में टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद प्रेमानंद महाराज से दोबारा मुलाकात की।
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अपनी एक मुलाकात में प्रेमानंद महाराज ने विराट और अनुष्का को जिंदगी के गहरे मायने समझाए। आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि अपने काम को सेवा समझें, गंभीर आचरण रखें, विनम्र रहें और भगवान का नाम जपें। आपके दिल में हमारे सच्चे पिता, सर्वोच्च व्यक्ति के दर्शन करने की इच्छा होनी चाहिए। कोहली के टेस्ट संन्यास के बाद एक अन्य बैठक में, प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि ये वैभव मिलना कृपा नहीं है, ये पुण्य है। भगवान की क्रिया मानी जाती है अंदर का चिंतन बदलना। बिल्कुल ऐसे ही रह जैसे रह रहे हो बिल्कुल संन्यासी बन कर रहो, लेकिन अंदर का चिंतन आपका बदल जाएगा, उसमें यश की भावना ना रह। जये। अंदर का चिंतन ये रहना चाहिए कि 'प्रभु बहुत जन्म व्यतीत हो गया अब मुझे आप चाहिए।'
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