तांडव मचा रहे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कानूनी लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है

  •  प्रो. सुधांशु त्रिपाठी
  •  जनवरी 21, 2021   13:31
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तांडव मचा रहे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कानूनी लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है

तांडव वेब सीरीज विवाद के वातावरण में एक प्रश्न साफ तौर पर उठता है कि हिंदु जाति या हिंदू धर्म को आहत करने से इस वेब निर्देशक अली अब्बास जफर या ऐसे कलाकारों या ऐसे अन्य मुसलमानों को तथा इसी प्रकार के कुछ अन्य लोगों को क्या मिलता है।

तांडव वेब सीरीज और अन्य कई ऐसी सीरीजों ने हिंदू धर्म की आस्था और धार्मिक भावनाओं को एक बार फिर जानबूझ कर चोट पहुंचायी है। इस सीरीज में भगवान शिवजी को एक अत्याधुनिक पुरूष के रूप में आड़ी तिरछी रेखाओं का चेहरा बनाये हुए दिखाया गया है जिसमें उनके मजाक उड़ाने की बात किसी से छिपी नहीं है। सभी जानते हैं कि भगवान शिवजी का स्थान हिंदू धर्म में स्वीकार किये गये एकमात्र पूर्ण, सर्वशक्तिमान, सर्वव्याप्त एवं अविनाशी ब्रह्म के तीन रूपों- अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश या शिव में से एक तथा उन्हीं के समान सर्वोच्च एवं पवित्रतम है। हिंदू धर्म के अनुसार तीनों ईश्वर एक ही ब्रह्म के तीन रूप हैं जहाँ सृष्टि के निर्माणकर्ता ब्रह्माजी, पालनकर्ता विष्णुजी तथा संहारकर्ता शिवजी अनादि काल से स्थापित हैं। अतः भारत तथा संपूर्ण विश्व में रह रहे लाखों करोड़ों हिंदुओं की कालातीत आस्था के प्रतीक ऐसे सर्वोच्च एवं सर्वशक्तिमान पूर्ण ब्रह्म को एक साधारण नाटकीय रूप में दिखाना निश्चय ही उनका मजाक उड़ाना तथा उन आस्थावान हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं पर गंभीर कुठाराघात करना नहीं है तो और क्या है। इसी प्रकार से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई अन्य वेब सीरीज दिखाई जा रही हैं जिनमें अभद्रता और अश्लीलता का नंगा नाच दर्शकों को दिखाया जा रहा है जिनका लक्ष्य कहीं न कहीं हिंदुओं की सामाजिक व्यवस्था तथा धार्मिक कर्मकाण्ड आदि का उपहास करना ही होता है।

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लगभग दो दशक पहले देश के एक तथाकथित प्रख्यात चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ने हिंदू धर्म के अनुसार विद्या एवं संगीत की देवी माँ सरस्वती का अभद्र चित्र दिखा कर हिंदू धर्म की भावनाओं को आहत किया था। उनके अन्य कुछ चित्रों में भी इसी प्रकार का हिंदू धर्म विरोधी विद्रूप चित्रण देखा गया था जिसका जनता ने पुरजोर विरोध किया था। जैसा देखा जा रहा है कि पिछले कई वर्षों से देश की फिल्म इंडस्ट्री और अन्य मीडिया जगत, जिसमें प्रिंट मीडिया भी शामिल है, इसी प्रकार फिल्मों के माध्यम से या मनोरंजनकारी कार्यक्रमों/ सीरीयल्स द्वारा हिंदू धर्म को नीचा दिखाने और हिंदुओं को अपमानित करने का कार्य करते आ रहे हैं। अभी कुछ महीने पहले रिलीज हुई फिल्म मिर्जापुर में भी एक ब्राह्मण को बहुत बुरा दिखाया गया है जबकि इसके विपरीत दूसरे मुसलमान को बहुत अच्छा प्रदर्शित किया गया है। ऐसा ही परिदृश्य पूर्व की कई फिल्मों में भी दिखाया गया था जहाँ एक मंदिर का हिंदू पुजारी बहुत भ्रष्ट और चरित्रहीन होता है जबकि वहीं एक मौलवी बेहद चरित्रवान और हर प्रकार से पाक साफ दिखलाया जाता है। वस्तुतः अच्छाई और बुराई सभी के अंदर होती है जोकि सामान्य मानव स्वभाव होता है और इसका किसी धर्म विशेष से कोई संबध नहीं है।  

ऐसे वातावरण में एक प्रश्न साफ तौर पर उठता है कि हिंदु जाति या हिंदू धर्म को आहत करने से इस वेब निर्देशक अली अब्बास जफर या ऐसे कलाकारों या ऐसे अन्य मुसलमानों को तथा इसी प्रकार के कुछ अन्य लोगों को क्या मिलता है। इन लोगों का हिंदुओं ने क्या नुकसान किया है जिस वजह से ये लोग हिंदू धर्म से नफरत करते हैं और हिंदुओं से बैर रखते हैं। सभी जानते हैं कि हिंदू बेहद शांत तथा सभी को गले लगाने में विश्वास करते हैं जिस कारण आक्रमणकारी तथा अशांत किस्म के लोग उन्हें कायर तथा अकर्मण्य कहते रहे हैं। निःसंदेह हिंदुओं के प्रति ऐसी धारणा देश और समाज के लिये विभाजनकारी है जो हिंदुओं में भी प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे रही है। यद्यपि इस विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी है जिसके अनुसार इस वेब सीरीज को जानबूझ कर विवादित करना तथा इसके द्वारा दर्शकों में उत्सुकता बढ़ा कर ज्यादा से ज्यादा कमाई करना है तथा विरोध किये जाने पर एक लाईन की माफी मांग लेना है जैसा कि इस तांडव के विवाद में भी हुआ है क्योंकि ओटीटी पर प्रदर्शन के संबध में न कोई सेंसर बोर्ड का कैंची है न ही भारत सरकार का कोई दंडात्मक प्रावधान है जिससे ऐसे कार्यक्रमों के निर्माता, निर्देशक और कलाकार डरें और इस प्रकार के वैमनस्य को पैदा कर मुनाफा कमाने का घोर आपराधिक कृत्य कदापि न करें।

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अतः देश में ओटीटी पर ऐसे वेब सीरीजों के प्रदर्शन के संबंध में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्मित दिशा-निर्देशों एवं कठोर कानूनों की तत्काल आवश्यकता है जिससे कोई भी व्यक्ति या समुदाय इस प्रकार के अश्लील चित्रण या प्रदर्शन द्वारा किसी समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात कदापि न कर सके, जिससे भारतीय समाज में अभद्रता फैले और सामाजिक सौहार्द को खतरा पैदा हो या फिर इन कारणों से अकारण ही अशांति का तांडव शुरू हो जाये तथा देश की सामाजिक संस्कृति को गंभीर चोट पहुँचे।

-प्रो. सुधांशु त्रिपाठी

आचार्य- राजनीति विज्ञान

उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय

प्रयागराज, उ0प्र0।







अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रही उत्तर प्रदेश कांग्रेस को राहुल ने दिया बड़ा झटका

  •  अजय कुमार
  •  फरवरी 25, 2021   11:33
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अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रही उत्तर प्रदेश कांग्रेस को राहुल ने दिया बड़ा झटका

प्रियंका वाड्रा इधर कुछ दिनों से मिशन-2022 को लेकर प्रदेश में काफी सक्रिय नजर आ रही थीं, लेकिन अब राहुल के बयान के चलते प्रियंका बैकफुट पर आ गई हैं। कांग्रेसी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि वह राहुल गांधी के नासमझी वाले बयान का कैसे बचाव करें।

उत्तर भारत के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश ने जिस नेहरू-गांधी परिवार को ‘पाला-पोसा' और देश की सियासत में उसे सत्ता की सीढ़ियां तक चढ़ाया। यूपी के बल पर ही कांग्रेस ने दशकों तक देश पर राज किया। इतना ही नहीं यूपी की बदौलत ही इस खानदान से देश को तीन-तीन प्रधानमंत्री मिले। नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य ऐसा नहीं होगा जो उत्तर प्रदेश से चुनाव जीत कर सांसद नहीं बना हो, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी की जनता ने क्या नकारा, राहुल बाबा उसी प्रदेश की जनता की समझ पर सवाल खड़े करने लगे हैं। अपने नये संसदीय क्षेत्र वायनाड में राहुल गांधी ने उत्तर भारतीयों के लिए ऐसा कुछ कह दिया कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने दिल्ली से यूपी-बिहार तक में उनके खिलाफ ‘तलवारें’ खींच लीं। निश्चित ही राहुल के विवादित बयान से उनके मिशन 2022 को बड़ा झटका लग सकता है। राहुल गांधी ने यूपी चुनावों में कांग्रेस की वापसी के लिए प्रियंका वाड्रा को राज्य का प्रभारी बनाया था। प्रियंका वाड्रा इधर कुछ दिनों से मिशन-2022 को लेकर प्रदेश में काफी सक्रिय नजर आ रही थीं, लेकिन अब राहुल के बयान के चलते प्रियंका बैकफुट पर आ गई हैं। कांग्रेसी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि वह राहुल गांधी के नासमझी वाले बयान का कैसे बचाव करें।

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दरअसल, राहुल को इस बात का अफसोस है कि जिस उत्तर प्रदेश से वह 15 वर्षों तक सांसद रहे, वहां लोग मुद्दों की सतही राजनीति करते हैं। केरल में अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे पर गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तिरुवनंतपुरम में एक सभा में कहा, ''पहले के 15 साल मैं उत्तर भारत से सांसद था। मुझे वहां दूसरी तरह की राजनीति का सामना करना पड़ता था। यहां के लोग मुद्दों की राजनीति करते हैं और सिर्फ सतही नहीं, बल्कि मुद्दों की तह तक जाते हैं। राहुल का यह बयान सुर्खियों में आते ही भारतीय जनता पार्टी हमलावर हो गई। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड़डा ने ट्वीट किया, ‘कुछ ही दिन पहले वह (गांधी) पूर्वोत्तर में थे, देश के पश्चिमी भाग के खिलाफ जहर उगल रहे थे। आज दक्षिण में वह उत्तर के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। जेपी नड्डा ने कहा कि बांटो और राज करो की राजनीति अब नहीं चलने वाली है, इसी लिए राहुल गांधी को लोगों ने खारिज कर दिया है।

उधर, राहुल गांधी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निशाना साधते हुए ट्वीट किया, 'राहुल जी, सनातन आस्था की तपस्थली केरल से लेकर प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली उत्तर प्रदेश तक सभी लोग आपको समझ चुके हैं। विभाजकारी राजनीति आपका राजनीति संस्कार है। हम उत्तर या दक्षिण में नहीं, पूरे भारत को माता के रूप में देखते हैं। एक अन्य ट्वीट में सीएम योगी ने राहुल को संबोधित करते हुए लिखा- श्रद्धेय अटल जी ने कहा था कि भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्र पुरूष है। कृपया आप इसे अपनी ओछी राजनीति की पूर्ति के लिए ‘क्षेत्रवाद‘ की तलवार से काटने का कुत्सित प्रयास न करें। भारत एक था एक है, एक ही रहेगा।

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अमेठी में राहुल गांधी को हार का स्वाद चखाने वाली भाजपा सांसद और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी राहुल गांधी के बयान से काफी आहत हैं। उन्होंने राहुल पर तंज कसते हुए उन्हें एहसान फरामोश बताया। स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल जिस उत्तर भारत पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि सोनिया गांधी भी यहां से ही सांसद हैं। स्मृति ने कहा कि अगर उत्तर भारत के लोगों के प्रति हीन भावना है, तो ये उत्तर भारत में क्यों राजनीति कर रही हैं। प्रियंका वाड्रा ने अभी तक राहुल के बयान का खंडन क्यों नहीं किया। अमेठी की सांसद स्मृति ईरानी ने कहा कि गांधी परिवार जब फिर से अमेठी लौटेगा, तो उन्हें इस बात का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस उत्तर भारत का अपमान कर रहे हैं, वो भूल रहे हैं कि उसी इलाके से उनकी माता सोनिया गांधी भी सांसद हैं, ऐसे में राहुल गांधी ने जो बात कही, वो माफ करने लायक ही नहीं है। स्मृति ईरानी ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अमेठी की जनता का अपमान है। अमेठी की जनता मेरा परिवार है और मेरे परिवार का अपमान करके माफी से काम नहीं चलता। उन्होंने कहा कि जब गांधी परिवार अमेठी आएगा, तब उन्हें अमेठी की जनता अपने अपमान का करारा जवाब देगी। उन्होंने कि राहुल गांधी को अमेठी की जनता ने नकार दिया तो वे वायनाड पहुंचे और वहां पहुंच कर अमेठी की जनता का अपमान कर रहे हैं। बता दें कि ईरानी ने पिछले आम चुनाव में गांधी को उनके पारिवारिक गढ़ माने जाने वाली अमेठी में हराया था, लेकिन वह केरल में वायनाड से जीत गए थे।

राहुल गांधी ने उत्तर भारतीयों को लेकर ऐसे समय में बयान दिया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में एक वर्ष का समय शेष बचा है। राहुल के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है। बीजेपी ही नहीं राहुल के बयान से यूपी में कांग्रेस की वापसी के लिए मेहनत कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी काफी नाराजगी है। कांग्रेसी खुलकर कह रहे हैं कि राहुल के इस तरह के बयानों से कांग्रेस के मिशन-2022 को करारा झटका लग सकता है।

-अजय कुमार







भारत और सऊदी अरब के बीच पहले युद्धाभ्यास की शुरुआत के गहरे हैं निहितार्थ

  •  कमलेश पांडेय
  •  फरवरी 24, 2021   14:57
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भारत और सऊदी अरब के बीच पहले युद्धाभ्यास की शुरुआत के गहरे हैं निहितार्थ

2020 के दिसम्बर में भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने सऊदी अरब का दौरा किया था। यह पहली बार था जब किसी भारतीय सेना प्रमुख ने भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संबंधों का एक स्पष्ट संकेत देते हुए पश्चिम एशियाई देश का दौरा किया था।

भारत और सऊदी अरब के बीच प्रगाढ़ होते जा रहे द्विपक्षीय सम्बन्धों का ही यह नतीजा है कि वर्ष 2021 में पहली बार दोनों देश युद्धाभ्यास करने जा रहे हैं। यह भारत व सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रक्षा सम्बन्धों और अन्य क्षेत्रों में भी विकसित हो रहे विश्वास परक सहयोग संबंधों के नतीजे हैं, जिससे एशिया में भारत की स्थिति और मजबूत होगी, वहीं सऊदी अरब की स्थिति भी एशिया व यूरोप में मजबूत होगी।

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गौरतलब है कि भारतीय और सऊदी अरब की सेनाएं पहली बार संयुक्त द्विपक्षीय अभ्यास करेंगी। खास बात यह है कि इतिहास में इन दोनों देशों के बीच यह पहला युद्धाभ्यास होगा। आपको यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि इससे पहले सऊदी अरब अपनी सेना को युद्ध की बारीकियां सिखाने के लिए पाकिस्तान और अमेरिका के भरोसे रहता था। लेकिन अब भारत की तरफ सऊदी अरब का बढ़ता झुकाव वैश्विक बिरादरी में उसके बढ़ते कद को अभिव्यक्त करता है। अभी सऊदी अरब की सेना भारत की यात्रा करके यहां युद्धाभ्यास करेगी, जबकि अगले वित्त वर्ष में होने वाले अभ्यासों के लिए भारतीय सेना सऊदी अरब की यात्रा करेगी। 

गौरतलब है कि 2020 के दिसम्बर में भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने सऊदी अरब का दौरा किया था। यह पहली बार था जब किसी भारतीय सेना प्रमुख ने भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ते संबंधों का एक स्पष्ट संकेत देते हुए पश्चिम एशियाई देश का दौरा किया था। तब द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई थी। अपनी सऊदी अरब यात्रा के दौरान सेना प्रमुख नरवणे ने रॉयल सऊदी लैंड फोर्स के मुख्यालय, संयुक्त बल कमान मुख्यालय और किंग अब्दुल अजीज सैन्य अकादमी का दौरा किया था। तब उन्हें रॉयल सऊदी लैंडफोर्स के मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने रॉयल सऊदी के कमांडर जनरल फहद बिन अब्दुल्ला मोहम्मद अल-मुतीर से भी मुलाकात करके द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा की थी। इसके बाद उन्होंने संयुक्त बल सऊदी अरब के लेफ्टिनेंट जनरल मुतलाक बिन सलीम बिन अल-अजीमा कमांडर के साथ बातचीत की और रक्षा सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। तब जनरल नरवणे के साथ गए प्रतिनिधिमंडल और उनकी पत्नी वीना नरवणे ने भी ऑल वीमेन सेंटर रियाद सऊदी अरबिया का दौरा किया। उनकी इस यात्रा से रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई गई थी।

आपको यह स्पष्ट कर दें कि सऊदी अरब, भारत को 'विज़न 2030' के तहत किंगडम के रणनीतिक साझेदार देशों में से एक के रूप में पहचान देता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच जुड़ाव बढ़ा है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी परिषद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। फरवरी 2019 में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने नई दिल्ली का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान प्रिंस ने भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के निवेश की घोषणा की थी। दोनों देशों के बीच घनिष्ठ हो रहे संबंधों के नतीजे अब भारतीय और सऊदी अरब की सेनाओं के पहली बार संयुक्त द्विपक्षीय अभ्यास करने का कार्यक्रम बनने से दिखने लगे हैं। 

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भारत-सऊदी अरब के बीच प्रगाढ़ होते सैन्य व अन्य सम्बन्धों से एक तरफ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, बंगलादेश, मालदीव, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, इंडोनेशिया आदि देशों की मानसिकता भारत के प्रति बदलेगी। वहीं, चीन, रूस, इंग्लैंड, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, आशियान देश समूह व ब्राजील आदि साधन संपन्न देशों में भी भारत की सूझबूझ के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा। वैश्विक दुनियादारी में भारत के बढ़ते कद और उसे संतुलित रखने के लिहाज से भी सऊदी अरब के साथ हमारे प्रगाढ़ होते रिश्ते के अपने खास मायने हैं, जिसे समझने व समझाने की जरूरत है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर सतर्क है भारत !

  •  डॉ. वेदप्रताप वैदिक
  •  फरवरी 23, 2021   14:48
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रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर सतर्क है भारत !

भारत की चिंता यह है कि अफगानिस्तान के बहाने रूस-पाक फौजी-सहकार जोरों से बढ़ रहा है। अभी-अभी अफगानिस्तान पर रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने इस्लामाबाद-यात्रा की है। दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई तो यह है कि अफगान-समस्या को हल करने में भारत की भूमिका नगण्य है।

भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला अभी-अभी मास्को होकर आए हैं। कोविड के इस भयंकर माहौल में हमारे रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और विदेश सचिव को बार-बार रूस जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है ? ऐसा नहीं है कि किसी खास मसले को लेकर भारत और रूस के बीच कोई तनाव पैदा हो गया है या भारत-रूस व्यापार में कोई गंभीर उतार आ गया है। लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनकी वजह से दोनों मित्र-राष्ट्रों के बीच सतत संवाद जरूरी हो गया है।

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सबसे पहला मुद्दा तो यह है कि रूस से भारत जो एस—400 मिसाइल 5 बिलियन डॉलर में खरीद रहा है, उसे लेकर अमेरिका कोई प्रतिबंध तो नहीं लगा देगा। ट्रंप-प्रशासन के दौरान यह खतरा जरूर था लेकिन अब इसकी संभावना कम ही है। ये रूसी मिसाइल इस वक्त दुनिया के सबसे तेज मिसाइल हैं। दूसरा, कोरोना महामारी से निपटने में दोनों राष्ट्र परस्पर खूब सहयोग कर रहे हैं। यों भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मोदी अब तक 19 बार मिल चुके हैं। कोराना-काल में पिछले साल उनकी चार बार बात भी हुई है। तीसरा, मुद्दा है— भारत-प्रशांत का यानि रूस को यह चिंता है कि प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत कहीं अमेरिका का मोहरा बनकर चीन और रूस के विरूद्ध मोर्चाबंदी तो नहीं कर रहा है ? इसके जवाब में श्रृंगला ने कहा है कि भारत किसी भी देश के विरुद्ध नहीं है। वह चेन्नई से व्लादिवस्तोक तक समुद्री गलियारा बनाने की भी तैयारी कर रहा है। चौथा, अफगानिस्तान के सवाल पर श्रृंगला ने कहा कि भारत को इस बात से कोई एतराज नहीं है कि रूस और पाकिस्तान के बीच सीधा संवाद चल रहा है। यदि यह संवाद अफगानिस्तान में शांति लाता है तो भारत इसका स्वागत करेगा लेकिन अफगानिस्तान पर वह किसी राष्ट्र के कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेगा।

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इधर भारत की चिंता यह है कि अफगानिस्तान के बहाने रूस-पाक फौजी-सहकार जोरों से बढ़ रहा है। अभी-अभी अफगानिस्तान पर रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने इस्लामाबाद-यात्रा की है। दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई तो यह है कि अफगान-समस्या को हल करने में भारत की भूमिका नगण्य है। भारत सरकार और भाजपा में ऐसा कोई नहीं है, जो अफगान-स्थिति को ठीक से जानता-समझता हो। वैसे भी हमारी सर्वज्ञ सरकार अपने बयानों की नौटंकी से ही खुश होती रहती है। दक्षिण एशिया के सबसे बड़े देश होने के नाते हमारी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है लेकिन अफगान-मामले में हम हाशिए में पड़े हुए हैं।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं) 







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