APL 2026 Analysis: 'Hit-or-Miss' Shoot-Off और Mixed Teams कैसे बदल रहे हैं तीरंदाजी का खेल?

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अंकित सिंह । Oct 9 2026 2:13PM

हैदराबाद में आर्चरी प्रीमियर लीग के दूसरे सीज़न का आगाज हो गया है। पहले मैच में मौजूदा चैंपियन राजपूताना रॉयल्स ने पृथ्वीराज योद्धाज़ को 5-3 से हराकर जीत दर्ज की। 8 से 18 अक्टूबर तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में छह टीमें डबल राउंड-रॉबिन फॉर्मेट और खास शूट-ऑफ नियमों के तहत खेल रही हैं।

पहले सीज़न के फ़ाइनल जैसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब गुरुवार को हैदराबाद के पीपल्स प्लाज़ा में आर्चरी प्रीमियर लीग (APL) के दूसरे सीज़न के पहले मैच में राजपूताना रॉयल्स ने पृथ्वीराज योद्धाज़ को 5-3 से हराकर अपने टाइटल को बचाने की शानदार शुरुआत की। शुरुआत में कंपाउंड आर्चर ओजस देवतले और एला गिब्सन रॉयल्स के लिए आगे रहे, और मेटे गाज़ोज़ ने भी अच्छा साथ दिया। धीमी शुरुआत के बाद, अभिषेक वर्मा की कप्तानी वाली योद्धास ने वापसी की और मैच को 'हिट-ऑर-मिस' शूट-ऑफ तक ले जाने के करीब पहुँच गए थे, लेकिन तभी मैथियास ग्रांडे ने आखिरी तीर से सिर्फ़ आठ का स्कोर किया।

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आपको बता दें कि आर्चरी प्रीमियर लीग (APL) का दूसरा सीज़न 8 से 18 अक्टूबर, 2026 तक हैदराबाद में नेकलेस रोड पर पीपल्स प्लाज़ा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ओलंपिक पदक विजेता और एशियाई खेलों के स्टार खिलाड़ी शामिल होंगे। इस कॉम्पिटिशन में रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाज़ों की मिक्स्ड-जेंडर टीमें एक साथ आती हैं, और हर सेट के लिए 120 सेकंड का समय तय होता है। 4-4 से टाई हुए मैचों का फ़ैसला 'हिट-ऑर-मिस शूट-ऑफ़' से होता है, जिससे इस तेज़-तर्रार फ़ॉर्मेट में दबाव और बढ़ जाता है।

एशियन गेम्स में भारत के शानदार प्रदर्शन के बाद, APL देश के तीरंदाज़ों को मुक़ाबला करते देखने का एक और मौका देता है। इस बार यह एक फ़्रैंचाइज़ी-बेस्ड कॉम्पिटिशन है, जहाँ टीमवर्क और तेज़ी से फ़ैसला लेना उतना ही ज़रूरी है जितना कि सटीक निशाना लगाना। 2025 के पहले सीज़न से पता चला कि मुक़ाबले कितने कड़े हो सकते हैं। फ़ाइनल में राजपूताना रॉयल्स ने पृथ्वीराज योद्धाज़ को 5-4 से हराया और लीग के 'हिट-ऑर-मिस शूट-ऑफ़' से विजेता का फ़ैसला हुआ।

आर्चरी प्रीमियर लीग में कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं?

आर्चरी प्रीमियर लीग में छह टीमें (फ्रैंचाइज़ी) शामिल हैं -- चेरो आर्चर्स, चोला चीफ्स, काकतीय नाइट्स, माइटी मराठा, पृथ्वीराज योद्धा और मौजूदा चैंपियन राजपूताना रॉयल्स। ये टीमें डबल राउंड-रॉबिन फ़ॉर्मेट में खेलती हैं, जिसमें हर टीम लीग स्टेज के दौरान बाकी पांच टीमों का सामना दो-दो बार करती है। हर टीम 10 मैच खेलती है और हर जीत पर दो पॉइंट हासिल करती है। लीग स्टेज के आखिर में, टॉप चार टीमें सेमी-फ़ाइनल में पहुँचती हैं। लीग स्टैंडिंग से यह तय होता है कि कौन सी टीमें आगे बढ़ेंगी, जबकि अलग-अलग मैचों का फ़ैसला एक अलग सेट-पॉइंट स्कोरिंग सिस्टम से किया जाता है।

APL की क्या खासियत है?

पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में आमतौर पर रिकर्व और कंपाउंड इवेंट अलग-अलग आयोजित किए जाते हैं। APL इन दोनों तरह की तीरंदाजी को एक साथ लाता है, जिसमें टीमों को हर मैच में चार तीरंदाजों को उतारना होता है। टीम में रिकर्व इवेंट के लिए एक पुरुष और एक महिला, और कंपाउंड इवेंट के लिए भी एक पुरुष और एक महिला शामिल होते हैं। इन चार तीरंदाजों में से कम से कम एक विदेशी खिलाड़ी होना ज़रूरी है। इस व्यवस्था के कारण यह प्रतियोगिता सामूहिक प्रदर्शन की परीक्षा बन जाती है। टीमों को चारों तीरंदाजों के योगदान की ज़रूरत होती है, क्योंकि कोई भी इवेंट दूसरे से अलग होकर नहीं खेला जाता।

- रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाज़ एक मिक्स्ड टीम फ़ॉर्मेट में एक साथ मुक़ाबला करते हैं।
- हर तीरंदाज़ को अपने तीर चलाने के लिए औसतन सिर्फ़ 15 सेकंड मिलते हैं।
- मैच टाई होने पर 'हिट-या-मिस' शूटआउट होता है।

लीग फ़ॉर्मेट

- छह टीमें डबल राउंड-रॉबिन फ़ॉर्मेट में खेलेंगी, जिसमें हर टीम बाकी पांच फ़्रैंचाइज़ी का दो-दो बार सामना करेगी। टॉप चार टीमें सेमी-फ़ाइनल में पहुंचेंगी।
- राउंड-रॉबिन स्टेज में हर मैच जीतने पर, जीतने वाली टीम को 2 पॉइंट मिलेंगे।

मैच का फ़ॉर्मेट

- हर टीम में चार तीरंदाज़ होते हैं: रिकर्व और कंपाउंड कैटेगरी से एक-एक पुरुष और महिला। टीम में कम से कम एक विदेशी तीरंदाज़ का होना ज़रूरी है।
- मैच 'सेट फ़ॉर्मेट' में खेला जाता है, जिसमें हर तीरंदाज़ 2 तीर चलाता है और कुल 80 पॉइंट होते हैं।
- 8 तीर, 120 सेकंड।

APL अलग फ़ॉर्मैट का इस्तेमाल क्यों करती है?

इस लीग में कई ऐसी चीज़ें शामिल हैं जिनसे तीरंदाज़ी एक तेज़ रफ़्तार वाला टीम मुक़ाबला बन जाती है। इसमें रिकर्व और कंपाउंड के माहिर खिलाड़ी एक साथ मुक़ाबला करते हैं, हर टीम में पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल होते हैं, और विदेशी तीरंदाज़ भी टीम का हिस्सा होते हैं। समय की पाबंदी हर सेट में तेज़ी लाती है, जबकि सेट-पॉइंट सिस्टम टीमों को एक साफ़ लक्ष्य देता है। अगर मुक़ाबला 4-4 पर बराबरी पर रहता है, तो पारंपरिक स्कोरिंग की जगह 'हिट-या-मिस' शूट-ऑफ़ होता है, जो सटीकता की ज़्यादा सीधी परीक्षा है। 'सडन डेथ' में नतीजे का फ़ैसला सिर्फ़ एक जोड़ी तीरों से होता है, जिससे मुक़ाबला और भी रोमांचक हो जाता है।

'सडन डेथ' में क्या होता है?

'सडन डेथ' में मैच दोनों टीमों के एक-एक चुने हुए तीरंदाज़ के बीच सीधे मुकाबले में बदल जाता है। दोनों तीरंदाज़ टारगेट पर एक-एक तीर चलाते हैं। अगर एक तीरंदाज़ पीले घेरे (येलो स्पॉट) पर निशाना लगाता है और दूसरा चूक जाता है, तो मैच खत्म हो जाता है और सफल निशाना लगाने वाली टीम जीत जाती है। अगर दोनों तीरंदाज़ पीले घेरे पर निशाना लगाते हैं या दोनों चूक जाते हैं, तो किसी भी टीम को बढ़त नहीं मिलती। इसके बाद टीमें अपने बाकी तीरंदाज़ों में से एक और जोड़ी चुनती हैं और यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। शूट-ऑफ तब तक चलता रहता है जब तक कि एक तीरंदाज़ निशाना न लगा ले और दूसरा चूक न जाए। जब ​​मुकाबला इस चरण पर पहुँच जाता है, तो पारंपरिक स्कोर की तुलना करने की ज़रूरत नहीं रहती। इस सिस्टम का इस्तेमाल 2025 के फ़ाइनल में किया गया था, जब राजपूताना रॉयल्स ने पृथ्वीराज योद्धाओं को हराकर पहला चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।

मैच 'हिट-ऑर-मिस शूट-ऑफ' तक कब पहुँचता है?

APL में एक खास टाई-ब्रेकर का इस्तेमाल तब किया जाता है जब चार सेट के बाद मैच 4-4 की बराबरी पर होता है। रेगुलर स्कोरिंग सिस्टम को जारी रखने के बजाय, टीमें 'हिट-ऑर-मिस शूट-ऑफ' में जाती हैं। यहाँ, मकसद आम स्कोरिंग रिंग्स में पॉइंट्स जमा करना नहीं होता। मकसद तय पीले स्पॉट पर निशाना लगाना होता है, जो X-रिंग को दिखाता है। पीले हिस्से में लगने वाले तीर को 'हिट' माना जाता है। अगर यह टारगेट फेस पर कहीं और (जो लाल रंग का होता है) लगता है, तो इसे 'मिस' माना जाता है। यह नियम सफलता और असफलता के बीच साफ अंतर बनाता है। चाहे तीर पीले हिस्से के बीच में लगे या उसके अंदर कहीं और, नतीजा 'हिट' ही होता है। बस यह देखना होता है कि आर्चर तय ज़ोन तक पहुँचता है या नहीं।

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'हिट-ऑर-मिस शूट-ऑफ' से विजेता का फैसला कैसे होता है?

हर टीम के चारों आर्चर हिस्सा लेते हैं और टीमें बारी-बारी से एक-एक तीर चलाती हैं। हर 'हिट' पर एक पॉइंट मिलता है। दोनों तरफ़ चार-चार आर्चर होने के कारण, शुरुआती शूट-ऑफ में हर टीम का ज़्यादा से ज़्यादा स्कोर चार हिट हो सकता है। जब सभी आठ तीर चला दिए जाते हैं, तो ज़्यादा हिट वाली टीम मैच जीत जाती है। अगर दोनों तरफ़ हिट की संख्या बराबर रहती है, तो मुकाबला 'सडन डेथ' में चला जाता है।

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