व्यवस्था की चिता पर जलते सपने: आखिर कब रुकेगा मौत का कारोबार?
उपहार सिनेमा अग्निकांड को लगभग तीन दशक बीत चुके हैं। उस घटना में बंद निकास द्वारों के कारण 59 लोगों की मौत हुई थी। देश ने उस समय कड़े कानूनों और सख्त निगरानी की मांग की थी। लेकिन क्या वास्तव में कुछ बदला? यदि बदला होता तो मुंडका, अनाज मंडी, करोल बाग, मालवीय नगर और लखनऊ जैसी घटनाएं दोहराई नहीं जाती।



























































