कोरोना के बढ़ते मामलों और चीन से बढ़ती टेंशन के बीच कांग्रेस की स्वार्थ भरी राजनीति

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 27, 2020   15:23
कोरोना के बढ़ते मामलों और चीन से बढ़ती टेंशन के बीच कांग्रेस की स्वार्थ भरी राजनीति

इस सप्ताह चर्चा रही कि राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके अलावा भारत और चीन के बीच विवाद बना रहा और वार्ताओं के बावजूद सीमा पर तनाव जारी है। इस सप्ताह भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़े और अब यह पाँच लाख को पार कर चुका है।

इस सप्ताह के राजनीतिक सामाजिक मुद्दों की बात करें तो चीन के साथ एलएसी पर विवाद ही प्रमुख मुद्दा बना रहा। भारत सरकार जहाँ चीन से निपटने के लिए कई प्रकार के कूटनीतिक कदम उठा रही है वहीं कुछ घरेलू कदमों के माध्यम से भी चीन को झटका देने की तैयारी कर ली गयी है। मसलन कई राज्यों में चीनी कंपनियों को मिले ठेके रद्द कर दिये गये हैं या किये जा रहे हैं। इसी प्रकार चीनी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान भी अब एक आंदोलन का रूप ले चुका है। चीन भी यह सब देख रहा है इसलिए वार्ताओं की पेशकश उसी की ओर से ज्यादा की गयी हैं लेकिन चीन का असली चेहरा भी दुनिया के सामने आ गया है कि वार्ता के साथ-साथ चीन एलएसी पर अपनी सेना भी बढ़ा रहा है और युद्धक सामग्री भी बढ़ा रहा है। चीन को जवाब देने के लिए भारत भी पूरी तैयारी के साथ एलएसी पर खड़ा है।

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दूसरी तरफ देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और भारत में अब कुल आंकड़ा 5 लाख को पार कर चुका है। हालांकि राहत भरी बात है कि इसमें से लगभग तीन लाख लोग स्वस्थ होकर अपने घर पहुँच चुके हैं और पूरी दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां कोरोना को हरा कर स्वस्थ होने वालों की दर 58 प्रतिशत से ज्यादा है। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में जिस तरह मामले लगातार बढ़ रहे हैं उसको देखते हुए सरकारों की चिंता जरूर बढ़ी हुई है।

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संकट के समय विपक्ष को अपने राजनीतिक हित छोड़ कर देश के साथ खड़ा होना चाहिए लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी। कांग्रेस की ओर से सवाल तो प्रधानमंत्री मोदी पर दागे जा रहे हैं लेकिन वह सवाल असल में सेना के शौर्य पर उठाये जा रहे हैं। कांग्रेस को पूर्व में भी ऐसी गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा है, इससे उसे सबक लेना चाहिए था। कांग्रेस में अब इस बात के भी प्रयास हो रहे हैं कि राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाया जाये। देखना होगा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी क्या गांधी परिवार से बाहर का कोई अध्यक्ष बनाती है या फिर परिवार की ही शरण में दोबारा रहना पड़ता है।





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