चालू वित्त वर्ष में 18,000 लोगों को नौकरी देगी इंफोसिस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जुलाई 13, 2019   17:44
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चालू वित्त वर्ष में 18,000 लोगों को नौकरी देगी इंफोसिस
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देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में वह 18,000 लोगों को नौकरी देगी। इंफोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी यू. बी. प्रवीण राव ने कहा कि चालू तिमाही में हम 8,000 लोगों नौकरी पर रखने के करीब हैं। इसमें से करीब 2,500 फ्रेशर्स हैं।

बेंगलुरु। देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में वह 18,000 लोगों को नौकरी देगी। इंफोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी यू. बी. प्रवीण राव ने कहा कि चालू तिमाही में हम 8,000 लोगों नौकरी पर रखने के करीब हैं। इसमें से करीब 2,500 फ्रेशर्स हैं। 

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पूरे साल में हम करीब 18,000 लोगों को नौकरियां देंगे। इसमें बड़ी संख्या विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से होने वाले कैंपस प्लेसमेंट की होगी। इंफोसिस के कर्मचारियों की संख्या 2.29 लाख से ज्यादा है।







संकट से जूझ रहे PMC बैंक को लेकर RBI ने दिया ये बड़ा बयान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   18:47
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संकट से जूझ रहे PMC बैंक को लेकर RBI ने दिया ये बड़ा बयान
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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि पीएमसी बैंक के समाधान की दिशा में शुरुआती प्रतिक्रिया ‘सकारात्मक’ दिखी है।बैंक और उसका प्रबंधन पूरी तरह से निवेशकों के साथ काम में लगा हुआ है। जिन निवेशकों ने सूचना ज्ञापन लिया है प्रबंधन उनके साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है।

मुंबई। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि संकट से जूझ रहे पंजाब एण्ड महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी) बैंक के पुनरूद्धार के लिये संभावित निवेशकों की ओर से मिली प्रतिक्रिया अब तक ‘‘सकारात्मक’’ रही है। धोखाधड़ी का शिकार हुये इस बहु-राज्यीय शहरी सहकारी बैंक ने पिछले महीने पुनरुद्धार के लिये संभावित निवेशकों से उसमें निवेश और इक्विटी भागीदारी के लिये रुचि पत्र आमंत्रित किये हैं। इसके लिये सूचना ज्ञापन जारी करने की समयसीमा 20 नवंबर और बोली पूर्व स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिये 30 नवंबर की तिथि तय की गई थी। आरबीआई की द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करने के बाद गवर्नर दास ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब तक जो प्रतिक्रिया दिखी है वह सकारात्मक रही है।बैंक और उसका प्रबंधन पूरी तरह से निवेशकों के साथ काम में लगा हुआ है। जिन निवेशकों ने सूचना ज्ञापन लिया है प्रबंधन उनके साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है।’’

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दास ने कहा कि संभावित निवेशकों द्वारा रुचि पत्र सौंपने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर है। ‘‘देखते हैं क्या प्रतिक्रिया रहती है, उसके बाद ही हम इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख ले सकते हैं।’’ रिजर्व बैंक ने सितंबर 2019 को पीएमसी बैंक के निदेशक मंडल को हटाकर उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।इसके साथ ही बैंक पर कई तरह के नियामकीय प्रतिबंध भी लगा दिये गये थे।बैंक में वित्तीय अनियमिततायें पाये जाने के बाद यह निर्णय लिया गया।रीयल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल को दिये गये कर्ज के बारे में भ्रामक जानकारी और तथ्यों को छिपाया गया। केन्द्रीय बैंक ने इस साल सितंबर में ए.के. दिक्षित को बैंक का नया प्रशासक नियुक्त किया है। दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा जारी करते हुये कहा, ‘‘वित्तीय स्थिरता को बनाये रखने और हमारे एजेंडा में जमाकर्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दिये जाने के चलते हम दो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में स्थिति को तुरंत संभाल सके हैं।’’ वर्ष 2020 में निजी क्षेत्र के दो बैंकों -- यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक-- को बचाया गया है।







बैंकों को बचाने के लिए बांड, शेयरों को बट्टे खाते डालना जमाकर्ताओं के हित में:RBI गवर्नर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   18:35
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बैंकों को बचाने के लिए बांड, शेयरों को बट्टे खाते डालना जमाकर्ताओं के हित में:RBI गवर्नर
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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंकों को बचाने के मामले का कोई निश्चित तरीका नहीं हो सकता है।हर मामले में उसके हिसाब से समाधान करना पड़ सकता है।गौरतलब है कि इस साल मार्च में यस बैंकको डूबने से बचाने के दौरान 7,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 बांड को बट्टे खाते डाल दिया गया था।

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक को उबारने में बांडों और शेयरों में निवेश को बट्टे खाते डालने के केंद्रीय बैंक के निर्णय का शुक्रवार को बचाव किया। उन्होंने इसे जमाकर्ताओं के हित में उठाया गया वैध कदम बताया। दास ने कहा कि बैंकों को बचाने के मामले का कोई निश्चित तरीका नहीं हो सकता है। हर मामले में उसके हिसाब से समाधान करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस साल मार्च में यस बैंक को डूबने से बचाने के दौरान 7,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 बांड को बट्टे खाते डाल दिया गया था। जबकि लक्ष्मी विलास बैंक के मामले में करीब 320 करोड़ रुपये के टियर-2 बांड और लगभग सभी बकाया शेयरों को बट्टे खाते डाल दिया गया। इनमें से कई कदम अभूतपूर्व हैं और इससे प्रभावित होने वाले पक्षों ने अदालत का रुख किया।

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द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में दास ने कहा, ‘‘ यह कार्रवाई जमाकर्ताओं के हितों को देखते हुए की गयी। इन्हें अपनाने के दौरान नियामकीय दिशानिर्देश और वैध प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया गया।’’ उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ‘वित्त बाजार या अर्थव्यवस्था के अन्य किसी भी क्षेत्र को लेकर तटस्थ रुख रखता है।’ और बैंकों को डूबने से बचाने के लिए जो निर्णय लिए गए वह जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े थे। यही रिजर्व बैंक की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

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दास ने इस संबंध में ज्यादा विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया और कहा, ‘‘ हमारी सभी कार्रवाइयां कानून के दायरे में हैं। यह कानून सम्मत और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।’’ यस बैंक को डूबने से बचाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों में उसमें 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। वहीं लक्ष्मी विलास बैंक के मामले में रिजर्व बैंक ने उसका विलय डीबीएस बैंक में कर दिया।







पीएनबी घोटाला: मेहुल चौकसी की कंपनी के शीर्ष अधिकारी को नहीं मिली जमानत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   18:29
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पीएनबी घोटाला: मेहुल चौकसी की कंपनी के शीर्ष अधिकारी को नहीं मिली जमानत
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सीबीआई की विशेष अदालत ने करोड़ों रूपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में गिरफ्तार गीतांजलि समूह के उपाध्यक्ष विपुल चितालिया की जमानत याचिका शुक्रवार को यहां खारिज कर दी।

मुंबई। सीबीआई की विशेष अदालत ने करोड़ों रूपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में गिरफ्तार गीतांजलि समूह के उपाध्यक्ष विपुल चितालिया की जमानत याचिका शुक्रवार को यहां खारिज कर दी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चितालिया को मार्च 2018 में गिरफ्तार किया थाा। चितालिया ने उसके बाद दूसरी बार जमानत याचिका दायर की थी।

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विशेष सीबीआई न्यायाधीश वी सी बर्डे ने जमानत याचिका खारिज कर दी। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि गीतांजलि समूह के मालिक और फरार आरोपी मेहुल चोकसी के साथ चितालिया फर्जी लेनदेन के जरिए धोखाधड़ी का प्रमुख साजिशकर्ता था।