GST Collection ने तोड़े सारे Record, अप्रैल में सरकारी खजाने में आए 2.43 लाख करोड़ रुपये

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Ankit Jaiswal । May 1 2026 9:00PM

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह ने अप्रैल में 2.43 लाख करोड़ रुपये का सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों का सूचक है। इस वृद्धि में आयात से प्राप्त राजस्व की अहम भूमिका रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत का व्यापार और खपत का आधार स्थिर बना हुआ है।

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है, जहां वस्तु एवं सेवा कर संग्रह ने अप्रैल महीने में नया रिकॉर्ड बना दिया। मौजूदा हालात में, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, उसके बावजूद भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई दिख रही हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में कुल जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक स्तर है। यह पिछले साल अप्रैल में हुए 2.23 लाख करोड़ रुपये के संग्रह के मुकाबले लगभग 8.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

बता दें कि रिफंड यानी वापसी राशि को घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं अप्रैल महीने में रिफंड का भुगतान भी तेजी से बढ़ा है और यह 19.3 प्रतिशत बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस वजह से शुद्ध राजस्व 2,10,909 करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि इस बार जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी का बड़ा कारण आयात से मिलने वाला राजस्व रहा है। आयात से कुल संग्रह 25.8 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 57,580 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले घरेलू लेन-देन से मिलने वाला संग्रह 4.3 प्रतिशत बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा है।

अगर शुद्ध आंकड़ों की बात करें तो आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व 42.9 प्रतिशत तक उछला है, जबकि घरेलू स्तर पर शुद्ध संग्रह में बहुत मामूली 0.3 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयात गतिविधियां इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा रही हैं।

बता दें कि इससे पहले मार्च महीने में भी जीएसटी संग्रह मजबूत रहा था, जहां शुद्ध संग्रह 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो पिछले साल के मुकाबले 8.2 प्रतिशत अधिक था। मार्च में भी कुल संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया था।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। वहीं शुद्ध संग्रह 7.1 प्रतिशत बढ़कर 19.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे बड़े औद्योगिक और व्यापारिक राज्य अब भी जीएसटी संग्रह में सबसे ज्यादा योगदान देने वालों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े देश में खपत, व्यापार और उत्पादन की स्थिरता को दिखाते हैं, जो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

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