Magnus Carlsen बने पिता: बदला जीवन का Perspective, शतरंज प्रतियोगिताओं को लेकर लिया बड़ा निर्णय

मैग्नस कार्लसन का मानना है कि पिता बनने ने उनके पेशेवर जीवन और प्राथमिकताओं को एक नया आकार दिया है। पांच बार के विश्व चैंपियन ने शास्त्रीय विश्व शतरंज चैंपियनशिप से दूर रहने के अपने फैसले को और पक्का कर लिया है। उनका कहना है कि अब सफलता का मतलब केवल टाइटल और रैंकिंग नहीं, बल्कि परिवार के लिए जिम्मेदारियां निभाना और गुणवत्तापूर्ण समय बिताना भी है।
पांच बार के विश्व चैंपियन और दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले कार्लसन ने पिता बनने के बाद अपने पेशेवर जीवन को देखने का नजरिया जरूर बदला है। उनका कहना है कि बेटे के जन्म के बाद भी काम उनकी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब वह अपने परिवार के लिए कमाने वाले व्यक्ति हैं।
बेंगलुरु में वैश्विक शतरंज लीग के दौरान बातचीत में कार्लसन ने बताया कि पिता बनने के बाद उनके पेशेवर जीवन में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी परिवार के लिए कमाने वाले हैं और इसलिए उन्हें काम करना पड़ता है। उनके इस बयान से साफ है कि दुनिया के सबसे सफल शतरंज खिलाड़ियों में शामिल होने के बावजूद वह परिवार की सामान्य जिम्मेदारियों को उतनी ही गंभीरता से देखते हैं।
कार्लसन ने पिता बनने के अनुभव को बेहद खुशी देने वाला बताया। उन्होंने अपने बेटे को दुनिया का सबसे शानदार इंसान बताते हुए कहा कि उसके साथ बिताया हर दिन उनके लिए खुशी लेकर आता है। हालांकि, मौजूदा समय में प्रतियोगिता के लिए परिवार से दूर रहना उन्हें थोड़ा दुखी भी करता है। इसके बावजूद उनका मानना है कि परिवार की जरूरतों को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि पिता बनने का असर कार्लसन के उस फैसले पर भी पड़ा है, जिसके तहत उन्होंने शास्त्रीय विश्व शतरंज चैंपियनशिप में दोबारा हिस्सा नहीं लेने का मन बनाया। कार्लसन पहले ही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से दूरी बना चुके थे, लेकिन उन्होंने बताया कि पिता बनने के बाद यह फैसला उनके लिए और पक्का हो गया।
बता दें कि कार्लसन ने लंबे समय तक शास्त्रीय शतरंज की विश्व चैंपियनशिप पर अपना दबदबा बनाए रखा। वह पांच बार विश्व चैंपियन रहे और कई वर्षों तक दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने रहे। इसके बावजूद अब उनका ध्यान सिर्फ उसी खिताब को दोबारा हासिल करने पर नहीं है। उनका कहना है कि शतरंज में उन्हें अब भी कई प्रतियोगिताएं और अलग-अलग प्रारूप पसंद हैं, लेकिन विश्व चैंपियनशिप के लिए लंबे समय तक तैयारी करना उन्हें अपनी जिंदगी के सीमित समय का सही इस्तेमाल नहीं लगता।
कार्लसन का यह फैसला शतरंज से दूरी बनाने के बजाय अपनी प्राथमिकताएं तय करने जैसा है। वह अब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं और वैश्विक शतरंज लीग में मौजूदा चैंपियन एपीएल पाइपर्स के लिए खेल रहे हैं। उनका मानना है कि जब किसी प्रतियोगिता में उतरने के पीछे पर्याप्त कॉम्पिटेटिव वजह ही न हो, तो सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए उसमें हिस्सा लेना जरूरी नहीं है।
मौजूद जानकारी के अनुसार कार्लसन ने अपने बेटे की पहचान को सार्वजनिक करने से भी परहेज किया है। जब उनसे बच्चे का नाम पूछा गया तो उन्होंने निजी जीवन को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने से विनम्रता से इनकार कर दिया। उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह अपने बेटे के बारे में सामान्य तौर पर बात कर सकते हैं, लेकिन उसकी निजी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं समझते।
35 साल की उम्र में कार्लसन ने शतरंज में वह मुकाम हासिल किया है, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। अब पिता बनने के बाद उनकी जिंदगी में सफलता का मतलब सिर्फ खिताब और रैंकिंग नहीं रह गया है।
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