25 साल तक 22 गज की पिच के आसपास युवराज ने बिताया अपना करियर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 10, 2019   15:56
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25 साल तक 22 गज की पिच के आसपास युवराज ने बिताया अपना करियर

युवराज सिंह ने कहा कि मैं बहुत भाग्यशाली रहा कि मैंने भारत की तरफ से 400 मैच खेले। जब मैंने खेलना शुरू किया था तब मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता था।

मुंबई। कैंसर पर विजय हासिल करने के आठ साल बाद भावुक युवराज सिंह ने सोमवार को उतार चढ़ाव से भरे अपने करियर को अलविदा कहने की घोषणा की जिसमें उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भारत की 2011 की विश्व कप जीत में अहम योगदान रहा। प्रतिभा के धनी इस करिश्माई खिलाड़ी को सीमित ओवरों की क्रिकेट का दिग्गज माना जाता रहा है लेकिन उन्होंने इस टीस के साथ संन्यास लिया कि वह टेस्ट मैचों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाये। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने हालांकि संन्यास लेने से पहले कई बार परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने के प्रयास किये। इस 37 वर्षीय क्रिकेटर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मैंने 25 साल 22 गज की पिच के आसपास बिताने और लगभग 17 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद आगे बढ़ने का फैसला किया है। क्रिकेट ने मुझे सब कुछ दिया और यही वजह है कि मैं आज यहां पर हूं।

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उन्होंने कहा कि मैं बहुत भाग्यशाली रहा कि मैंने भारत की तरफ से 400 मैच खेले। जब मैंने खेलना शुरू किया था तब मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता था। इस आक्रामक बल्लेबाज ने कहा कि वह अब ‘जीवन का लुत्फ’ उठाना चाहता है और बीसीसीआई से स्वीकृति मिलने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न टी20 लीग में फ्रीलांस खिलाड़ी के रूप में खेलना चाहता है। लेकिन अब वह इंडियन प्रीमियर लीग में नहीं खेलेंगे। युवराज ने भारत की तरफ से 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उन्होंने टेस्ट मैचों में 1900 और वनडे में 8701 रन बनाये। उन्हें वनडे में सबसे अधिक सफलता मिली। टी20 अंतरराष्ट्रीय में उनके नाम पर 1177 रन दर्ज हैं। 

उन्होंने कहा कि यह इस खेल के साथ एक तरह से प्रेम और नफरत जैसा रिश्ता रहा। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि वास्तव में यह मेरे लिये कितना मायने रखता है। इस खेल ने मुझे लड़ना सिखाया। मैंने जितनी सफलताएं अर्जित की उससे अधिक बार मुझे नाकामी मिली पर मैंने कभी हार नहीं मानी। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने अपने करियर के तीन महत्वपूर्ण क्षणों में विश्व कप 2011 की जीत और मैन आफ द सीरीज बनना, टी20 विश्व कप 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के जड़ना और पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में 2004 में पहले टेस्ट शतक को शामिल किया। विश्व कप 2011 के बाद कैंसर से जूझना उनके लिये सबसे बड़ी लड़ाई थी। 

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उन्होंने कहा कि मैं इस बीमारी से हार मानने वाला नहीं था। इसके बाद हालांकि उनकी फार्म अच्छी नहीं रही। उन्होंने भारत की तरफ से आखिरी मैच जून 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे के रूप में खेला था। उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट मैच 2012 में खेला था। इस साल आईपीएल में वह मुंबई इंडियन्स की तरफ से खेले लेकिन उन्हें अधिक मौके नहीं मिले। दक्षिण अफ्रीका में 2007 में खेले गये विश्व कप में उनकी उपलब्धि का कोई सानी नहीं है। उन्होंने किंग्समीड में स्टुअर्ट ब्राड के एक ओवर में छह छक्के लगाये थे जिसे क्रिकेट प्रेमी कभी भूल नहीं पाएंगे। इंग्लैंड के खिलाफ इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केवल 12 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया जो कि एक रिकार्ड है। युवराज वनडे में मध्यक्रम के मुख्य बल्लेबाज बन गये थे और इस बीच उन्होंने अपनी गेंदबाजी से भी प्रभावित किया। उन्होंने विश्व कप 2011 में अपनी आलराउंड क्षमता का शानदार नमूना पेश किया तथा 300 से अधिक रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी लिये। इस दौरान उन्हें चार मैचों में मैन आफ द मैच और बाद में मैन आफ द टूर्नामेंट चुना गया। 

युवराज ने कहा कि विश्व कप 2011 को जीतना, मैन आफ द सीरीज बनना, चार मैन आफ द मैच हासिल करना सब सपने जैसा था जिसके बाद कैंसर से पीड़ित होने के कारण मुझे कड़वी वास्तविकता से रू ब रू होना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘यह सब तेजी से घटित हुआ और तब हुआ जब मैं अपने करियर के चरम पर था। मैं अपने परिवार और दोस्तों से मिले सहयोग को शब्दों में बयां नहीं कर सकता जो मेरे लिये उस समय मजबूत स्तंभ की तरह थे। बीसीसीआई और बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने भी मेरे उपचार के दौरान सहयोग किया।’ युवराज ने सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी को अपना पसंदीदा कप्तान बताया तथा अपने करियर में जिन गेंदबाजों को खेलने में उन्हें मुश्किल हुई उनमें श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन और आस्ट्रेलिया के ग्लेन मैकग्रा का नाम गिनाया। 





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भारत के महान लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर अस्पताल में भर्ती, हालत में सुधार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 18, 2021   12:40
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भारत के महान लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर अस्पताल में भर्ती, हालत में सुधार

महान लेग स्पिनर चंद्रशेखर को हल्का स्ट्रोक आने के बाद अस्पताल में भार्ती कराया गया। उनकी अभी हालत में सुधार है। भारत के 75 वर्षीय इस पूर्व स्पिनर को थकान और उसके कारण जबान लड़खड़ाने के कारण शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बेंगलुरू। भारत के पूर्व क्रिकेटर बी एस चंद्रशेखर को हल्का स्ट्रोक आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया हालांकि उनके परिवार ने सोमवार को बताया कि उनकी स्थिति में सुधार आया है और अगले कुछ दिन में उन्हें छुट्टी मिल जायेगी। उनकी पत्नी संध्या चंद्रशेखर भागवत ने कहा ,‘‘ उनकी हालत में सुधार आया है।वह बुधवार या गुरूवार को घर लौट आयेंगे।’’ भारत के 75 वर्षीय इस पूर्व स्पिनर को थकान और उसके कारण जबान लड़खड़ाने के कारण शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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डॉक्टरों की सलाह पर उनका न्यूरोलॉजी में उपचार कराया गया। उन्हें एस्टर आर वी अस्पताल में आपात चिकित्सा ईकाई में रखा गया था। उनकी पत्नी ने बताया कि अब वह सामान्य वार्ड में हैं और उनकी फिजियोथेरेपी चल रही है। संध्या ने कहा ,‘‘ उनके दिमाग में किसी तरह का अवरोध है। यह बहुत ही हलका स्ट्रोक था। वह एक या दो सप्ताह में पूरी तरह से ठीक हो जायेंगे। कोई जानलेवा बीमारी नहीं है। उनके प्रशंसकों को बता दीजिये कि वह ठीक है। वह मजबूत इच्छाशक्ति वाले हैं।’’ चंद्रशेखर ने अपने 16 साल के कैरियर में 58 टेस्ट में 242 विकेट लिये। बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना और एस वेंकटराघवन के साथ भारत की मशहूर स्पिन चौकड़ी का हिस्सा रहे चंद्रशेखर साठ और सत्तर के दशक में खेले थे। उन्हें 1972 में पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार मिला था।





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ऑस्ट्रेलियाई ओपन: 47 खिलाड़ियों को भेजा गया कड़े पृथकवास पर, खिलाड़ियों में बढ़ी नाराजगी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 17, 2021   15:39
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ऑस्ट्रेलियाई ओपन: 47 खिलाड़ियों को भेजा गया कड़े पृथकवास पर, खिलाड़ियों में बढ़ी नाराजगी

चार कोविड-19 पॉजिटिव मामले आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई ओपन के लिये पहुंचे खिलाड़ी कड़े पृथकवास पर है।अन्य खिलाड़ियों को अपने कमरे से निकलकर प्रत्येक दिन पांच घंटे अभ्यास की अनुमति होगी जबकि करीबी संपर्क वाले खिलाड़ियों के साथ ऐसा नहीं होगा और वे कमरों से बाहर नहीं निकल पायेंगे।

मेलबर्न।ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट के लिये दो विशेष विमानों से यहां पहुंचे 47 खिलाड़ियों को कड़े पृथकवास पर भेज दिया गया है क्योंकि इन उड़ान में कोरोना वायरस के चार मामले पॉजीटिव पाये गये हैं। कुछ खिलाड़ी इस बात से भी नाराज थे कि उन्हें पॉजिटिव आये लोगों के साथ फ्लाइट में मौजूद होने की वजह से ही ‘करीबी संपर्क’ श्रेणी में रख दिया गया है जिससे उन्हें अन्य खिलाड़ियों की तुलना में सख्त पृथकवास में रहना होगा।

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अन्य खिलाड़ियों को अपने कमरे से निकलकर प्रत्येक दिन पांच घंटे अभ्यास की अनुमति होगी जबकि करीबी संपर्क वाले खिलाड़ियों के साथ ऐसा नहीं होगा और वे कमरों से बाहर नहीं निकल पायेंगे। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि सभी खिलाड़ियों को पहले ही जोखिम के बारे में चेतावनी दे दी गयी है। और इन नियमों को तोड़ने के संबंध में भी खिलाड़ियों को चेताया गया है। अगर पृथकवास के नियमों का उल्लंघन होता है तो उन्हें भारी जुर्माने के साथ और अधिक सुरक्षित पृथकवास परिसर में भेज दिया जायेगा जहां उनके होटल के कमरों के दरवाजों के बाहर पुलिस तैनात होगी। शनिवार को तीन पॉजिटिव मामलों की घोषणा की गयी थी और विक्टोरिया की कोविड-19 पृथकवास आयुक्त एम्मा कासार ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इसमें एक चौथा पॉजिटिव मामला भी सामने आया है। अभी तक कोई भी खिलाड़ी पॉजिटिव नहीं मिला है। लास एंजिल्स की फ्लाइट में एक क्रू सदस्य, एक कोच और टीवी प्रसारण टीम के एक सदस्य को पॉजिटिव पाया गया। एक अन्य मामला अबुधाबी से पहुंची उड़ान में के एक कोच के पॉजिटिव आने का है। टूर्नामेंट के आयोजकों ने बताया कि लास एंजिल्स और अबुधाबी से यहां पहुंची उड़ान में ये मामले पाये गये हैं।

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अधिकारियों ने कहा कि लास एंजिल्स से आये विशेष विमान में कोविड-19 के तीन मामले पाये गये। एक मामला अबुधाबी से यहां पहुंचे विमान में मिला। इन चारों को आस्ट्रेलिया की फ्लाइट लेने से पहले जांच में नेगेटिव पाया गया था। इन चारों को होटल में रखा गया है। कनाडा की स्टार खिलाड़ी बियांका आंद्रीस्कू के कोच सिल्वेन ब्रूनीयु ने कहा है कि उन्हें अबुधाबी से यहां पहुंचने पर कोविड-19 के लिये पॉजीटिव पाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी टीम के अन्य सदस्यों का परीक्षण परिणाम नेगेटिव आया है। ’’ दो बार की ओपन चैम्पियन विक्टोरिया अजारेंका और 2014 अमेरिकी ओपन के उप विजेता केई निशिकोरी लास एंजिल्स की फ्लाइट में थे। इससे पहले अधिकारियों ने कहा कि लास एंजिल्स से आने वाले सभी यात्रियों को 14 दिन तक होटल में कड़े पृथकवास पर भेज दिया गया है। टेनिस आस्ट्रेलिया ने पुष्टि की कि लास एंजिल्स से पहुंचे विमान में 24 और अबुधाबी से आये विमान में 23 खिलाड़ी थे।





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इस साल तोक्यो ओलंपिक होगा या नहीं? अब संयुक्त राष्ट्र लेगी फैसला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 17, 2021   10:47
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इस साल तोक्यो ओलंपिक होगा या नहीं? अब संयुक्त राष्ट्र लेगी फैसला

आईओसी के पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि, संयुक्त राष्ट्र तोक्यो ओलंपिक के बारे में फैसला कर सकता है।आईओसी और स्थानीय आयोजकों ने कहा कि इस बार ओलंपिक खेल स्थगित नहीं किये जा सकते हैं। अगर इनका आयोजन नहीं हो पाता है तो फिर इन्हें रद्द कर दिया जाएगा।

सिडनी। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के पूर्व उपाध्यक्ष केविन गोस्पर का मानना है कि एक साल के लिये स्थगित किये गये तोक्यो ओलंपिक का भाग्य का फैसला करने में संयुक्त राष्ट्र अपनी भूमिका निभा सकता है। ओलंपिक खेलों का उद्घाटन 23 जुलाई को हाना है लेकिन तोक्यो, जापान और विश्व भर में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण इसके आयोजन को लेकर आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। गोस्पर अब भी आईओसी के मानद सदस्य हैं और उन्होंने आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय प्रसारक के साथ बातचीत में यह सुझाव दिया।

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उन्होंने एबीसी के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘अगर आप यह पता करने के लिये तीसरे पक्ष के पास जाते हैं कि वैश्विक कोविड महामारी और उसके प्रभाव के कारण यह केवल खेल या राष्ट्रीय हित से जुड़ा मसला नहीं है तो तब यह मामला संयुक्त राष्ट्र के पास जा सकता है और खेलों के आयोजन का फैसला करने में उसे मध्यस्थ के रूप में शामिल किया जा सकता है। ’’ आईओसी और स्थानीय आयोजकों ने कहा कि इस बार ओलंपिक खेल स्थगित नहीं किये जा सकते हैं। अगर इनका आयोजन नहीं हो पाता है तो फिर इन्हें रद्द कर दिया जाएगा।





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