क्या बंगाल में ममता को 'खेला' से ही जवाब देगी BJP? ऑपरेशन लोटस से कैसे बचेगी TMC?

mamata banerjee
ANI

शुभेंदु अधिकारी के दावों को तृणमूल कांग्रेस हंसी में तो उड़ा रही है लेकिन उसे ध्यान रखना चाहिए कि अभी कुछ समय पहले फिल्म अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस के 38 विधायक उनके सीधे संपर्क में हैं।

क्या अब पश्चिम बंगाल में चल रहा है ऑपरेशन लोटस? यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस साल दिसंबर के बाद राज्य में तृणमूल कांग्रेस सरकार का अस्तित्व नहीं रहेगा। यही नहीं शुभेंदु अधिकारी ने यह भी दावा किया है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के साथ ही पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव भी कराये जायेंगे। शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य से तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाने की तैयारी की जा रही है। जब संवाददाताओं ने ज्यादा कुरेद कर बात की तो भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘‘कुछ महीने रुकिए, यह सरकार पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं रहेगी।'' 

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों में शुभेंदु अधिकारी ने बार-बार दावा किया है कि विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में महाराष्ट्र जैसी स्थिति होगी। हम आपको यह भी याद दिला दें कि शुभेंदु अधिकारी ने अभी हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद कहा था कि केंद्र सरकार बूस्टर डोज अभियान खत्म होने के बाद सीएए के नियम लागू करेगी। यही नहीं भाजपा विधायक असीम सरकार ने तो दावा कर दिया है कि संशोधित नागरिकता कानून दिसंबर तक लागू होने की संभावना है। शुभेंदु अधिकारी ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान केंद्र सरकार को बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में कथित रूप से शामिल 100 लोगों की सूची सौंप कर जांच कराने की मांग भी की थी। यह जांच हुई तो तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और सरकारी अधिकारी कठघरे में आ सकते हैं।

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शुभेंदु अधिकारी के दावों को तृणमूल कांग्रेस हंसी में तो उड़ा रही है लेकिन उसे ध्यान रखना चाहिए कि अभी कुछ समय पहले फिल्म अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस के 38 विधायक उनके सीधे संपर्क में हैं। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात को देखें तो साफ प्रतीत होता है कि जिस तरह पार्थ चटर्जी मामले से तृणमूल कांग्रेस सरकार की छवि खराब हुई है उसको देखते हुए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ी है। यही नहीं हाल ही में ममता बनर्जी ने जब अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया तो जो लोग मंत्री नहीं बन पाये या जिनकी मंत्री पद से छुट्टी कर दी गयी है वह भी नाराज बताये जा रहे हैं।

यही नहीं, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता अब अपने ही नेताओं के खिलाफ आरोप लगाने और उनके घरों पर तोड़फोड़ करने पर भी उतर आये हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के विधायक इदरीस अली के घर पर उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी के स्थानीय संगठन में पदों के आवंटन के लिए धन लिया। हालांकि इदरीस अली ने आरोप को निराधार बताते हुए दावा किया है कि टीएमसी के कुछ स्थानीय नेता संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों को पार्टी के ब्लॉक-स्तरीय संगठन में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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बहरहाल, पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन लोटस सफल रहता है या नहीं यह तो वक्त ही बतायेगा। फिलहाल तो तृणमूल कांग्रेस बिहार के घटनाक्रम से खुश है। पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के कदम का स्वागत किया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा के साथ गठबंधन में रहकर कोई दल अपनी पहचान की रक्षा नहीं कर सकता क्योंकि भाजपा की ‘‘सब कुछ हड़प लेने की राजनीति’’ क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व में भरोसा नहीं करती। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वह पड़ोसी राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। लेकिन देखा जाये तो तृणमूल कांग्रेस को यह नजर दिसंबर तक अपने यहां भी तेजी से बनाये रखनी होगी क्योंकि तब तक भाजपा गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की व्यस्तता से मुक्त हो चुकी होगी।

-नीरज कुमार दुबे

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