भारत से टकराने की जिद बड़ी भारी पड़ती है, 'हिंदुस्तान के हिस्से का बिल' भी भर रहा है पाकिस्तान!
भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। नई दिल्ली का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां 1960 जैसी नहीं रहीं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी, ऊर्जा की आवश्यकता, नई प्रौद्योगिकी और सबसे बढ़कर पाकिस्तान प्रायोजित सीमापार आतंकवाद ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। ऐसे में संधि की समीक्षा और नए सिरे से विचार स्वाभाविक आवश्यकता है।



























































