PM ने 370 और तीन तलाक समाप्त किया, सीएए और राममंदिर का सपना साकार किया

PM ने 370 और तीन तलाक समाप्त किया, सीएए और राममंदिर का सपना साकार किया

देश की जनता ने पिछले साल जिस प्रचंड बहुमत से मोदी जी को सरकार बनाने का जनादेश दिया था, उससे सहज ही यह अंदाज लगाया जा सकता था कि एक कार्यकाल की उपलब्धियों के बाद जनता मोदी जी पर कितना विश्वास करती है और उसे उनसे कितनी अपेक्षाएं हैं।

नहीं दरिद्र कोउ, दुखी न दीना। नहीं कोउ अबुध, न लक्षन हीना।।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामराज्य की अवधारणा प्रतिपादित करते समय यही कहा कि जहाँ कोई दरिद्र न हो, कोई दुखी न हो, कोई दीन-हीन न हो, कोई अशिक्षित न हो और कोई संस्कार विहीन न हो, वही रामराज्य है। ‘रा’ से राष्ट्र और ‘म’ से मंगल अर्थात् राष्ट्र के मंगल की अवधारणा रखने वाला राज्य ही रामराज्य कहलाता है। रामराज्य का अर्थ कोई धार्मिक कर्मकाण्ड अथवा साम्प्रदायिक व्यवस्था को विकसित करने वाला भाव नहीं है, बल्कि सर्वजन के सर्वांगीण विकास की गारंटी देने वाली लोककल्याणकारी व्यवस्था है। इस व्यवस्था को कायम करने के लिये एक ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है, जिसकी संवेदना, सरोकार, सहकार, साहस, दृढ़ता और वैचारिक प्रमाणिकता सदैव संदेहों से परे होती है। ऐसे मनुष्य लंबे कालखण्ड में कभी-कभी कृति रूप में दिखाई देते हैं। आज हम पक्के विश्वास के साथ कह सकते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी का व्यक्तित्व राष्ट्रमंगल अर्थात रामराज्य का पर्याय बना हुआ है।

देश की जनता ने पिछले साल जिस प्रचंड बहुमत से मोदी जी को सरकार बनाने का जनादेश दिया था, उससे सहज ही यह अंदाज लगाया जा सकता था कि एक कार्यकाल की उपलब्धियों के बाद जनता मोदी जी पर कितना विश्वास करती है और उसे उनसे कितनी अपेक्षाएं हैं। जनता के इसी विश्वास को आदर देते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी जी की सरकार ने पिछले एक साल में ऐसे काम किए हैं, जिनके बारे में कभी किसी ने यह नहीं सोचा था कि ये इतनी आसानी और सहजता से किए जा सकते हैं। इन दुष्कर कामों को करने के लिए जनता के अपार समर्थन और विश्वास ने केंद्र की एनडीए सरकार को जो ताकत दी, उसी के दम पर इस सरकार ने कई अविश्वसनीय लगने वाले स्वप्न साकार कर दिखाए।

साकार हुआ एक विधान, एक निशान का सपना

जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के साथ देश की अधिकांश जनता के लिए जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 एक शूल की तरह चुभता रहा है। अनुच्छेद 370 और 35 ए के संरक्षण दिये जाने के कारण कश्मीरी पंडितों के उत्पीड़न, दशकों से कश्मीर में रह रहे अनुसूचित जाति के लोगों के शोषण और पूरे राज्य की डेमोग्राफी को विकृत करने के षडयंत्रों को होने दिया गया। जनसंघ और भाजपा के इस बात पर अटल रहे कि कश्मीर में पनप रहे आतंकवाद और अलगाववाद की वजह यहीं दो कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के चलते किसी ने कभी इन्हें हटाने के बारे में नहीं सोचा। दूसरी बार सत्ता में आने के बाद 05 अगस्त, 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 तथा 35 ए को हटाने और जम्मू कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरियत की चिंता को कोरोना संकट के दौर में भी अपनी आंखों से ओझल नहीं होने दिया, बल्कि इस कठिन समय में भी उन पांच लाख से अधिक हिंदू और सिख विस्थापितों की घर वापसी का रास्ता साफ कर दिया, जो कश्मीर में पनपे आतंकवाद और धार्मिक कट्टरवाद के कारण अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए थे। एक देश, दो निशान, दो विधान अब अतीत की बात है और जम्मू कश्मीर में लौटती हुंई शांति की पदचाप सारी दुनिया को सुनाई दे रही है। आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अन्य बलिदानियों के बलिदान सार्थक सिद्ध हुए है।

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मुस्लिम बहनों को शोषण से मुक्ति

दुनिया के कई मुस्लिम देश दशकों पहले तीन तलाक प्रथा को अन्यायपूर्ण मानते हुए इस पर रोक लगा चुके हैं। लेकिन एक मुस्लिम देश न होते हुए भी भारत की सरकारों ने सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे देश में चलने दिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही यह सरकार मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम लेकर आई, जो 31 जुलाई, 2019 को कानून बन गया। कांग्रेस ने 1985 में शाहबानों को जो दर्द दिया था, उस दर्द का निवारण भाजपा की सरकार ने शायराबानो के रूप में 2019 में कर दिया।

सी.ए.ए. मानवता का बेमिसाल चेहरा

देश की आजादी और विभाजन के समय से ही पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है, अफगानिस्तान आदि से गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना की खबरें लगातार आती रही हैं। इनमें से कई को तो तलवार के जोर पर धर्म बदलने तक पर मजबूर कर दिया गया। इन हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी आदि अल्पसंख्यकों में से हजारों लोग अपनी जान और धर्म की रक्षा के लिए भारत आ गए, जो उनका स्वाभाविक घर है। अपना सब कुछ खोकर आए इन शरणार्थियों की व्यथा को देश महसूस तो करता था, लेकिन इनके लिए किया कुछ नहीं जा सका। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे नेताओं के स्पष्ट आश्वासन के बावजूद बाद की कांग्रेस सरकारों ने अपनी कथित सेक्युलर छवि को चमकाने की मंशा से इन्हें दशकों तक नारकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दिया। केंद्र की मोदी सरकार ने जब अपने दूसरे कार्यकाल में 10 जनवरी, 2020 को नागरिकता संशोधन कानून बनाया, तो जैसे इन लाखों शरणार्थियों का सपना साकार हो गया। 

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आतंक पर एक और प्रहार, नया कानून

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश को आतंकवाद की आंखों में आखें डालकर बात करना सिखाया है। देश में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे मैदानी अभियानों से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक तक ने देश-विदेश में बैठे आतंक के आकाओं को स्पष्ट संदेश दिया है- अब और बर्दाश्त नहीं। एनआईए जैसी जांच एजेंसी जब किसी आतंकी घटना की जांच के दौरान किसी संदिग्ध को हिरासत में लेती थी, तो उसे राज्य सरकार से अनुमति लेना होती थी। लेकिन अगस्त, 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित कराकर सरकार ने यह मुश्किल भी खत्म कर दी।

दुनिया में बढ़ा भारत का मान

ह्यूस्टन में 'हाउडी मोदी’ और गुजरात के अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रमों का सफल आयोजन मोदी जी के विश्व नेता और भारत के विश्वगुरु के रूप में उभरने का संकेत दे रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैसे तो सारी दुनिया से ही संबंध सुधारे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं दुनिया के इस्लामिक देशों के साथ भारत के रिश्ते। सऊदी अरब से लेकर यूएई सहित तमाम इस्लामिक देशों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह इस्लामिक देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ रिश्तों का ही परिणाम था कि कश्मीर मसले पर दुनिया के अधिकांश इस्लामिक देश भारत के साथ खड़े रहे।

संकट बना सेवा और देश को आत्मनिर्भर बनाने का अवसर

दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को कोरोना महामारी के वैश्विक संकट से भी दो चार होना पड़ा। इस सरकार ने न सिर्फ इस संकट से दो-दो हाथ किए, बल्कि इसे पीड़ितों की सेवा और देश को आत्मनिर्भर बनाने के अवसर में बदल दिया। लोगों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लॉकडाउन का कठोर निर्णय अवश्य लिया, लेकिन गरीबों, मजदूरों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता उन्हें बराबर बनी रही। दूसरे और बड़े राहत पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मई को की और 20 लाख करोड़ के इस पैकेज को देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान का नाम दिया। इसमें एमएसएमई, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों, करदाताओं, मजदूरों, किसानों आदि सभी वर्गों के लिए राहतभरे प्रावधान तो शामिल हैं ही, देश को आत्मनिर्भर बनाने की सोच भी है।

कोरोना महामारी के दौर में प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार ने न सिर्फ इस बीमारी से मुकाबले के लिए समुचित उपाय किए, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया के सभी देशों की हरसंभव मदद की। कहीं, भारतीय डॉक्टर और नर्स मरीजों के उपचार में सहायता कर रहे हैं, तो कहीं भारत दवाएं और अन्य जरूरी चीजें भेज रहा है। इस समूचे अभियान की विशेषता यह रही है कि भारत ने हर जरूरतमंद देश की बिना किसी भेदभाव के मदद की है। यही वजह है कि भारत से मदद पाने वालों में जहां महाशक्ति अमेरिका शामिल है, तो गरीब अफ्रीकी देश भी शामिल हैं।

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दूरदृष्टा और दृढ़प्रतिज्ञ प्रधानमंत्री

श्री नरेन्द्र मोदी जी की संपूर्ण कार्यशैली पर हम नजर डाले तो स्पष्ट होता है कि वे एक अहिर्निष सेवावृती और दूरदृष्टा प्रधानमंत्री है, जिनकी प्रतिज्ञा उन्हें निरंतर ध्येय मार्ग पर चलने का संबल देती है। विश्व योग दिवस की उपलब्धि इसका बड़ा उदाहरण है। आज चाहे कोरोना का विषय हो, पाकिस्तान पोषित आतंकवाद हो अर्थात् चीन की सीमा पर हो रही ड्रेगन की दादागिरी हो, सभी विषयों पर मोदी जी के प्रति विश्व का जो विश्वास है वह भारत की बड़ी ताकत बना हुआ है।

शिवराज सिंह चौहान

लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।