विपक्षी दलों पर बरसीं रीता बहुगुणा जोशी, बोलीं- हम मूलरूप से विकास की बात करेंगे, हमारा मुख्य लक्ष्य ही विकास है

विपक्षी दलों पर बरसीं रीता बहुगुणा जोशी, बोलीं- हम मूलरूप से विकास की बात करेंगे, हमारा मुख्य लक्ष्य ही विकास है

भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने साफ तौर पर कहा कि विपक्ष इस समय घबराया और बौखलाया हुआ है। वह यह सोच रहा है कि कैसे किस जाति और समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करें। लेकिन अब आप जनता को बेवकूफ नही बना सकते है हमारी जनता बहुत जागरूक हो चुकी है और ऐसे लोगों को अच्छे से जवाब देगी।

वाराणसी। वाराणसी में टीएफसी द्वारा आयोजित हुए दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में भाजपा की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी ने शिरकत की। इस दौरान रीता बहुगुणा ने विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला बोला। रीता बहुगुणा ने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर ही विपक्ष चुनाव लड़ने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने साफ तौर पर यह भी कहा कि हम लोग विकास के मुद्दे को लेकर ही मैदान में उतरेंगे, लेकिन अगर राम मंदिर बन रहा है तो उसकी भी चर्चा जरूर करेंगे। हम मूलरूप से सिर्फ विकास, विकास और सिर्फ विकास की ही बात करेंगे। हमारा लक्ष्य ही विकास है।  

इसे भी पढ़ें: चुनाव में हिन्दू और हिंदुत्व का दिखावा करते हैं राहुल गांधी: भाजपा सांसद मनोज तिवारी 

उन्होंने आगे बात करते हुए कहा मोदी और योगी ने जो करिश्मे किए हैं वह हमारे मुख्य आधार है। रीता बहुगुणा जोशी ने साफ तौर पर कहा कि विपक्ष इस समय घबराया और बौखलाया हुआ है। वह यह सोच रहा है कि कैसे किस जाति और समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करें। लेकिन अब आप जनता को बेवकूफ नही बना सकते है हमारी जनता बहुत जागरूक हो चुकी है और ऐसे लोगों को अच्छे से जवाब देगी। इसके साथ ही राशिद अल्वी के बयान पर रिता बहुगुणा जोशी ने कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक है और संवेदनहीन है। किसी भी धर्म या धर्मावलंबियों पर कुठाराघात करना यह हमारे लोकतंत्र में परमिशन लेबल नहीं है और राशिद अल्वी जी ने यह बात कैसे कही यह मुझे बड़ा आश्चर्यजनक लगा। 

इसे भी पढ़ें: 300+ पार का नारा लेकर चुनावी अभियान की रणनीति बनाएंगे गृहमंत्री अमित शाह 

बहुगुणा जोशी ने आगे बताया की हिंदी को राजभाषा का दर्जा संविधान ने दिया है। हमारी सरकार ने निरंतर संविधान के अनुसार राजभाषा का हमारे कार्यों में 100 फीसदी पालन किया जाए इसबात पर हिंदी के संवर्धन के लिए और उसके महत्व को बताने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। महात्मा गांधी ने स्वयं यह कहा था कि जिस देश की अपनी राजभाषा ना हो वह देश गूंगा होता है तो राजभाषा को लेकर के हिंदी को जो संविधान में जगह मिली है उस हिंदी के लिए भविष्य में और क्या करने की आवश्यकता है। इन्ही सब बातों को लेकर के इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।