ISRO के दिग्गजों ने संभाली कमान, Surat में बन रहा देश का पहला Private Liquid Rocket

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ANI
Ankit Jaiswal । Mar 30 2026 10:04PM

इसरो के अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित सूरत की कंपनी एक नया तरल ईंधन आधारित रॉकेट बना रही है, जो 500 किलोग्राम तक के उपग्रहों को लॉन्च करने में सक्षम होगा और भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया और दिलचस्प नाम तेजी से उभर रहा है। सूरत से शुरू हुई एक निजी कंपनी भारत स्पेस व्हीकल अब देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में काम कर रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, साल 2024 में स्थापित इस कंपनी की खास बात यह है कि इसके संस्थापक दल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुभवी वैज्ञानिक शामिल रहे हैं, जिनके पास दशकों का अनुभव रहा है।

बता दें कि कंपनी अगस्थ्य-1 नाम का एक दो चरणों वाला रॉकेट विकसित कर रही है, जिसे छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह रॉकेट तरल ईंधन तकनीक पर आधारित है, जो इसे देश के अन्य छोटे रॉकेटों से अलग बनाती है। गौरतलब है कि तरल ईंधन वाले रॉकेट को प्रक्षेपण से पहले पूरी तरह जांचा जा सकता है, जिससे जोखिम कम होता है और सफलता की संभावना बढ़ती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह रॉकेट करीब 28 मीटर ऊंचा होगा और लगभग 500 किलोग्राम तक के उपग्रह को ध्रुवीय कक्षा में भेजने में सक्षम होगा। वहीं कम झुकाव वाली निचली कक्षा में यह 800 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना भारत के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।

कंपनी के नेतृत्व की बात करें तो इसमें ऐसे वैज्ञानिक शामिल हैं जिन्होंने पहले देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दिया है। बता दें कि इस टीम में तरल प्रणोदन प्रणाली और प्रक्षेपण यान तकनीक के अनुभवी लोग शामिल हैं, जिन्होंने पहले भी बड़े स्तर की परियोजनाओं को सफल बनाया है।

इसके साथ ही गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार इलाके में एक नए प्रक्षेपण केंद्र का प्रस्ताव भी सामने आया है। गौरतलब है कि अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत को पश्चिमी तट पर एक नया प्रक्षेपण विकल्प मिल सकता है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की क्षमता और बढ़ेगी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नई अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं और अब कई स्टार्टअप इस दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में यह पहल भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में और मजबूत बना सकती है और कम लागत में उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में नई राह खोल सकती है।

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