Military Advisors लौटे, रक्षा से UPI और ISRO तक कई ऐतिहासिक समझौते, PM मोदी की सेशेल्स यात्रा के बड़े नतीजे

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@narendramodi
अभिनय आकाश । Jun 29 2026 4:28PM

सबसे अहम नतीजों में से एक था सेशेल्स में फिर से चार मिलिट्री एडवाइज़र तैनात करने का भारत का फ़ैसला; इससे उस व्यवस्था को फिर से शुरू किया गया जिसे द्वीप देश की पिछली सरकार ने बंद कर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा केवल दिखावे या कूटनीतिक प्रतीकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और उभरती हुई टेक्नोलॉजी में साझेदारी का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ। सबसे अहम नतीजों में से एक था सेशेल्स में फिर से चार मिलिट्री एडवाइज़र तैनात करने का भारत का फ़ैसला; इससे उस व्यवस्था को फिर से शुरू किया गया जिसे द्वीप देश की पिछली सरकार ने बंद कर दिया था। एडवाइज़र की वापसी एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है और सेशेल्स के सुरक्षा ढांचे में भारत की भागीदारी को और मज़बूत करती है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर दुनिया के सबसे ज़्यादा विवादित भू-राजनीतिक क्षेत्रों में से एक के तौर पर उभर रहा है।

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चार सैन्य सलाहकार लौटे

ये चार सैन्य सलाहकार सेशेल्स के रक्षा और सुरक्षा संस्थानों के साथ मिलकर काम करेंगे और ऑपरेशनल तालमेल, ट्रेनिंग, प्लानिंग और संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने में मदद करेंगे। इनकी वापसी से एक पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल हो गई है, जो हाल के वर्षों में बंद होने से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक अहम आधार रही थी। नई दिल्ली के लिए, यह कदम उस भरोसे का प्रतीक भी है जिस पर यह रिश्ता टिका है और यह पश्चिमी हिंद महासागर में सेशेल्स के पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के तौर पर भारत की स्थिति को फिर से मज़बूत करता है। 

भारत पहले से ही सेशेल्स के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा हिस्सा संभाल रहा है। आज भारत कई तरीकों से सेशेल्स की समुद्री और सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। सेशेल्स के आधे से ज़्यादा समुद्री और हवाई संसाधन या तो भारत ने दिए हैं या भारत उनके लिए मदद देता है। इनमें डोर्नियर एयरक्राफ्ट और पेट्रोल वेसल (गश्ती जहाज) शामिल हैं, जो देश की निगरानी और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं की रीढ़ हैं। भारत की मदद तटीय निगरानी सिस्टम, समुद्री क्षेत्र की जानकारी और क्षमता बढ़ाने वाले प्रोग्राम तक भी फैली हुई है। इन सबका मकसद इस द्वीपीय देश की उस क्षमता को बेहतर बनाना है, जिससे वह अपने विशाल 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन' (EEZ) पर नज़र रख सके। यह रिश्ता और भी अहम हो गया है क्योंकि भारत इस इलाके में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच हिंद महासागर में अपनी साझेदारी को मज़बूत करना चाहता है।

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'मेड-इन-इंडिया' उपकरण सौंपे गए

इस दौरे के दौरान, भारत ने सेशेल्स को 'मेड-इन-इंडिया' फास्ट पेट्रोल वेसल, लेज़र रेडियल बोट, यूटिलिटी वाहन और एम्बुलेंस सौंपीं। उम्मीद है कि पेट्रोल वेसल से सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताएं बढ़ेंगी और पश्चिमी हिंद महासागर में व्यस्त समुद्री रास्तों पर निगरानी बेहतर होगी। हाल ही में सौंपी गई ये चीज़ें सेशेल्स के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के तौर पर भारत की भूमिका को और मज़बूत करती हैं।

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