Lockdown के 38वें दिन दो सप्ताह के लिए और बंद की घोषणा, कई रियायतें भी दी गयीं

Lockdown के 38वें दिन दो सप्ताह के लिए और बंद की घोषणा, कई रियायतें भी दी गयीं

पंजाब सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप से प्रभावी तरीके से निपटने के मद्देनजर शुक्रवार को इजरायल से तकनीकी सहायता और विशेषज्ञता मांगी। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

देश में कोरोना वायरस के कारण 77 और लोगों के जान गंवाने के साथ ही शुक्रवार को इससे मरने वाले लोगों की संख्या 1,152 हो गई और संक्रमितों की संख्या बढ़कर 35,565 हो गई। ये मौतें बृहस्पतिवार शाम से शुक्रवार शाम के बीच हुई हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में दो सप्ताह के लिए लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा की है। अब देश में संपूर्ण लॉकडाउन 17 मई तक रहेगा। हालांकि कई प्रकार की रियायतों की भी घोषणा की गयी है।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समय 25,148 कोरोना वायरस संक्रमितों का इलाज चल रहा है जबकि 9,064 लोग स्वस्थ हो गए और एक मरीज देश छोड़कर चला गया। कुल 35,365 संक्रमितों में 111 विदेशी नागरिक शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इस तरह देश में कोविड-19 मरीजों के ठीक होने की दर 25.63 प्रतिशत है। बृहस्पतिवार शाम से लेकर अब तक महाराष्ट्र में 27, गुजरात में 17, पश्चिम बंगाल में 11, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सात-सात और दिल्ली में तीन, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में दो-दो और कर्नाटक में एक व्यक्ति की मौत कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से हुई है। इस संक्रामक रोग से अब तक हुई 1,152 मौतों में से महाराष्ट्र में सबसे अधिक 459 लोगों ने जान गंवाई। इसके बाद गुजरात में 214, मध्य प्रदेश में 137, दिल्ली में 59, राजस्थान में 58, उत्तर प्रदेश में 41, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में 33-33 लोगों की मौत हुई। कोरोना वायरस से तमिलनाडु में 27, तेलंगाना में 26 लोगों की मौत हुई जबकि कर्नाटक में 22 लोगों की मौत हुई। पंजाब में अभी तक 19 लोगों की मौत हुई है जबकि जम्मू कश्मीर में आठ, केरल में चार, झारखंड और हरियाणा में तीन-तीन लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से बिहार में दो लोगों की जान गई जबकि मेघालय, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और असम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। मंत्रालय की ओर से शुक्रवार शाम को अद्यतन किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में संक्रमण के सबसे अधिक 10,498 मामले महाराष्ट्र में हैं। इसके बाद गुजरात में 4,395, दिल्ली में 3,515, मध्य प्रदेश में 2,719 मामले सामने आए। राजस्थान में संक्रमित लोगों की संख्या 2,584 पर पहुंच गई, तमिलनाडु में 2,323 और उत्तर प्रदेश में 2,281 लोग संक्रमित पाए गए। आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के मामले बढ़कर 1,463 और तेलंगाना में 1,039 हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के 795, जम्मू कश्मीर में 614, कर्नाटक में 576, केरल में 497, बिहार में 426 और पंजाब में 357 मामले सामने आए हैं। हरियाणा में इस जानलेवा वायरस के 313 मामले सामने आए हैं जबकि ओडिशा में 143, झारखंड में 111 और उत्तराखंड में 57 मामले हैं। चंडीगढ़ में 56 मामले, असम में 42 जबकि हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अब तक 40-40 मामले सामने आए हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप पर 33 लोग संक्रमित पाए गए जबकि लद्दाख में 22 लोग संक्रमित पाए गए हैं। मेघालय में कोरोना वायरस के 12 मामले सामने आए, पुडुचेरी में आठ जबकि गोवा में सात मामले सामने आए। मणिपुर और त्रिपुरा में दो-दो मामले सामने आए जबकि मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक मामला सामने आया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर कहा, ‘‘हमारे आंकड़े भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधन परिषद (आईसीएमआर) के सामंजस्य से जारी किए जा रहे हैं।’’ मंत्रालय ने बताया कि 393 संक्रमितों के मामले राज्यों को उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए भेजा गया है।

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छह ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें

रेलवे ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर 25 मार्च से देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों की वापसी के लिए शुक्रवार को विशेष ‘श्रमिक ट्रेनें’ शुरू की हैं। पहली ऐसी ट्रेन शुक्रवार को सुबह चार बज कर करीब 50 मिनट पर हैदराबाद से झारखंड के लिए रवाना हुयी जिसमें 1,200 यात्री हैं। अन्य पांच ट्रेनों में नासिक से लखनऊ (रात 9:30 बजे), अलुवा से भुवनेश्वर (शाह छह बजे), नासिक से भोपाल (रात में आठ बजे), जयपुर से पटना (रात में दस बजे) और कोटा से हटिया (रात में नौ बजे) ट्रेन शामिल हैं। रेलवे ने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, यह फैसला किया गया है कि लॉकडाउन के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों के लिए शुक्रवार को मजदूर दिवस से ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनें चलायी जाएंगी। रेलवे ने कहा कि ये विशेष ट्रेनें दो स्थानों के बीच और दोनों राज्य सरकारों के अनुरोध पर चलेंगी और इसमें फंसे हुए लोगों को भेजने और पहुंचाने से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा। इन ट्रेनों के संबंध में समन्वय के लिए रेलवे और राज्य सरकारों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। रेलवे टिकटों के लिए अलग से दिशानिर्देश जारी करेगा। वहीं राजस्थान के कोटा में अधिकारियों ने निर्देश जारी कर छात्रों से कहा है कि उन्हें अपना पहचान पत्र साथ रखने की जरूरत है। जो छात्र पहले आएंगे, उन्हें सीट पहले मिलेगी। यात्रा के लिए जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी के संदेश को वैध टिकट माना जाएगा। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए हर ट्रेन में 1000 से 1200 यात्री होंगे। राजस्थान में फंसे झारखंड के सभी 24 राज्यों के छात्रों को कोटा और जयपुर से चलने वाली ट्रेनों में जगह दी जाएगी। ऐसे छात्रों से कहा गया है कि वे शाम छह बजे से स्टेशन पहुंचने लगें। रेलवे द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, यात्रियों के रवाना होने से पहले राज्यों द्वारा उनकी जांच की जाएगी और जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं होंगे, उन्हें ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी। रेलवे ने कहा कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुए राज्यों द्वारा यात्रियों को जत्थों में और संक्रमणमुक्त बसों में स्टेशन तक लाया जाएगा। सभी यात्रियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। ट्रेन जहां से चलेगी, वहीं यात्रियों को भेजने वाले राज्य की ओर से पानी और भोजन मुहैया कराए जाएंगे। रेलवे ने कहा कि वह यात्रियों के सहयोग से सामाजिक दूरी मानदंड और स्वच्छता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। लंबी दूरी की ट्रेनों में रेलवे यात्रा के दौरान भोजन उपलब्ध कराएगा। ट्रेन के गंतव्य पर पहुंचने के बाद राज्य सरकार आगे का जिम्मा उठाएगी और यात्रियों की जांच कराएगी।

यूपी में अब तक 42 की मौत

उत्तर प्रदेश में कोविड—19 संक्रमित लोगों की संख्या शुक्रवार को 2328 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से देर शाम जारी बुलेटिन में बताया गया कि कोरोना संक्रमण के 116 नये मामले आने के साथ ही संक्रमित लोगों की संख्या बढकर 2328 हो गयी है। बुलेटिन में बताया गया कि कुल 655 लोगों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है जबकि 42 लोगों की कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मौत हुई है। कुल सक्रिय मामलों की संख्या 1632 है। बुलेटिन के मुताबिक संक्रमण के मामलों में तबलीगी जमात और उनसे संबद्ध लोगों की संख्या 1117 है। बुलेटिन में कहा गया कि सबसे अधिक 14 लोगों की मौत आगरा में हुई है। मुरादाबाद में सात, मेरठ में पांच, कानपुर में चार, फिरोजाबाद में दो तथा गाजियाबाद, अमरोहा, बरेली, बस्ती, बुलंदशहर, लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, मथुरा और श्रावस्ती में एक- एक व्यक्ति की मौत कोरोना की वजह से हुई है। बुलेटिन में कहा गया कि संक्रमण के सबसे अधिक 497 मामले आगरा में सामने आये । कानपुर में 222, लखनऊ में 214, सहारनपुर में 192, गौतमबुद्ध नगर में 154, फिरोजाबाद में 124, मुरादाबाद में 110, मेरठ में 105, गाजियाबाद में 65, वाराणसी में 61, बुलंदशहर में 51, रायबरेली में 44, अलीगढ़ में 35 और बिजनौर में 32 मामले सामने आये। इससे पहले प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने संवाददाताओं को बताया, 'ये संक्रामक बीमारी है। यह जाति, धर्म, मजहब कुछ नहीं देखती। यह किसी को भी हो सकती है इसलिए अगर लक्षण आते हैं तो घबराये नहीं बल्कि तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में आयें और जांच करायें। प्रदेश सरकार जांच और चिकित्सा की सुविधा नि:शुल्क मुहैया करा रही है।' प्रसाद ने कहा कि हेल्पलाइन नंबर 1800—180—5145 पर फोन करें और लक्षणों के आधार पर जितनी जल्दी स्वास्थ्य केन्द्र आएंगे, स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उन्होंने बताया कि जिनकी अधिक उम्र है, ऐसे कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज भी बिल्कुल ठीक होकर जा रहे हैं या जो पहले से गंभीर बीमारियों के शिकार थे, वे भी पूर्णतया उपचारित होकर गये हैं। प्रमुख सचिव ने कहा, 'परेशानी केवल उन्हें हो रही है जो आखिरी समय में अस्पताल आ रहे हैं इसलिए जैसे ही लक्षण नजर आयें, तत्काल अस्पताल आयें।' उन्होंने आम जनता से अनुरोध किया कि उसे अपने इर्दगिर्द अगर ऐसे लक्षण वाले व्यक्ति मिलते हैं तो उसे बताइये। उनसे सामान्य व्यवहार करें। ना तो उनसे डरना है और ना ही उन्हें हीन दृष्टि से देखना है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि कल प्रयोगशालाओं में 4177 नमूनों की जांच की गयी जबकि 3740 नये नमूने भेजे गये। प्रदेश में पूल टेस्टिंग लगातार हो रही है। पूल टेस्टिंग शुरू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रसाद ने बताया कि कल 349 पूल की टेस्टिंग की गयी है और पूल में 1649 सैम्पल लगाये गये। इनमें से आठ पूल पॉजिटिव पाये गये। टेली परामर्श के बारे में प्रसाद ने कहा कि बहुत से लोग लॉकडाउन के चलते अस्पताल में नहीं जा पा रहे हैं । ऐसे में टेली—परामर्श अधिक से अधिक होना चाहिए। प्रसाद ने प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से अनुरोध किया कि विभिन्न शहरों में जो डाक्टर टेली—परामर्श के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उसे नियमित रूप से नि:शुल्क प्रचारित एवं प्रसारित करें। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और उनके फोन नंबर देने चाहिए ताकि कोई भी बीमार व्यक्ति फोन कर सलाह ले सके। सरकारी और निजी दोनों ही डॉक्टर इस तरह की सुविधा दे रहे हैं। जितना अधिक टेली—परामर्श होगा, उतना ही घर से कम निकलना पड़ेगा। दवा लेकर घर पर ही ठीक हो सकते हैं। प्रसाद ने कहा कि एल—1 अस्पताल मूलत: उन लोगों के लिए हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण के बहुत हल्के लक्षण हैं या लक्षण है ही नहीं। एल—2 और एल—3 अस्पताल उन लोगों के लिए हैं, जिनकी स्थिति गंभीर है। छोटे बच्चे, अधिक उम्र वाले या पहले से गंभीर रूप से बीमार लोगों को एल—2 या एल—3 अस्पताल में भर्ती करना चाहिए। संवाददाता सम्मेलन में मौजूद अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि पूल टेस्टिंग का काफी लाभ मिला है... एक बार में पता लग जाता है कि कौन से पूल में कौन से लोग संक्रमित हैं या नहीं हैं। अवस्थी ने बताया कि गुणवत्तापरक टेस्टिंग और पूल टेस्टिंग मजबूत करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सीडीआरआई, आईआईटीआर और बीएसआईपी में टेस्टिंग कराने के लिए माइक्रोबायोलाजिस्ट और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की जाए।

सशस्त्र बल करेंगे ‘फ्लाई-पास्ट’, अस्पतालों पर बरसाएंगे फूल

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि सशस्त्र बल ‘फ्लाई-पास्ट’ कर, कोविड-19 रोगियों के इलाज में जुटे अस्पतालों पर फूल बरसा कर और नौसेना के जहाजों को प्रकाशमान कर ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार जताएंगे। सेना के तीनों अंगों (थल सेना, वायुसेना और नौसेना) के प्रमुखों के साथ एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में जनरल रावत ने कहा कि कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिये राष्ट्र एकजुटता के साथ खड़ा है और इस महामारी से शीघ्र उबरने की क्षमता प्रदर्शित की है। उन्होंने कहा, ''हम उन सभी ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार प्रकट करते हैं, जो हमें सुरक्षित रखने के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं।’’ सीडीएस ने कहा कि भारतीय वायुसेना ‘कोरोना योद्धाओं’ के प्रति आभार प्रदर्शित करने के लिये तीन मई को देश भर में ‘फ्लाई-पास्ट’ करेगी। संवाददाता सम्मेलन में सीडीएस जनरल रावत के साथ थल सेना प्रमुख एम एम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मवीर सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया भी उपस्थित थे। जनरल रावत ने कहा कि वायुसेना ‘कोरोना योद्धाओं’ को धन्यवाद देने के लिये श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) से तिरूवनंतपुरम (केरल) तक और डिब्रूगढ़ (असम) से लेकर कच्छ (गुजरात) तक ‘फ्लाई-पास्ट’ करेगी। वायुसेना के लड़ाकू विमान तीन मई की शाम को फ्लाई-पास्ट में भाग लेंगे। सीडीएस ने कहा कि नौसेना के हेलीकॉप्टर कोविड-19 रोगियों का इलाज कर रहे अस्पतालों पर फूल बरसाएंगे। जनरल रावत ने कहा कि थल सेना लगभग प्रत्येक जिले में कुछ कोविड-19 अस्पताल के सामने माउंटेन बैंड का प्रदर्शन करेगी, जबकि नौसेना के जहाज ‘कोरोना योद्धाओं’ का आभार जताने के लिये विशेष अभ्यास करेंगे और जहाजों को प्रकाशमान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल उन लोगों के पीछे मजबूती से खड़ा है, जो कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहे हैं। जनरल रावत ने जोर देते हुए कहा कि कोविड-19 के चलते कोई अभियान कार्य प्रभावित नहीं हुआ है और न प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि इस निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है कि कोरोना वायरस महामारी जैविक (बायोलॉजिकल) युद्ध का परिणाम है।

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एक राष्ट्र-एक राशनकार्ड योजना

केन्द्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि बिहार और पंजाब सहित पांच और राज्य 'एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड' योजना में शामिल हो गये हैं। इन्हें मिलाकर अब तक कुल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 60 करोड़ लाभार्थियों को राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी का फायदा मिल रहा है। 'एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड' पहल के तहत, पात्र लाभार्थी एक ही राशन कार्ड का उपयोग करते हुये देश के किसी भी राज्य में स्थित उचित मूल्य की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के तहत अपने कोटे का खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं। खाद्य मंत्रालय एक जून से पूरे देश में इस सुविधा को लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। पासवान ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘आज 5 और राज्यों- बिहार, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा दमन और दीव को ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड प्रणाली’ के साथ जोड़ा गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस साल एक जनवरी को, 12 राज्य परस्पर एक दूसरे से जुड़े थे और अब 17 राज्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की इस एकीकृत प्रबंधन व्यवस्था के तहत आ गये हैं। इन राज्यों की राशन व्यवस्था परस्पर एक दूसरे से जुड़ गई है। एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘‘17 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के लगभग 60 करोड़ लाभार्थी राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी से लाभान्वित हो सकते हैं और वे मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके सब्सिडी वाले खाद्यान्न खरीद सकते हैं।’’ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा 12 राज्य हैं जहां राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी लागू की गई है। इनमें लाभार्थी दूसरे राज्य में अपनी पात्रता का 50 प्रतिशत अनाज उठा सकते हैं। देश में 81 करोड़ से अधिक लाभार्थी एनएफएसए के तहत पंजीकृत हैं। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को एक से तीन रुपये किलो की दर पर पांच किलो के सब्सिडी वाले खाद्यान्न उपलब्ध कराये जाते हैं। हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से कहा था कि वह कोरोनावायरस लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रवासी श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को सब्सिडी युक्त खाद्यान्न प्राप्त करने योग्य बनाने के लिए अस्थायी रूप से 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' अपनाने की व्यवहारिकता पर गौर करे।

बेहतर निवेश गंतव्य के तौर पर बढ़ावा दें

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय मिशनों का आह्वान किया है कि वे घरेलू कंपनियों और निर्यातकों के लिए कारोबारी अवसरों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह भारत को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में पेश करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गोयल बृहस्पतिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मिलकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विभिन्न देशों में स्थित 131 मिशनों के साथ परिचर्चा कर रहे थे। गोयल ने कहा कि सभी को कोविड-19 से पैदा हुई स्थिति को अवसरों में बदलने के लिए काम करना चाहिए और घरेलू उद्योगों में सुधार के लिए नए सुधारों के साथ आगे आना चाहिए। एक आधिकारिक बयान में गोयल के हवाले से कहा गया है, ‘‘हमें तीन गुना ऊंची आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य के लिए काम करना चाहिए। उच्चस्तर पर विचार-विमर्श हुआ है जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कोविड-19 के बाद के अवसरों को छोड़ा न जाए।’’ गोयल ने कहा कि करीब 100 देशों को भारतीय दवाइयों से लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि अब दुनिया के देश ऐसे राष्ट्र की तलाश कर रहे हैं जहां कामकाज में पारदर्शिता हो, कानून का शासन हो और वह विश्वसनीय हो। गोयल ने कहा कि भारतीय मिशन उनके देशों में मौजूद अवसरों की पहचान में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि निवेश एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) कारखाने और विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए एकल खिड़की प्रणाली पर काम कर रहा है।

बंगाल सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा

पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को केंद्र को पत्र लिख कर जोर देते हुए कहा कि राज्य में 10 नहीं, बल्कि चार ही जिले ‘रेड जोन’ हैं। दरअसल, राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ कैबिनेट सचिव की वीडियो कांफ्रेंस के दौरान प्रस्तुत की गई सूची में राज्य में 10 ‘रेड जोन’ होने का केंद्र सरकार ने जिक्र किया था। स्वास्थ्य विभाग में प्रधान सचिव विवेक कुमार ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में इस सूची को ‘‘एक त्रुटिपूर्ण आकलन’’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र द्वारा निर्धारित मानदंडों को ध्यान में रखते हुए चार ‘रेड जोन'-कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर को घोषित किया है। कुमार ने पत्र में ‘रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन’ वाले राज्य के जिलों और इलाकों का सही वर्गीकरण भी संलग्न किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में अभी आठ जिले ‘ग्रीन जोन’ में हैं जबकि 11 जिले ‘ऑरेंज जोन’ में हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 के मामलों- संक्रमण के मामले दोगुना होने की दर, जांच का दायरा और निगरानी से जुड़े विवरण के आधार पर देश में 130 जिलों को ‘रेड जोन’ में, 284 ‘ऑरेंज जोन’ में और 319 ‘ग्रीन जोन’ में हैं। मंत्रालय के मुताबिक बंगाल के 10 जिले--कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पश्चिमी मिदनापुर, पूर्वी मिदनापुर, दार्जीलिंग, जलपाईगुड़ी, कलीमपोंग और मालदा, ‘रेड जोन’ में हैं। इस वर्गीकरण की घोषणा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में 30 अप्रैल को मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ हुई एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान की गई थी।

कोविड-19 जांच किट उत्पादन का लाइसेंस

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली देश का पहला शिक्षण संस्थान है जिसने कोविउ-19 जांच की किट विकसित की है और अब वह इसके वाणिज्यिक उत्पादन के लिए कंपनियों को खुली लाइसेंस देगा लेकिन कीमत की शर्त होगी। आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित किट को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से मंजूरी मिलने के बाद करीब 40 कंपनियों ने संपर्क किया है। हालांकि, आईआईटी दिलली उसी कंपनी को लाइसेंस देगा जो उसके गुणवत्ता मानकों को पूरा करेगी। इस जांच के तीन हफ्ते में बाजार में आने की उम्मीद है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक वी रामगोपाल ने बताया, ‘‘कई बड़ी कंपनियों सहित करीब कंपनियों ने जांच के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए संपर्क किया है। हम उन कंपनियों को खुला लाइसेंस देंगे जो हमारे मानकों को पूरा करेंगे। हम लाइसेंस देने के साथ कीमत की भी शर्त लगाएंगे ताकि एक बार किट का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने पर वे इसकी कीमत नहीं बढ़ाए। यह जांच किट तीन हफ्ते में बाजार में आने की उम्मीद है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जांच किट में रुचि दिखाने वाली कंपनियों को प्रश्नावली भेजी गई है। हमने मानक तय किए हैं जिनमें गुणवत्ता जांच और विनिर्माण में कपंनी का अनुभव शामिल है। हम जल्द ही कंपनी का चयन कर लेंगे और उत्पादन संस्थान के साथ साझेदारी में होगा। अभी तक हमने तीन कंपनियों की पहचान की है।’’ कीमत के बारे में राव ने बताया कि यह 500 रुपये से कम होगा। निदेशक ने कहा, ‘‘जांच पद्धति में प्रति जांच 200 से 300 रुपये का खर्च आता है। ऐसे में कुल खर्च 500 रुपये से अधिक नहीं आएगा। अगर कुछ कंपनिया नैगेमिक सामाजिक जवाबदेही (सीएसआर) के तहत इनका उत्पादन करती हैं तो यह कीमत और भी कम हो सकती है।’’ उल्लेखनीय है कि इस किट से कोविड-19 जांच पर आने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी और देश की बड़ी आबादी के लिए वहनीय होगा। इस जांच किट को आईआईटी दिल्ली ने विकसित किया है और आईसीएमआर ने पिछले हफ्ते इसको अपनी मंजूरी दी। आईआईटी दिल्ली पहला शिक्षण संस्थान है जिसके द्वारा विकसित वास्तविक समय पीसीआर आधारित जांच पद्धति को आईसीएमआर से मंजूरी मिली है। यह ऐसे समय सफलता मिली है जब चीन से आयातित त्वरित जांच किट के नतीजों सही नहीं आने पर आईसीएमआर ने उन किट से जांच पर रोक लगा दी थी। आईआईटी दिल्ली की यह जांच कोरोना वायरस के ज्ञात आरएनए श्रृंखला की सार्स कोव-2 जीनोम की तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है। किट विकसित करने वाले दल का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर विवेकानंद पेरुमल ने बताया, ''तुलनात्मक श्रृंखला अध्ययन से हमने कोविड-19 के विशेष हिस्से की पहचान की। यह हिस्सा मानव को संक्रमित करने वाले कोरोना परिवार के अन्य वायरस में नहीं होता है जिससे हमें कोविड-19 की पहचान करने का मौका मिला।’’ उन्होंने बताया, ''नये किट में कोविड-19 के विशेष इलाके में बढ़ने वाले प्रोटीन की पहचान की जाती है और वास्तविक समय में पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन के आधार पर जांच की जाती है।’’ गौरतलब है कि पीएचडी छात्र प्रशांत प्रधान, आशुतोष पांडे और प्रवीण त्रिपाठी, पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ.पारुल गुप्ता और डॉ. अखिलेश मिश्रा और प्रोफेसर विवेकानंद पेरुमल, मनोज बी मेनन, जेम्स गोमज़ और विश्वजीत कुंडू इस शोध में दल में शामिल हैं।

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महाराष्ट्र में 227 पुलिसकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित

महाराष्ट्र में 30 अधिकारियों सहित 227 पुलिसकर्मियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इनमें से 66 पुलिसकर्मी बृहस्पतिवार से शुक्रवार के बीच संक्रमित हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि संक्रमित पुलिस कर्मियों में नासिक जिले में अधिक संक्रमित स्थान (हॉटस्पॉट) के तौर पर चिह्नित मालेगांव में सुरक्षा के लिए तैनात रिजर्व पुलिस के जवान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 227 संक्रमित पुलिसकर्मियों में 22 आरक्षी और आठ पुलिस अधिकारी संक्रमण मुक्त हो चुके हैं जबकि 172 आरक्षी और 22 अधिकारियों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। वहीं तीन पुलिस अधिकारियों की मौत हुई है। ये सभी अधिकारी मुंबई के हैं। राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 10 हजार के पार हो चुकी है। अधिकारी ने बताया कि महामारी को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मी 24घंटे काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस पर हमले की 167 घटनाएं सामने आई हैं और इन मामलों में 627 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि राज्य में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी अधिकारी के कानूनी आदेश की अवेहलना) के तहत 87,391 मामले दर्ज किए गए हैं और 17,632 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान 1,240 मामले गैर कानूनी ढंग से ढुलाई करने के मामले में दर्ज किया है और 50,827 अधिक वाहनों को जब्त किया है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में तीन करोड़ दस लाख रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया है।

निषिद्ध क्षेत्रों से आवागमन अभी शुरू नहीं होगा

महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर कहा कि लॉकडाउन के दौरान मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और पिंपरी चिंचवड़ के लोगों को तब तक शहर से बाहर कहीं आने जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक इन क्षेत्रों के निकाय आयुक्त निषिद्ध क्षेत्रों (कन्टेनमेंट जोन) की सीमाओं पर कोई निर्णय नहीं लेते। आदेश में कहा गया कि मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और पिंपरी चिंचवड़ से दूसरे जिलों में जाने के लिए बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह तब तक शुरू नहीं किया जाएगा जब तक निकाय आयुक्त निषिद्ध क्षेत्रों की सीमा निर्धारित नहीं कर लेते। आदेश के अनुसार संक्रमण से अधिक प्रभावित क्षेत्रों जैसे मालेगांव, सोलापुर, अकोला, अमरावती, यवतमाल, औरंगाबाद और नागपुर से आवागमन की अनुमति देने से पहले बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

केरल में नया मामला सामने नहीं आया

केरल में पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस के मामलों में मामूली वृद्धि होने के बाद शुक्रवार को कोई नया मामला सामने नहीं आया, जो राज्य के लिए राहत की बात है। राज्य में हॉटस्पॉट्स की संख्या 80 हो गई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कहा, ‘‘शुक्रवार को कोई नया मामला सामने नहीं आया और 9 लोगों के नमूनों की जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुयी। राज्य में 102 लोगों का इलाज चल रहा।’’ ऐसा 17 मार्च और 18 मार्च को भी हुआ था, जब कोई भी नये मामले सामने नहीं आए थे। एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कन्नूर और कासरगोड के चार-चार लोग और एर्नाकुलम के एक व्यक्ति को आज जांच में संक्रमणरहित पाया गया। मंत्री ने कहा कि अब तक 392 लोगों को इलाज होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है और 102 लोगों का वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 21,499 लोग निगरानी में हैं, जिनमें से 432 विभिन्न अस्पतालों में हैं। केरल में अब कोविड-19 के 80 हॉटस्पॉट हो गए हैं, जिनमें 10 की घोषणा शुक्रवार को हुई है, जिनमें से आठ तिरुवनंतपुरम के हैं।

जंग में कोई कुप्रबंधन नहीं

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कोविड-19 से निपटने की लड़ाई में कुप्रबंधन के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए शिअद और ‘आप’ से अपील की कि वे ओछी राजनीति करने के बजाय संकट की इस घड़ी में एकजुट होकर काम करें। मुख्यमंत्री ने टेलीविजन पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में ना ही कोविड-19 को लेकर कोई कुप्रबंधन है ना ही वायरस के अधिक मामले हैं, जैसे कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ‘‘अब अधिकतर वे लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं जो दूसरे राज्य से आए हैं।’’ उन्होंने कहा कि स्थानीय संक्रमण के सात ही नए मामले हैं जबकि अन्य राज्यों से आए 93 लोग संक्रमित पाए गए हैं। सिंह ने कहा कि यह समय ओछी राजनीति करने का नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि बीमारी को लेकर राज्य में ‘‘ झूठी खबरें फैलाकर लोगों में तनाव उत्पन्न ना करें’’ बल्कि संकट की इस घड़ी से निकलने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करें। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि आने वाले दिनों में यदि वायरस के मामले अचानक बढ़ें तो घबराएं नहीं क्योंकि केन्द्र के देशभर में फंसे हुए लोगों को गृह निवास जाने की अनुमति देने के बाद राज्य में बाहर से अधिक लोग आएंगे। पंजाब में पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस के मामले बढ़े हैं, जिनमें अधिकतर महाराष्ट्र के नांदेड़ से लौटे श्रद्धालु हैं। पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नांदेड़ स्थित हुजूर साहिब से लौटे करीब 3,500 श्रद्धालुओं में कम से कम 115 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। कोविड-19 से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए कदमों की विपक्ष द्वारा की जा रही आलोचना पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुश्किल समय में कोई भी कुछ भी नकारात्मक नहीं सुनना चाहता। ‘‘ लोग वैसे ही नकारत्मक समय से गुजर रहे हैं और अब केवल सकारात्मक और अच्छा सुनना चाहते हैं।’’ सिंह ने विपक्ष से पंजाब के हित में उनकी सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम एक युद्ध लड़ रहे हैं और यह वक्त गंदी राजनीति कर अपना कद बढ़ाने का नहीं बल्कि एकता दिखाने का है।

उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पांच मई से

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पांच मई से शुरू करने का निर्णय किया गया है। प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव को लिखे पत्र में कहा है कि 2020 की बोर्ड की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पांच मई से शुरू करने का निर्णय किया गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि मार्च में संपन्न हुई हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में कुल करीब 56 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए। इन परीक्षाओं की लगभग तीन करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया जाना है। नीना श्रीवास्तव के मुताबिक, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 25 मई, 2020 तक पूरा कराया जाएगा जिससे शैक्षणिक सत्र नियमित करने में मदद मिल सके। प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर ऐसे व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहेगा जिनका मूल्यांकन कार्य से कोई लेनादेना नहीं है। इसके अलावा, मूल्यांकन कार्य क्रियाशील सीसीटीवी कैमरों के सामने ही संपादित कराया जाएगा। इस दौरान मूल्यांकन केंद्र पर किसी भी परीक्षक या कर्मचारी को मोबाइल फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। पत्र के मुताबिक, मूल्यांकन केंद्रों पर कोरोना वायरस से बचाव के लिए निश्चित दूरी और सुरक्षा के अन्य दिशानिर्देशों का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

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आप विधायक कोरोना पॉजिटिव

दिल्ली विधानसभा में करोलबाग सीट से आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक विशेष रवि ने शुक्रवार को कहा कि उनमें कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। रवि ने बताया कि उनका भाई भी कोरोना वायरस से संक्रमित है। उन्होंने बताया, ''मैं अभी घर में ही पृथक-वास में हूं। मुझमें संक्रमण का कोई लक्षण नहीं है लेकिन जांच में कोरोना वायरस का संक्रमण होने की पुष्टि हुई है।’’ रवि आम आदमी पार्टी के तीन बार से विधायक हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र में राहत कार्य में सक्रिय रूप से शामिल थे। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार रात तक दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल 3,515 मामले सामने आए हैं जिनमें से 1,100 लोगों के ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। दिल्ली में इस समय 2,362 लोगों को इलाज चल रहा है और 59 लोगों की कोविड-19 की वजह से मौत हुई है।

सराहनीय कार्य

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से एंबुलेंस के जरिये तीन हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर एक छात्र का शव मिजोरम के आइजोल पहुंचाने वाले दो चालकों को उनके मानवीय कार्य के लिये नायकों जैसा सम्मान दिया गया। मिजोरम के मुख्यमंत्री और राज्य की जनता ने उनकी इस नि:स्वार्थ सेवा को जमकर सराहा है। दोनों वाहन चालक बारी-बारी से एंबुलेंस चलाकर विवियन ललरेमसंगा नामक व्यक्ति का शव आइजोल ले गए। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें इतना लंबा सफर तय करना पड़ेगा। चेन्नई के पुरासावक्कम में अन्नाई कस्तूरी एंबुलेंस सेवा के वाहन चालकों पी जयंथीरन और चिन्नाथांबी ने कहा, 'अचानक इतनी लंबी यात्रा... मिजोरम के लोगों और उनके मुख्यमंत्री (ज़ोरमथांगा) की प्रशंसा पाना तथा आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की ओर से शानदार स्वागत हमारे जीवन का अविस्मरणीय क्षण था।' उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारा किसी नायक की तरह स्वागत किया जाएगा। हमें बस यही लगा था हमारी अच्छी तरह मेहमान नवाजी की जाएगी।' दोनों चालकों ने 24 अप्रैल को मध्यरात्रि से यात्रा शुरू की थी और 27 अप्रैल शाम चार बजे वे वहां पहुंच गए थे। इससे पहले दोनों वाहन चालक, हृदयाघात के कारण जान गंवाने वाले छात्र ललरेमसंगा का शव स्वेच्छा से आइजोल के मॉडल वेंग में उसके घर ले जाने के तैयार हुए थे। लॉकडाउन के दौरान शव को ले जाने का इंतजाम नहीं होने के कारण चेन्नई मिजो वेलफेयर एसोसिएशन उसे यहीं पर दफनाने के लिये तैयार हो गया था, लेकिन इसी दौरान रोया पेट्टा सरकारी अस्पताल ने शव को मिजोरम ले जाने के लिये एंबुलेंस सेवा के मालिक नंदकुमार से संपर्क किया। नंदकुमार ने फौरन अपने ड्राइवरों से पूछा कि क्या वह इस मुश्किल सफर पर जा सकते हैं। दो दशक से ज्यादा समय से वाहन चालक के तौर पर काम कर रहे जयंथीरन, चिन्नाथांबी के साथ इस सफर पर निकलने के लिये तैयार हो गए। चेन्नई मिजो वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. ललवेना ने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान अपने जीवन को खतरे में डालकर विवियन ललरेमसंगा का शव ले जाना एक महान मानवीय कार्य है।' उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों ने उनकी मदद की। तंजावुर के रहने वाले जयंथीरन ने कहा, 'यह मिज़ोरम की हमारी पहली यात्रा थी और बिना रुके चेन्नई से 3,345 किलोमीटर दूर शव पहुंचाने का पहला सफल प्रयास था। हमें बताया गया था कि लगभग 3,100 किलोमीटर की दूरी तय करनी है, लेकिन हमें मॉडल वेंग तक पहुंचने के लिए 200 किमी अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी।' चिन्नाथांबी ने कहा "हम मॉडल वेंग तक पहुंचने तक रोटी या बन खाकर गुजारा करते रहे। अब हम आराम कर रहे हैं। लोगों ने हमें घर लौटने से पहले खाने का पर्याप्त सामान दिया है। थकाऊ यात्रा के दौरान फिलहाल हम कोलकाता में आराम कर रहे हैं। हम कल सुबह या शाम तक चेन्नई पहुंच जाएंगे।'' मिजोरम के लोगों के अलावा वहां के सामाजिक कल्याण मंत्री के बीछुआ ने मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें नकद ईनाम भी दिया है। मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने अपने ट्वीट में इस शिष्टाचार का जिक्र करते हुए एंबुलेस की यात्रा संबंधी सभी रुकावटें दूर करने के लिये तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी का आभार व्यक्त किया है। 

87 हजार लोगों ने कराया पंजीकरण

लॉकडाउन के कारण उत्तराखंड के बाहर फंसे करीब 87 हजार लोग घर लौटने के लिये सरकार के पास अपना पंजीकरण करा चुके हैं और इनमें से अधिकांश लोग प्रदेश के पर्वतीय जिलों के हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा राज्य के बाहर फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस राज्य में लाने की तैयारियों की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गयी। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य से बाहर फंसे लोगों को वापस लाने की जिम्मेदारी संभाल रहे सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि अभी तक 87 हजार लोगों ने उत्तराखंड वापस आने के लिए अपना पंजीकरण कराया है और इनमें से अधिकांश लोग पर्वतीय जिलों के हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित राज्यों से समन्वय बनाते हुए सुनियोजित तरीके से सारी व्यवस्था की जाए और इसमें पूरी सावधानी के साथ सामाजिक दूरी, मास्क, सेनेटाइजेशन आदि मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। रावत ने कहा कि वापस लाये जाने वाले लोगों की कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत समुचित स्क्रीनिंग की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप ही सारी कार्यवाही होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि राज्य में आने पर यदि होम क्वारंटीन किया जाता है तो यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उसका सख्ती से पालन हो। उन्होंने कहा कि इसके लिये आवश्यक होने पर ग्राम प्रधानों को कुछ अधिकार दिये जा सकते हैं।

कोविड-19 से संक्रमित

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की दिल्ली स्थित बटालियन के 12 और जवान शुक्रवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीआरपीएफ के ये कर्मी राष्ट्रीय राजधानी के मयूर विहार फेज-3 में स्थित 31वीं बटालियन से संबंधित हैं। बल के 52 कर्मियों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने और एक कर्मी की मौत के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुल 112 कर्मियों के नमूने लिये गए, जिनमें से 12 कर्मी कोविड-19 से संक्रमित पाए गए। इसके साथ ही बल की इस टुकड़ी में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। उन्होंने कहा कि सभी कर्मी वायरल संक्रमण से जूझ रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इससे पहले उप-निरीक्षक रैंक के 55 वर्षीय अधिकारी की मंगलवार को कोविड-19 संक्रमण के चलते मौत हो गई थी।

स्वास्थ्य और पुलिस कर्मी

कोविड-19 महामारी से मुकाबला कर रहे स्वास्थ्य और पुलिस कर्मियों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन विपरीत परिस्थितियों में स्वास्थ्य और पुलिस कर्मी अपनी सामान्य ड्यूटी से अधिक काम कर रहे हैं। सिंह ने स्वास्थ्य और पुलिस कर्मियों को 4,900 सुरक्षा उपकरण प्रदान किए। इन सुरक्षा उपकरणों को केंद्रीय भंडार द्वारा तैयार किया गया है। सिंह ने कहा कि देश कई हफ्तों से कोरोना वायरस से युद्ध कर रहा है। उन्होंने कहा, “देशव्यापी लॉकडाउन का पालन करते हुए अधिकतर नागरिक जहां घरों में हैं वहीं चिकित्सा और पुलिस विभाग के कर्मी इस कठिन समय में अपनी सामान्य ड्यूटी से आगे बढ़कर काम कर रहे हैं।” कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग राज्यमंत्री सिंह ने शुक्रवार को अपने घर पर आयोजित एक छोटे समारोह में सेनिटाइजर इत्यादि समेत 4900 सुरक्षा उपकरण स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों को प्रदान किए।

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बड़ी पीड़ा से बचाव भी हुआ

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि लॉकडाउन के कारण देश में आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है लेकिन इसने देश को बड़ी पीड़ा से बचाया है। उन्होंने कहा कि देश भर में लागू लॉकडाउन को सिर्फ तभी हटाया जाना चाहिये, जब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित हो जाये। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये देश भर में 25 मार्च से लॉकडाउन (बंद) लागू है। पहले बंद 14 अप्रैल को समाप्त होने वाला था, लेकिन बाद में इसे तीन मई तक के लिये बढ़ा दिया गया। अब जब तीन मई की तारीख पास आ गयी है, एक बार फिर से इस बात को लेकर बहस तेज हो गयी है कि अब बंद को समाप्त कर देना चाहिये या बढ़ाया जाना चाहिये। कुमार ने इस बारे में कहा, ‘‘अधिक धैर्य की आवश्यकता है। हम तब तक बचाव को कम नहीं कर सकते हैं जब तक इस बात का भरोसा नहीं हो जाये कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में हैं और वायरस के प्रसार पर काबू पा लिया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि लॉकडाउन ने भारत को बहुत बड़ी पीड़ा से बचाया है और संक्रमण मामलों की संख्या नियंत्रण में है।'' कुमार ने कहा कि जब तक बंद जारी रहेगा, आर्थिक गतिविधियां सुस्त बनी रहेंगी, लेकिन "अर्थव्यवस्था में मांग बनी होनी चाहिये" और इसके लिये लॉजिस्टिक्स के मामले पर ध्यान दिया जा सकता है। एसबीआई चेयरमैन ने यह भी कहा, ''मुझे लगता है कि हम अब इस बात से कुछ ही दिन दूर हैं, जब लॉकडाउन पूरी तरह से हटाया जा सकता है। कुछ राज्य खराब स्थिति में हैं। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश भर में संक्रमण से मुक्त क्षेत्रों की संख्या बढ़े।’’ कुमार ने कहा कि यदि लोग इस दौरान अनुशासन बनाये रखते हैं, तो संक्रमण की रफ्तार को कम किया जा सकता है और नये मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि रुक सकती है। उन्होंने कहा, "हमें नतीजे मिल रहे हैं, क्योंकि मरीजों के सही होने की दर 25 फीसदी से ज्यादा है।"

कोरोना सबसे बड़ी चिंता, उसके बाद नौकरी, अपराध

एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार शहरी भारतीयों के लिए कोरोना वायरस सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उसके बाद बेरोजगारी, अपराध, गरीबी और असमानता जैसे विषय आते हैं। हालांकि, सर्वेक्षण में भाग लेने वाले अधिकतर भारतीय लोगों ने कहा कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘‘व्हाट वरीज द वर्ल्ड' सर्वेक्षण के अनुसार वैश्विक नागरिकों के लिए भी कोविड-19 प्रमुख चिंता का विषय है और कम से कम 61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसे प्रमुख कारण बताया। सर्वेक्षण के अनुसार शहरी भारतीयों ने कई मुद्दों का जिक्र किया जो उन्हें परेशान करते हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि 62 प्रतिशत भारतीय लोगों ने कोविड-19 का जिक्र किया जबकि 38 प्रतिशत लोगों ने बेरोजगारी, 24 प्रतिशत ने अपराध और हिंसा और 21 प्रतिशत लोगों ने गरीबी और सामाजिक असमानता को कारण बताया। सर्वेक्षण में शामिल भारतीयों में से 65 प्रतिशत को लगता है कि देश सही दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि ज्यादातर वैश्विक नागरिकों का मानना था कि उनका देश गलत रास्ते पर है। यह सर्वेक्षण 28 देशों में आईपीएसओएस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए किया गया। इन देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, अमेरिका आदि शामिल थे। यह सर्वेक्षण 20 मार्च से तीन अप्रैल के बीच कराया गया और इसमें कुल 19,505 लोगों ने भाग लिया।

शब्दकोश देखने ‘दौड़े’ लोग!

इतालवी प्रधानमंत्री ग्यूसेप कोंते ने जब कहा कि सरकार कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से करीब आठ हफ्तों से चले आ रहे लॉकडाउन से देश के कुछ हिस्सों में रियायत देगी तो ऐलान से खुश इटलीवासी अचानक ही शब्दकोश में कुछ शब्दों को तलाशने लगे। कोंते ने दरअसल घोषणा की कि चार मई से इटली के लोगों को अपने “कॉनज्यूनिटी” के साथ अपने गृह क्षेत्र में घूमने के लिये यात्रा की इजाजत होगी। “कॉनज्यूनिटी” औपचारिक इतालवी शब्द है जिसका मतलब या तो रिश्तेदार, संबंधी या प्रियजन हो सकता है। बंद के दौरान इतालवी लोगों को आवश्यक सेवाओं या राशन की खरीद जैसे महत्वपूर्ण कामों के लिये ही घर से निकलने की इजाजत है। ऐसे में कई हफ्तों से घर में रहकर बोर हो चुके इटली वालों ने स्पष्टीकरण मांगा। कौन सा रिश्तेदार ? कौन सा संबंध ? क्या दूर के रिश्ते का भाई-बहन स्वजन हो सकते हैं ? क्या साला, जीजा या अन्य रिश्तेदार इस दायरे में आएंगे ? ऐसे में अचानक ही डिक्शनरी में ‘कॉनज्यूनिटी’ शब्द के मायने खोजने वालों की खासी तादाद नजर आई।

-नीरज कुमार दुबे